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एक शानदार IAS अफसर का फर्जी अफसर `पुत्र’

The Corner View

Chetan Gurung

कुछ साल पहले IAS अफसरों की स्वप्निल Posting जो राज्य सरकार में सबसे बड़ी है, यानि Chief Secretary की कुर्सी से शानदार प्रतिष्ठा और सेवा के बाद Retire हुए S रामास्वामी के पुत्र यशवर्द्धन फर्जी अफसर (कभी IAS-कभी IPS-कभी Army Officer तो कभी खुफिया अफसर) बन कर लोगों को ठगने के जुर्म या आरोप में पुलिस के हाथों धर लिए गए। मुझे रामास्वामी के लिए वाकई खेद है और उनके दुख के साथ दुख बांटना चाहता हूँ। वह एक शानदार मेहनतकश और बगैर किसी फूँ-फाँ के देश की सर्वोच्च सेवा में शीर्ष कुर्सी पर पहुंचे ऐसे शख्स हैं, जो अपने पुराने रिश्तों और दोस्ती को निभाने में सेवा के दौरान भी यकीन रखते थे। ये विडम्बना है कि उनको आज उनकी विशेषताओं के बजाए गलत संदर्भ में याद किया जा रहा है।

ताज्जुब है कि उनका बेटा अपने जिंदगी के मकसद में कामयाब न हो पाने पर बेहद गलत राह पर चल पड़ा। जो सिर्फ आपराधिक कृत्य है। उसके बारे में कहा जाता है कि वह पढ़ाई में बेहद होनहार था और अपने पिता की तरह IAS या फिर IPS बनने की तमन्ना रखता था। जो वह नहीं बन पाया। फिर वह ठगी और धोखाधड़ी के धंधे पर उतर आया। ये पुलिस का कहना है। उस पर लगे आरोप अदालत में साबित होने हैं। आम तौर पर IAS या IPS अफसरों के बच्चों को मैंने या तो अपने पिता की तरह All India Administrative Service के अफसर न बनने पर अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में जाते या फिर MNCs में अच्छी-ख़ासी पढ़ाई कर के मोटी पगार पर बड़े ओहदों पर जाते देखा है। खास तौर पर RR वाले IAS-IPS अफसरों की संतानों को ऐसा करते देखा है।

Chetan Gurung

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कुछ दिन पहले ही पूर्व DGP अशोक कुमार से फोन पर और उनकी छोटी बेटी कुहु से Message पर बात हुई। कुहु शानदार बैडमिंटन खिलाड़ी रही हैं। Injury के चलते खेल छूटा और उसको घर रहना पड़ा। बस इसी दौरान वह अचानक पढ़ाई में ऐसी डूब गई कि साल भर बाद ही उसने दुनिया के सबसे कठिन UPSC परीक्षा पास कर ली और IPS बन गई। कुहु को गुजरात Cadre मिला है। Batch 2024 है। उसका भविष्य उज्ज्वल दिखता है। और भी कई IAS अफसरों के बारे में जानता हूँ, जिनके बच्चों ने प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई लेकिन कई ऐसे नौकरशाहों से भी वाकिफ हूँ, जो अपनी संतानों से या तो परेशान रहें,या फिर उनके Career से संतुष्ट नहीं दिखते थे।

बेशक वे अपने बच्चों से जैसी उम्मीद करते थे, वैसा हुआ नहीं लेकिन कोई भी इतने अभागे नहीं रहे, जितने रामास्वामी। रामास्वामी उत्तराखंड के उन नौकरशाहों में रहे, जिनको नफासत बेहद पसंद थी। वह बेहद शालीन और शानदार पोशाक पहनने के साथ ही Electronic Gadgets के शौकीन थे। धीमी आवाज में धीरे-धीरे बोलना उनकी नफासत का हिस्सा था। उनकी आवाज अवश्य बेहद भारी है, लेकिन उसमें कड़कपन कभी नहीं झलकता था। मातहतों को डांटने का भी उनका अलग और बेहद सुलझा तथा दायरे वाला हुआ करता था। वह जब अपर सचिव हुआ करते थे, तब से उनसे वाकफियत थी। फिर वह सचिव,प्रमुख सचिव और मुख्य सचिव की कुर्सी तक पहुंचे। बिना किसी विवाद के नौकरी पूरी की। वह साल-2016 से 2017 तक उत्तराखंड के CS रहे।

रामास्वामी एक किस्म से सुरजीत किशोर दास, इन्दु कुमार पांडे,नृप सिंह नपल्च्याल,सुभाष कुमार,N रविशंकर,शत्रुघ्न सिंह,उत्पल कुमार सिंह की परंपरा वाले CS या नौकरशाह थे। जो बहुत गुस्सा आने पर भी आपा नहीं खोते थे। संयमित रहते थे और शांति से अपना गुस्सा जाहिर करना पसंद करते थे। रिटायर होने के बाद कुछ साल पहले वह मुझे गढ़ी कैंट में एक छोटे से डिपार्टमेंटल स्टोर में अचानक मिले थे। उनके साथ उनकी पत्नी थीं। उन्होंने बताया कि वह भले अब राजपुर में रहते हैं लेकिन घरेलू सामान और फल-सब्जी लेने गढ़ी ही आते हैं। वह पहले टप्केश्वर मंदिर के करीब स्थित पर्यटन विभाग के अहाते में स्थित बंगले में रहा करते थे।

हम दोनों उनके सचिवालय स्थित दफ्तर में शासन और प्रशासन से जुड़ी बातें काफी किया करते थे। वह अपने जीवन के संघर्ष की कहानी भी बताया करते थे। दक्षिण भारतीय होने के बावजूद उनकी बेहद साफ और अच्छी हिन्दी के बाबत उन्होंने खुद बताया था कि वह दिल्ली बहुत रहे। केन्द्रीय सचिवालय में बहुत कम आयु में नौकरी करने लगे थे। बाद में वह UPSC के जरिये IAS बन गए। रामास्वामी के दफ्तर में आम तौर पर नाहक भीड़ नहीं हुआ करती थी। वह चंद और अपने भरोसेमंद पुराने लोगों से ही बातें करना और उनके साथ चाय-कॉफी पीना पसंद करते थे। वह उन बहुत कम नौकरशाहों में शुमार होते थे, जिन्होंने अगर बहुत लोगों की मदद सीमा से बाहर या भीतर रह के नहीं की तो लोगों का नुक्सान भी करने से सामान्यतः बचते थे।

सिवाय एक IFS अफसर के बारे में एक दिन उन्होंने मुझसे राय मांगी कि उनके बारे में क्या सोचते हैं। मैंने सकारात्मक जवाब दिया तो उन्होंने बताया कि उस IFS अफसर की UP के जमाने की सेवा भी बहुत दागदार रही है। उत्तराखंड में बढ़िया Postings ले रहा। उनकी बात बाद में वाकई सच साबित हुई। वह IFS अफसर बाद में न सिर्फ जालसाजी में गिरफ्तार हुआ बल्कि जेल यात्रा भी कर आया। तब तक रामास्वामी भी रिटायर हो चुके थे। उनका बेटा यशवर्द्धन जब उनकी तरह नौकरशाह नहीं बन पाया तो ठगी और फर्जीवाड़ा पर उतर आया। पुलिस ने उसको दिल्ली से गिरफ्तार किया। उसके घर से कई फर्जी ID Cards,Visiting Cards,Army और Para Military Uniforms और वर्दी में लगाए जाने वाले रिबन बरामद किए।

देहरादून पुलिस के मुताबिक यशवर्द्धन लोगों को सरकारी नौकरी लगवाने,सरकारी टेंडर दिलाने,Companies के पंजीकरण जल्दी कराने का झांसा दिया करता था। इसकी एवज में वह उनसे मोटी रकम ऐंठता था। एक पिता का दुर्भाग्य इससे अधिक क्या हो सकता कि जिन आला पुलिस अफसरों की टांगें कभी उनके सामने खड़े होने में काँप जाया करती थीं, उनके कहीं जूनियर पुलिस अफसर उनके बेटे की करतूत के चलते उनके घर पर घुस के छानबीन कर रहे। मुझको उनसे वाकई सहानुभूति है कि उनको ऐसे दिन देखने को मिल रहे। ये प्रकरण युवाओं को ये भी सीख देता है कि नाकामी मिलने के बावजूद कम से कम जुर्म के दलदल में न घुसे। बड़े-बड़े लोग भी जुर्म करने के बावजूद एक दिन कानून के शिकंजे में जरूर फँसते हैं। उनको कोई नहीं बचा सकता है।

 

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