भांडाफोड़::जांच हुई तो हरिद्वार के मदरसों में फर्जी निकले 12,289 Registration:होगी सरकारी धन की वसूली-DM मयूर:धांधलीबाज़ घबराए मदरसों ने खुद तालाबंदी की गुजारिश की
प्रदेश भर में चल रहा सत्यापन अभियान-अल्पसंख्यक हकदार बच्चों के साथ ना-इंसाफ़ी नहीं होने देंगे-प्रमुख सचिव पराग

Chetan Gurung
हरिद्वार में DM मयूर दीक्षित की अगुवाई में सरकार के आदेश पर मदरसों में चलाए गए सत्यापन अभियान के दौरान नामांकन में बड़े पैमाने पर धांधली का पर्दाफाश हुआ। मदरसों जाँच में खुलासा हुआ कि मार्च-2026 में अभिलेखों में दर्ज 31,780 विद्यार्थियों की संख्या सत्यापन हुआ तो अप्रैल-2026 में कहीं अधिक घट के महज 19,491 रह गई। 12,289 रजिस्ट्रेशन फर्जी साबित हुए।

Minister Khajandas
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Parag Madhukar Dhakate (Special Principal Secretary)

Mayur Dixit-DM Haridwar
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जिलाधिकारी मयूर के मुताबिक फर्जी नामांकन के आधार पर मदरसा संचालक केन्द्र व राज्य सरकार की अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं (Mid Day Meal भी इनमें शामिल) के अन्तर्गत अनुचित ढंग से सरकारी अनुदान प्राप्त करते रहे हैं। अब ऐसे मामलों में दोषी पाए गए मदरसों से विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति और मिड डे मील वितरण के आँकड़ों में पाई गई असमानता के आधार पर सरकारी धन की वसूली की जाएगी। आलम ये है कि खुलासों से घबराए अनेक मदरसे स्वयं ही बंदी के लिए आवेदन दे चुके हैं।
उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि फर्जी नामांकन की शिकायतें पूर्व से ही सरकार को मिल रही थी। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जाँच प्रारम्भ की गई। हरिद्वार के बाद अन्य जनपदों में भी यह सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। जुलाई-2026 से पूर्व सभी मदरसों को नए पंजीकरण प्रक्रिया से गुजरना होगा। जो संस्थाएँ पंजीकरण नहीं कराएँगी, उन्हें बन्द करा दिया जाएगा।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा—”सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक एवं पात्र बच्चों तक पहुँचना चाहिए। फर्जी नामांकन के जरिये सार्वजनिक धन की लूट किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को मिलने वाला प्रत्येक लाभ वास्तव में उन्हीं तक पहुँचाने के लिए सरकार दृढ़ प्रतिज्ञ है। किसी भी स्तर पर अनियमितता-घोटाले-धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को अनुमति प्रदान की है। नई व्यवस्था के अन्तर्गत प्रदेश के समस्त मदरसों एवं अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं को इस प्राधिकरण के साथ-साथ उत्तराखण्ड शिक्षा बोर्ड से भी पृथक अनुमति लेना आवश्यक होगा।



