बेलौस-बेलाग कोश्यारी:PSD खास हैं,महज इस पर अंगुली!
The Corner View

Chetan Gurung
भगत सिंह कोश्यारी तब महाराष्ट्र के Governor थे और Goa का अतिरिक्त जिम्मा भी संभाल रहे थे। उत्तराखंड में त्रिवेन्द्र सिंह रावत CM थे। उद्योगपतियों के संगठन, जिसमें अहम ओहदे BJP से जुड़े चेहरों के पास थे। ONGC के KDMIPE Audi में BSK का सम्मान समारोह रखा गया था। आयोजन की रूपरेखा में आज के MP अजय भट्ट की खास भूमिका थी। सभी बोले और आखिर में कोश्यारी का उद्बोधन हुआ। पहाड़ से पलायन पर तकरीबन सभी (TSR समेत) उनसे पहले बोले थे। सभी ने पलायन और रीते होते पहाड़ पर मन भर फिक्र जताई थी। कोश्यारी ने पलायन पर बोलने के दौरान उन पर ही कटाक्ष मार दिया जो उनसे पहले पलायन-पलायन कर रहे। उन्होंने कहा,आज हम पलायन-पलायन कर रहे। पहले हम तो पहाड़ जाएँ। खुद त्रिवेन्द्र (आज हरिद्वार से MP लेकिन तब डोईवाला से MLA थे) मैदान से लड़ रहे और लड़ना चाहते हैं। सभी अवाक और हतप्रभ रह गए थे। भगत दा ने सीधे उस CM पर कटाक्ष कर दिया था, जो उनके शिष्यों में शुमार थे। उनका बोलना और कार्यक्रम खत्म हुआ तो मैंने उनसे चाय के दौरान कहा। आपने सीधा त्रिवेन्द्र पर प्रहार कर दिया। आपके ही खास हैं। परोक्ष या सामान्य ढंग से भी बोल सकते थे। उन्होंने बेलाग अंदाज में कहा,`बोल दिया तो बोल दिया’।

भगत सिंह कोश्यारी

PM नरेंद्र मोदी के बेहद भरोसेमंद CM पुष्कर सिंह धामी पर सियासी हमले कोश्यारी को बर्दाश्त नहीं!
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एक और मिसाल!भुवनचन्द्र खंडूड़ी CM थे। साल था 2007 का। BJP के भीतर माहौल बहुत गरम था। केदार सिंह फोनिया नाराज थे कि भुवन (वह पहले नाम से CM को पुकारते थे।मित्र थे) उनको मंत्रिमंडल में नहीं लिया गया। कोश्यारी नाखुश थे कि तमाम मेहनत और पार्टी के भीतर लोकप्रियता के पैमाने पर खरा उतरने के बावजूद उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। उनके पास मरजीवड़ों का जबर्दस्त आक्रामक दस्ता हुआ करता था। आज के CM पुष्कर सिंह धामी उस दस्ते के सरदार हुआ करते थे। BCK और BSK में आपसी तल्खी ख़ासी हो चुकी थी। बोलचाल आम तौर पर बंद सी थी। रमेश पोखरियाल निशंक तटस्थ भाव दिखाते हुए मौके की ताक में माने जाते थे कि क्या मालूम दो सरदारों की जंग में हुकूमत उनके हाथ लग जाए (ऐसा हुआ भी।वह BCK के बीच में हटाए जाने पर उनके उत्तराधिकारी बने थे)।

Chetan Gurung
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जब BCK को CM बने कुछ ही दिन हुए थे तो उस वक्त के उनके खासमखास और अब दिवंगत उमेश अग्रवाल ने एक दिन मुझसे कहा कि जनरल साहब (मैं BCK को जनरल साहब ही कहा करता था) का Interview कर देते। मैंने कुछ दिन बाद ऐसा किया भी। BJP के देहरादून के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल दिवंगत उमेश के सुपुत्र हैं। मुझे याद है कि मुख्यमंत्री के नाते साक्षात्कार देने के दौरान सेना के पूर्व Major General होने के नाते उन्होंने अपने खिलाफ पार्टी में चल रहे बगावती तेवरों पर तल्खी से जवाब दिया था,`जनरल रहा हूँ। ऐसों से निबटना आता है’। अगले दिन ये खबर अखबार (तब मैं `अमर उजाला’ का State Bureau Chief हुआ करता था’) में पहले पन्ने पर मोटी Headlines के साथ छपी। कोश्यारी से इस पर खबर छपने वाले दिन ही पत्रकार प्रतिक्रिया जानने पहुँच रहे थे। मैंने अलग से उनके साथ बातचीत की। उन्होंने Reaction दिया। वह General हैं। हम तो सिपाही हैं। जंग में खून तो सिपाही ही बहाते हैं। अगले दिन मैंने `वह तो जनरल हैं,हम तो सिपाही हैं’Heading के साथ पहले पन्ने पर फिर खबर लिखी थी। दोनों के बीच की जुबानी जंग ने दरार और चौड़ी कर दी थी। कोश्यारी ने पल भर के लिए भी सोचा नहीं कि मुख्यमंत्री से सीधे पंगा लेना नुक्सानदेह हो सकता है।
कोश्यारी RSS की कठोर पृष्ठभूमि (आज वाली नहीं, जो Multinational Brands की पोशाक और घड़ियाँ-जूते पहने होटल-रेस्तरां और बड़े-अमीरों के घर-परिवार के समारोहों में दिख जाया करते हैं),दो जोड़ वस्त्र और असल भिक्षाटन से गुजारा करने वाली परंपरा से तप के निकले हैं। आज भी वही सादगी उनमें नजर आती है। उनके Defence Colony वाले किराये के घर पर जाएँ तो उनका बैठक कक्ष बेहद साधारण नजर आएगा। बेहद सादा भोजन वह शुरू से खाते रहे हैं। मैं उनके साथ कई बार हवाई दौरों पर भी रहा। घर भी जाता रहा। साथ काफी वक्त गुजारा। लिहाजा काफी कुछ उनकी जीवनशैली का अंदाज है। अपनों को वह वास्तव में बहुत स्नेह करते हैं। चाहे वह सामाजिक जीवन से हों या फिर सियासी जिंदगी से ताल्लुक रखते हों। राजनीति से संन्यास के बावजूद राजनीति उनके कदमों और तन से लिपटी हुई है। उनके पास दुखड़ा सुनाने वालों और मदद के तलबगारों को रोजाना देखा जा सकता है। मुँहफट-बेलाग-बेलौस बोलना उनकी खासियत पहले भी थी और आज भी कायम है।
इतनी पुरानी यादों के सफर को मैंने किस लिए जिया? दरअसल, इन दिनों BSK का एक Video खूब Viral है। इसमें वह पौड़ी के लोगों से किसी आयोजन में कह रहे हैं कि आपके वाले तो मोदी जी और अमित शाह जी से रोज मिलते हैं। आपको क्या दिक्कत है? उनके कहने का लब्बो-लुआब MP अनिल बलूनी को ले के ये था कि वह PM-HM से आए दिन मिलते रहते हैं। क्षेत्र की समस्याओं को वह जरूर दूर करेंगे। अगर क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं तो जल्दी जरूर आएंगे। हो सकता है कि कोश्यारी ने ये लोगों को दिलासा और सान्त्वना देने के लिए सियासी अंदाज में बोली हो। सच में बोला हो। उनकी प्रतिष्ठा है ही बेलाग-बेलौस बोलने वाले की। सियासी समीक्षक लेकिन ऐसा नहीं मान रहे। उन्होंने कोश्यारी की बातों को AB पर तंज़ के तौर पर माना है। ये बात दीगर है कि कोश्यारी ने हो सकता है कोई कटाक्ष न किया हो। लोग गलत अर्थ लगा रहे हों। Social Media इन दिनों इसके चलते खूब गरम नजर आ रहा।
दो राय नहीं कि CM पुष्कर सिंह धामी आज भी BSK के बेहद खासमखास का दर्जा रखते हैं। वह शायद ये समझाना चाह रहे हों कि राज्य में मुख्यमंत्री ही सब कुछ होता है। उनके पास जाएँ। उनसे जुड़ें। इधर-उधर दौड़ने-कूदने का फायदा नहीं। CM PSD का कोश्यारी से नाता बेहद पुराना है। कोश्यारी जब उत्तराखंड गठन के बाद ऊर्जा समेत कई विभागों के मंत्री बनें तो पुष्कर तत्काल उनसे जुड़ के उनके बड़े कार्यों को बाखूबी संभालते थे। जब कोश्यारी को नित्यानन्द स्वामी (अब मरहूम) को हटा के अन्तरिम सरकार में CM बनाया गया तो पुष्कर उनके बेहद शक्तिशाली और इकलौते OSD हुआ करते थे। बाद में अपना सियासी भविष्य बनाने के लिए पुष्कर ने राजनीतिक कार्यों और क्षेत्रों में जा के ध्यान जमाना शुरू किया। इसका फल उनको साल-2012 में मिला। जब वह पहली बार विधायक बने। खटीमा फतह किया।
उससे पहले वह दो बार BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने। आज तक उनसे अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने और उस पर अमल करने वाला उत्तराखंड युवा मोर्चा में नहीं आया। अब तो मोर्चा अध्यक्ष कौन है, ये जानने के लिए भी दिमाग लगाना पड़ता है। पुष्कर इस कुर्सी पर थे तो पार्टी और पत्रकारों एक दिमाग में समाए हुए थे। ये छिपा सच नहीं है कि कोश्यारी और पुष्कर एक-दूसरे को किसी दिक्कत और विपत्ति में देख नहीं सकते हैं। खंडूड़ी को जब Pacific Hotel में कल्याण सिंह की मौजूदगी में साल-2007 की एक शाम विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमन्त्री चुना गया था तो पुष्कर के चेहरे पर अपने सियासी गुरु के CM बनने से चूक जाने के चलते रोष और दुख साफ नजर आया था। आज अगर उनके लिए कोश्यारी किसी अन्य को निशाने पर लेने से नहीं हिचकते हैं तो इसमें न हैरानी है न ही कुछ गलत। पुष्कर और कोश्यारी को एक ही सिक्के के दो पहलू के तौर पर देखा जा सकता है। कोश्यारी पर कुमायूं के लोगों और पुष्कर को समर्थन देने के लिए निशाना साधा जा रहा है। जो भी हो, वह बदलने वाले नहीं हैं। इसकी गारंटी,उनको करीब से जानने वाले लेने से कभी नहीं हिचकेंगे।



