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24 कैरेट खरे DMs!पुष्कर सरकार के नगीने बने नितिन-मयूर-प्रशांत-ललित-विशाल

The Corner View

Chetan Gurung

आम तौर पर मुझको किसी भी किस्म के सर्वेक्षणों पर खास यकीन नहीं होता लेकिन मुझको इसमें रत्ती भर हैरानी नहीं है कि Fame India-Asia Post की देश भर के DMs को ले के किए गए Survey में छोटे से राज्य उत्तराखंड के 5 उम्दा-प्रतिभावान-अवाम के भरोसे को जिंदा रखते नौकरशाहों ने जगह बनाई। मैं भी सूची में शामिल इन नामों से पूरा इत्तफाक रखता हूँ। उधम सिंह नगर के नितिन भदौरिया,हरिद्वार के मयूर दीक्षित,उत्तरकाशी के प्रशांत आर्य,नैनीताल के ललित मोहन रयाल और रुद्रप्रयाग के विशाल मिश्र निस्संदेह सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों में शुमार होने के लिए सभी मानक पूरा करते हैं। बेशक कुछ लोग पौड़ी की स्वाति भदौरिया और देहरादून के सविन बंसल के नाम इस List में देखना चाहते थे। संयोगवश में विशाल को छोड़ बाकी Collectors की कार्यशैली को मैंने काफी करीब से देखा और महसूस किया है।

CM Pushkar Singh Dhami

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Nitin Bhadauria and Swati Bhadauria

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Mayur Dixit

Prashant Arya

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Lalit Rayal
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Vishal Mishra

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नितिन और मयूर प्रशासन के नजरिए से सबसे कठिन जिलों की कमान संभाले हुए हैं। CM पुष्कर सिंह धामी ने नितिन को अपने गृह जिला और मयूर को धार्मिक राजधानी किस्म के जिला वाकई बेहद सोच-समझ के सौंपा होगा। दोनों की प्रशासन में कसी हुई पकड़ के लोग और सरकार में ऊंचे ओहदों पर बैठे लोग भी कायल हैं। इनमें प्रशांत और ललित को न जोड़ना अनुचित होगा। चारों की खासियत है कि वे प्रशासनिक कामकाज के साथ ही लोगों के प्रति अपने अच्छे व्यवहार और सामाजिक प्रबंधन के लिए भी जाने जाते हैं। त्वरित और प्रचार की भूख से इतर वाले फैसले और कदम उठाना उनकी USP है।

Chetan Gurung

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साल-2011 Batch के नितिन को ले के एक मिसाल दूँ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चाहते थे कि 38वें National Games में सभी Events उत्तराखंड में ही हों। गुणवत्ता में भी कमी न हो। पिछले साल जनवरी-फरवरी में ये Games ऐतिहासिक अंदाज में उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों में आयोजित हुए थे। सभी Events की तैयारी हो चुकी थी लेकिन Trap Shooting Event फंस गया था। उसके लिए कम से कम 20 एकड़ जमीन की दरकार थी। जो मिल नहीं रही थी। देहरादून-हरिद्वार देख लिया गया था। एक GTCC Member के साथ मैं Dinner कर रहा था। तभी Uttarakhand Olympic Association के महसचिव DK सिंह का फोन आया कि जमीन नहीं मिली तो Trap Shooting को इंदौर या दिल्ली में आयोजित कराना मजबूरी होगी। रात काफी हो चुकी थी। Games शुरू होने के लिए बामुश्किल 1 महीना रह गया था।

मैंने सचिव (मुख्यमंत्री और गृह-कार्मिक) शैलेश बगौली को तत्काल फोन पर बताया और उधम सिंह नगर के DM नितिन से बात कर जमीन तलाश कराने की जरूरत जताई। मुझे यकीन था कि नितिन जरूर इस समस्या का हल ढूंढ लेंगे। चंद मिनट के भीतर नितिन का फोन आया कि जमीन मिल जाएगी। फिक्र न करें। CM साहब की इच्छा का पूरा पालन होगा। अगले दिन दोपहर 1 बजे तक जमीन मिल गई थी। उसको फिर युद्ध स्तर पर NG Event के लिए समय से पहले ही तैयार कर लिया गया। नितिन ने वाकई निजी स्तर पर बहुत योगदान NG के दौरान दिया था। मयूर दीक्षित 2013 Batch के हैं। Super Time Scale के लिए अभी भी उनके पास 3 साल हैं। इसके बावजूद उनकी परिपक्वता किसी भी खुर्राण्ट अनुभवी प्रमुख सचिव से कम नहीं दिखाई देती है।

मयूर को मितभाषी-धीमे लेकिन सख्ती से बोलने के लिए जाना जाता है। दिए लक्ष्य जितने भी कठिन हों, उसको वे हासिल कर गुजरने में कसर नहीं छोड़ते हैं। देहरादून के DM सविन बंसल का Promotion 17 महीने पहले हो चुका है। उनको हटना ही है। केंद्र सरकार में उनका Empanelment हो चुका है। राजधानी के नए DM के तौर पर मयूर और आशीष चौहान (साल-2012 Batch) के नामों को मजबूत दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशांत और ललित उन नौकरशाहों में हैं, जो अपने काम के साथ ही अपने व्यवहार से भी लोगों को संतुष्ट करने या फिर काम हो न हो, नाराज न होने देने का हुनर रखते हैं। दोनों बेहद Easy Going और हर वक्त उपलब्ध तथा अपनी बात लोगों को खुल के रखने देने के ली प्रेरित करते हैं। दोनों की काबिलियत को ले के कोई शक किसी को नहीं है। ये कम अहम पहलू नहीं है कि ललित और प्रशांत PCS से IAS बने हैं लेकिन उनकी कार्यशैली किसी भी या फिर तमाम Direct (Recruit) IAS अफसरों से बेहतर है या फिर बराबर दिखाई देती है।

2018 Batch के विशाल मिश्र से कभी मुखातिब नहीं हुआ हूँ लेकिन रुद्रप्रयाग का जिम्मा संभाले उनको कुछ ही वक्त हुआ है। इसके बावजूद उनको सर्वेक्षण List में जगह मिली है। ये साबित करता है कि उनके भीतर गुण हैं जो साफ झलकते हैं। इन नौकरशाहों ने एक किस्म से ये संदेश भी बाकी नौकरशाहों को दिया है कि काम बेहतर करना ही काफी नहीं है। लोगों के दिलों को अपने व्यवहार और त्वरित नतीजे दे कर भी जितना होता है। विवादों और पचड़ों से दूर रहना जरूरी है। कुछ नौकरशाह अच्छा काम करते और संदेश देते दिखते हैं लेकिन ऐसा वे तभी करते हैं, जब उनका खुद का मन होता है। कहीं से मिले सही Feedback या जन असुविधाओं पर उनकी तवज्जो तब तक नहीं जाती जब तक वे खुद को Convince नहीं कर पाते हैं। अच्छी बात ये है कि Fame India-Asia Post ने लोगों संग बर्ताव को भी Best DMs के चयन में एक मानक रखा।

Survey में सभी राज्यों और AGMUT (Arunachal-Goa-Mizoram-Union Territory) के Collectors-DMs को शामिल किया गया था। उत्तराखंड के 5 नौकरशाहों को इसमें जगह मिलना, सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर के लिए भी तारीफ बनती है। UP-राजस्थान-MP-Bihar-महाराष्ट्र-तमिलनाडु और कई अन्य उत्तराखंड से बड़े राज्यों के महज 3 या फिर औसत के लिहाज से उत्तराखंड से कम तादाद में नाम इस सूची में जगह बना पाए हैं। नौकरशाहों का चयन करने की सूझबूझ और नजर के लिए PSD को वाकई पूरे अंक दिए जाने चाहिए। अभी शासन और जिलों में फेरबदल होने हैं। उम्मीद की जा रही है कि कम से कम इस सूची में शामिल 2 या 3 को बेहतर Posting दी जा सकती है। देहरादून में किसको DM भेजा जाता है और प्रशांत आर्य को अधिक बेहतर जिला दिया जाता है या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।

उत्तराखंड के लिए ये अच्छा संकेत है कि यहाँ कई वरिष्ठ (Post Super Time Scale and Super Time Scale),कई मँझोली वरिष्ठता (Selection Grad) वाले और Junior Administrative Grade (JAD) में बेहतरीन अफसरों की पर्याप्त तादाद उपलब्ध है। Post Super Time Scale में भूपेन्द्र कौर के VRS के बाद रमेश कुमार सुधांशु और L फैनई वाकई लाजवाब हैं। सुधांशु ने वक्त के साथ खुद को न सिर्फ बतौर नौकरशाह जम के निखारा बल्कि Career के शुरुआती दौर वाले नौकरशाह से वह एकदम भिन्न नजर आते हैं। मौजूदा मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन के बाद कौन, का सिर दर्द CM पुष्कर को नहीं रहने वाला है। आक्रामक और सुलझे और नतीजा देने वाले नौकरशाह हैं सुधांशु। फैनई को शरीफ और गुजरे जमाने के दिवंगत नौकरशाह सुरजीत किशोर दास (मुख्य सचिव रहे) की श्रेणी में शुमार किया जा सकता है। उनको अपने कामकाज से इतर कुछ और से कोई मतलब नहीं। विवाद उनके कभी करीब भी नहीं फटका। दोनों 1997 Batch के हैं। CS आनंदबर्द्धन के बाद वही राज्य के Senior Most नौकरशाह हैं।

भारत सरकार में Deputation पर चल रहे दो Seniors अमित नेगी (1999 Batch) और सेंथिल पंडियन (2002 Batch) के जल्द उत्तराखंड लौटने की गुंजाइश नहीं है। वह भी वापिस आते हैं तो उत्तराखंड में किसी भी सरकार के लिए प्रशासन चलना वास्तव में कम मुश्किल होगा। अमित को भी भरपूर संभावनाओं से लक़दक़ नौकरशाह समझा जाता है। PMO में PM नरेंद्र मोदी के Agenda की ज़िम्मेदारी बतौर अपर सचिव संभालना हर किसी के वश का नहीं होता है। R मीनाक्षी सुंदरम,शैलेश बगौली,नितेश झा,दीपक रावत,R राजेश कुमार,V विनय कुमार,धिराज गर्ब्याल के पास अहम महकमे हैं। वे मुख्यमंत्री के भरोसेमंद समझे जाते हैं। महकमों के बँटवारे को मानक न बनाया जाए तो उत्तराखंड में उपलब्ध दिलीप जावलकर,श्रीधर बाबू अद्दांकी,विनोद सुमन,युगल किशोर पंत,रणवीर चौहान,सोनिका,प्रतीक जैन,अंशुल समेत तमाम काबिल नौकरशाहों की ख़ासी तादाद है।

किसी भी नौकरशाह को कामकाज के साथ उनके व्यवहार से भी तौला और याद किया जाता है। चाहे वह IAS हो या फिर IPS अफसर। PCS और PPS में भी कई शानदार अफसर उत्तराखंड में रहे हैं। अब वैसी जमात भले बहुत कम दिखाई देती है। जिन्होंने उत्तराखंड और उससे पहले UP के जमाने को करीब से देखा है, वे बेहतर ढंग से तब के और आज के दौर के नौकरशाहों में अंतर बता सकते हैं। भले काम करने का माहौल और हालात एकदम जुदा हो चुके हैं। उत्तराखंड बनने के बाद के IAS अफसरों में मधुकर गुप्ता,डॉ रघुनंदन सिंह टोलिया,M रामचंद्रन,सुरजीत किशोर दास,नृप सिंह नपल्च्याल,विभापुरी दास,सुभाष कुमार,आलोक जैन,राकेश शर्मा (विभा केंद्र सरकार में कार्मिक सचिव बनीं और बाकी उत्तराखंड में Chief Secretary बने) ने अपने ढंग से कामकाज में छाप छोड़ी। जब UP का दौर था तो बतौर देहरादून के DM शिशिर प्रियदर्शी-राकेश बहादुर सिंह-भूपेन्द्र सिंह और उत्तराखंड गठन के दौरान निवेदिता शुक्ल वर्मा को दून घाटी के पुराने वाशिंदे आज भी याद करते हैं। इनमें हर एक बहुत दमदार थे। 1991 Batch वाली UP Cadre की निवेदिता अभी सेवा में हैं। बाकी रिटायर हो चुके हैं।

रामचंद्रन और आलोक लोगों से अधिक मेलजोल में यकीन नहीं रखते थे लेकिन नतीजे देने वालों में उनको शुमार किया जाता है। सुरजीत-नृप सिंह-सुभाष से कोई भी आम शख्स कभी भी मुलाक़ात कर सकते थे। राकेश शर्मा से बड़े हरफनमौला और हर समस्या का चुटकियों में समाधान करने वाले मुख्य सचिव की आज तक तलाश है। कर्मचारी हो या अन्य तबके के लोग, उनको आय भी शिद्दत से उसी तरह याद किया करते हैं,जैसे डॉ टोलिया और सुरजीत दास को। सुरजीत मानवीय गुणों की खदान थे। कम बोलने वाले लेकिन हर किसी की पीड़ा को समझने वाले। राकेश किसी को भी मदद करने के लिए किसी भी हद तक जाने वाले नौकरशाह। सुरजीत-डॉ टोलिया से अधिक पढ़ाकू नौकरशाह मैंने कम देखे। हो सकता है मैंने न देखे हों लेकिन विजेंद्र पाल और आलोक जैन की याददाश्त को दाद दी जा सकती है। सही काम हो तो उनको किसी की भी मदद करने में कुछ पल लगते थे। कुमायूं के एक पद्मश्री लेखक की मदद करते मैंने विजेंदर पाल को कुछ मौकों पर खुद देखा।

रामचंद्रन,पाल,जैन,राकेश से बड़े-बड़े और खुर्राण्ट नौकरशाह खौफ खाया करते थे। पूर्व के नौकरशाहों के पास आज के नौकरशाहों से ज्यादा सही Ground Reality से जुड़ी रिपोर्ट्स होती थी तो इसकी वजह उनका आम लोगों से जुड़े रहना और उनका विश्वास जीतना था। IPS अफसरों में विजय राघव पंत,सुभाष जोशी सरीखे दबंग DGP हुए तो कंचन चौधरी भट्टाचार्य और ज्योति स्वरूप पाण्डेय सरीखे इंसानियत से लबरेज शख्सियत भी थे। कई IAS-IPS अफसरों की खूबियाँ और कमियाँ हर किसी को मालूम नहीं है लेकिन वे अभी नौकरी में हैं। लिहाजा,अभी ये सब बोलने का वक्त नहीं है।

 

 

 

 

 

 

 

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