
Chetan Gurung
सरकारी अफसरों और कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं को अधिक सुदृढ़ किया जा रहा। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की व्यापक योजना पर सरकार में कामकाज शुरू हो गया है। उम्मीद है कि इससे सरकारी आवासीय परिसंपत्तियों का रखरखाव और विस्तार एक साथ होगा।
राज्य संपत्ति विभाग के अनुसार लंबे समय से कई सरकारी आवास जर्जर हो चुके हैं। कर्मचारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे आवासों की पहचान कर उन्हें मरम्मत और पुनर्निर्माण के माध्यम से बेहतर बनाया जाएगा। प्रदेश भर में मौजूद जर्जर सरकारी आवासों का सर्वे शुरू किया जाएगा। उनका मरम्मत किया जाएगा। उनकी जगह नए आधुनिक आवास भी बनाए जा सकते हैं।
जहां भी विभागीय या सरकारी भूमि उपलब्ध है, वहां आवश्यकता के अनुसार नए आवासीय परिसरों के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। इन आवासों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। देहरादून में कुलीन लोगों के Area रेसकोर्स में राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन ओल्ड ऑफिसर्स कॉलोनी क्षेत्र में भी नए आवासों के निर्माण की योजना बनाई गई है। यहां जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद खाली हुई भूमि पर श्रेणी-2 के 31 नए आवास बनाने का प्रस्ताव समिति के समक्ष रखा गया।
6 मार्च 2026 को इसी कॉलोनी में उपलब्ध अन्य भूमि पर श्रेणी-4 के 10 आवासों के निर्माण की योजना भी प्रस्तुत की गई थी। श्रेणी-2 के 31 आवासों पर लगभग 1458.56 लाख रुपये और श्रेणी-4 के 10 आवासों के लिए लगभग 743.95 लाख रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है। समिति की बैठक में इन परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
आवास और राज्य संपत्ति सचिव डॉ R राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। कई जिलों में पुराने सरकारी आवास जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। उनकी पहचान कर मरम्मत और पुनर्निर्माण की योजना तैयार की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जहां भी विभागीय भूमि उपलब्ध है, वहां नए और आधुनिक आवासों का निर्माण कराया जाएगा। सभी परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई गई है।



