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सियासत!!काटने होंगे तमाम विधायकों-मंत्रियों के टिकट!तलवार की धार पर सवारों में बेचैनी:तकदीर लिखने की कलम CM पुष्कर के हाथ:Anti-Incumbency Wave सरकार-BJP के बजाए कई मौजूदा MLAs के खिलाफ:कमर कस के खुल के सामने आने लगे दावेदार

WB-असम फतह से आसमान पर BJP टिकट की अहमियत

Chetan Gurung

पश्चिम बंगाल (WB) और असम में शानदार-धमाकेदार फतह के बाद उत्तराखंड BJP में विधानसभा चुनाव के टिकटों की अहमियत आसमान पर जा चढ़ी है। पार्टी-संघ के भीतर ये राय मजबूती से उभरी है कि CM पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में PM नरेंद्र मोदी-HM अमित शाह के साए तले चल रही सरकार और संगठन को खास दिक्कत चुनाव में नहीं होगी लेकिन Anti-Incumbency Wave कई MLAs और कुछ मंत्रियों के खिलाफ अंदरखाने बहुत तेज है। उनके टिकट काटने होंगे। सरकार-संगठन के पैमानों पर खरा न उतरने वालों की जगह BJP में चुनावी समर में उतरने की इच्छा रखने वाले खुल के सामने आने लगे हैं। उन्होंने मौजूदा विधायकों-मंत्रियों का खून सुखा डाला है, ऐसा कहा जा सकता है।

BJP के चाणक्य और सर्वशक्तिशाली अमित शाह (दाएँ) के साथ CM पुष्कर सिंह धामी (File फोटो)

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टिकट कटने की आशंका में जी रहे मंत्री-विधायक वाकई सांसत-बेचैनी में है। कहने को टिकट Parliamentary Board तय करेगा लेकिन हकीकत से सब वाकिफ हैं। टिकट के मामले में होगा वही, जो मुख्यमंत्री PSD चाहेंगे। कम से कम 90 फीसदी सीटों पर यही होगा। पूर्व में भी टिकटों के मामले में मुख्यमंत्री की सबसे अधिक चली है। पुष्कर का रसूख तो पूर्ववर्तियों से कहीं ज्यादा है। उनकी परिक्रमा करने और करने की चाहत रखने वालों की तादाद में इसलिए इजाफा हो गया है। आला कमान और संघ में PSD पर विश्वास जताने वालों की बड़ी तादाद है। मोदी और शाह उनके चुनाव जीतने के फन और हुनर से बहुत ही अच्छी तरह वाकिफ हैं। उनको ही चुनाव फतह के बाद फिर सरकार की कमान संभालने के लिए  इशारा दिया जा चुका है। ऐसा सार्वजनिक तौर पर खुद मोदी-शाह-BJP प्रमुख नितिन नबीन कर चुके हैं।

मौजूदा मुख्यमंत्री के दौर में कमल का फूल कमाल के अंदाज में देवभूमि में खिला है। जहां नहीं खिला वहाँ कलियाँ तो निकल ही आईं। बाकी BJP राज वाले राज्यों और पुष्कर राज वाले उत्तराखंड में मोदी और शाह की रैलियों-जनसभाओं को भी मानक बनाया जाए तो साफ हो जाता है कि सियासत की दुनिया में PSD कम से कम उत्तराखंड में सबसे बड़े फनकार बन के स्थापित हो चुके हैं। उत्तराखंड में दोनों की रैलियों में सैलाब नजर आया है। पुष्कर विवादों का या तो भ्रूण विनाश कर डालते हैं या फिर उनको इस अंदाज में निबटाते हैं कि सरकार-BJP का सिर दर्द अधिक देर तक नहीं रह पाता है। इस पर तमाम मिसालें हैं।

इस किस्म की की काबिलियत न रख पाने वाले उनके कई पूर्ववर्तियों ने ज़ोर का सियासी झटका, ज़ोर से ही सहा और System से यूं बाहर हुए कि सियासत में भी आज उनके कदम उखड़ गए से नजर आते हैं। मोदी-शाह को पुष्कर बहुत माफिक आते हैं। Congress के दिग्गजों और मंझोलों तक से PSD के रिश्ते अलग किस्म के हैं। विरोधी उन पर इसी लिए निजी हमलों से बचते हैं। अपनी पार्टी के भीतर अलबत्ता, कुछ बेहद महत्वाकांक्षियों का एक दस्ता जरूर है। वे मोरचाबंदी करते रहते हैं। उनको कभी खास कामयाबी नहीं मिल पाई।

खास पहलू ये है कि इस दस्ते से जुड़े लोगों पर पुष्कर की तरफ से जवाबी हमला करने के लिए अचानक उत्तराखंड BJP के सबसे लोकप्रिय और चर्चित चेहरे रहे पूर्व राज्यपाल-पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी सामने आ गए हैं। कोश्यारी की हैसियत पार्टी में भीष्म पितामह किस्म की है। वह संगठन को पहाड़ों में जमाने वाले प्रमुख चेहरा हैं। BJP को अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव में खतरा महसूस नहीं हो रहा लेकिन वह इस पहलू को नजर अंदाज नहीं कर रही कि कुछ मंत्री और कई विधायकों के टिकट काटने ही होंगे।

पार्टी के अहमतरीन ओहदों-जिम्मेदारियों को संभाल रहे लोग साफ महसूस कर रहे हैं कि कई मौजूदा विधायकों को अलविदा कर उनकी जगह नए और अवाम में भरोसा जगाने वाले चेहरों को उतारना बेहतर होगा। कुछ Survey Reports भी संगठन के पास आ चुकी है। ये Reports भी कुछ मंत्रियों और विधायकों का रक्तचाप बढ़ाने के लिए काफी है। दो किस्म के मौजूदा विधायकों या मंत्रियों पर तलवार लटक रही। एक वे,जो तमाम विवादों और आरोपों की रज़ाई-चादर हर वक्त लपेटे रहते हैं। दूसरे वे, जो खराब करें न करें, अच्छा भी कुछ न कर के अजगर-घड़ियाल की तरह पड़े रहते हैं। वे सिर्फ मोदी के नाम-शाह की रणनीति और पुष्कर की मेहनत-चातुर्य के बूते जीते हुए हैं।

आला कमान को अच्छी तरह मालूम है कि Anti-Incumbency Wave (विरोधी लहर) सिर्फ सरकार के खिलाफ नहीं चला करती। मौजूदा विधायकों और मंत्रियों को ले के भी नाराजगी स्थानीय स्तर पर रहती है। ऐसे जन प्रतिनिधियों को कुर्बान कर दिया जाए तो सब ठीक हो जाता है। दुधारी खंजर की धार पर टिके मौजूदा विधायकों-मंत्रियों को निराशा के सागर से अगर कोई यकीनी तौर पर निकाल सकते हैं तो वह सिर्फ और सिर्फ PSD। उनके पास एक किस्म से Veto Power है। इसका इस्तेमाल अलबत्ता, वह बहुत समझदारी और चतुराई से मोदी-शाह को यकीन में ले के करेंगे। अपने भरोसेमंदों के लिए वह निस्संदेह इसका प्रयोग कर सकते हैं।

इन चेहरों की जगह लेने के लिए नए चेहरे भी सिर पर साफा बांध के नए दूल्हे की तरह सामने आने लगे हैं। इनमें बहुत युवा और प्रतिभावान के साथ ही अनुभवी भी शामिल हैं। जहां ज्यादा दावेदार,वहाँ मौजूदा मंत्री-विधायक खबरदार, ऐसा कह सकते हैं। अगर टिकट बचाने की हैसियत मुख्यमंत्री के पास है तो देने या काटने की भी ताकत उनके ही पास हैं। उनके आसपास टिकट के लिए मंडराने वालों की भीड़ बढ़ रही है। आने वाले दिनों में वह रानी मधुमक्खी बन जाएंगे,जो हर वक्त टिकट बचाने वालों और टिकट चाहने वालों से घिरे दिखेंगे। इसमें कोई शक-शुबहा किसी को नहीं है।

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