Biggest Breaking::इसको बोलते हैं कठोर Action! IAS वरुण चौधरी घोटाले में बर्खास्त होंगे:करमेन्द्र का भी Career तबाह: हरिद्वार Land Scam:चरम पर CM पुष्कर का War against Corruption
उत्तराखंड में आज तक की सबसे सख्त कार्रवाई: किसी Direct IAS के खिलाफ पहली बार बर्खास्तगी की कार्रवाई:CS की अध्यक्षता वाली Vigilance जांच में पाए गए दोषी

Chetan Gurung
CM पुष्कर सिंह धामी ने आज वह Action लिया,जिसकी मिसाल आइंदा सालों में शायद देश भर में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के मामले में दी जाएगी। हरिद्वार में भूमि खरीद घोटाले में दोषी पाए गए युवा IAS अफसर वरुण चौधरी (2017 Batch-DR) को बर्खास्त करने का कदम पुष्कर सरकार ने उठाते हुए केंद्र सरकार से इस पर अमल की सिफ़ारिश कर दी। घोटाले के दौरान DM रहे IAS अफसर करमेन्द्र सिंह का भी कैरियर तबाह हो गया है। उनके खिलाफ सख्त और बड़ी कार्रवाई (Major Punishment) का फैसला किया गया है। PCS और घोटाले के दौरान SDM रहे अजयवीर सिंह के खिलाफ परिनिंदा प्रविष्टि (Adverse Remark) के साथ ही उनके 3 वेतनवृद्धि को रोकने का फैसला हुआ है।

CM Pushkar Singh Dhami-Hero of the War against Corruption
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Varun Chaudhry IAS

Karmendra Singh IAS
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भूमि घोटाले के दौरान 41 साल के वरुण चौधरी हरिद्वार के नगर आयुक्त थे। जांच में उनको मुख्य तौर पर दोषी पाया गया। इसके बाद वरुण को सेवा से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की संस्तुति Department of Personnel and Training (DoPT) से की गई। मुकदमा भी दर्ज होने से अब उनके सामने दोहरा संकट है। उनकी 19 साल की नौकरी बची हुई थी।
State Civil Service से IAS में चुने गए और 2011 Batch वाले कर्मेंद्र की नौकरी तो बच गई लेकिन Major Punishment पाने के बाद अब उनके लिए बची हुई नौकरी में कोई खासा उम्मीद करना मुमकिन नहीं होगा। उनकी अभी 5 साल की सेवा बची है। उनको पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी पाया गया। दोनों AIS अफसरों के खिलाफ DoPT से राज्य सरकार की इच्छा के मुताबिक Action होना तय है।
अजयवीर खैरियत मना सकते हैं कि नौकरी बच गई। बेशक उनका कैरियर भी अब मिट्टी में समा जाना तय है। सरकार ने घोटाले में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। उत्तराखंड में घोटालों पर पूर्व में भी कार्रवाई हुई हैं लेकिन CM पुष्कर कुछ अलग किस्म के और नौकरशाहों तक की रूह फना कर देने वाले Action लेते जा रहे हैं।
वह भ्रष्टाचार और कदाचार के मामलों में कई पूर्व और सेवारत AIS अफसरों-राजनेताओं को जेल भेजने में कतई नहीं हिचके हैं। सरकारी अधिकारी और पुलिस के लोग भी घूसख़ोरी में इतनी तादाद में जेल भेजे गए हैं कि मिसाल नहीं मिलती है। नकल मामलों में बड़े-बड़े चेहरों को उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे भेजा है। हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद मामले में घोटाले की भनक लगते ही CM पुष्कर ने अत्यंत सख्त रुख अपना लिया था।
प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर ही तब के DM कर्मेंद्र और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को मुअत्तल कर दिया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट भी कराया गया। आज से 20 साल पहले भी एक IAS अफसर SK लांबा को पहले Suspend किया गया था। उनको Retire होने के बाद बर्खास्त भी किया था। वह पौड़ी में तब DM थे। पटवारियों की भर्ती में घोटाले के वह दोषी पाए गए थे।
वरुण बर्खास्त होते हैं तो सेवा में रहते इस कार्रवाई का सामना करने वाले वह पहले DR से आए AIS और IAS अफसर होंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार ने ये कार्रवाई मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर की है। मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज करने का फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर के निर्देश और अनुमोदन पर हुआ। जांच में दोषी अफसरों और अन्य के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी।
वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल के नाम अभियोग का सामना करने वालों में शामिल हैं। भूमि विक्रेता एवं अन्य में सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।



