
CHETAN GURUNG
CM पुष्कर सिंह धामी ने आज होटल फेयरफील्ड, देहरादून में आयोजित Conclave में कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में आपदाओं को केवल अनियोजित निर्माण से जोड़कर देखना उचित नहीं है। कई ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में भी बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं, जहां दूर-दूर तक निर्माण कार्य नहीं हुए हैं। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि भी इन घटनाओं के महत्वपूर्ण कारण हैं। इसके मद्देनजर ये कहना उचित होगा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की नहीं, बल्कि पूरे विश्व की है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विकास का ऐसा मॉडल अपनाया है, जिसमें इकोलॉजी और इकोनॉमी को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि पूरक माना गया है। विकास कार्यों के साथ प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। उत्तराखंड में ऐसा विकास सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताएं पूरी हों और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया की सबसे सख्त नौकरी परीक्षाओं में नकल विरोधी कानून के चलते बेटे-बेटियों को बिना सिफ़ारिश और भ्रष्टाचार के बिना सिर्फ अपनी काबिलियत के आधार पर सरकारी नौकरियाँ लगातार मिली हैं। अब तक 35 हजार नौकरियाँ पूरी पारदर्शिता के साथ दी जा चुकी हैं। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून भी आदर्श साबित हुआ है। ‘देवभूमि से विकास संवाद कॉन्क्लेव’ में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण और विकास में मातृशक्ति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं का जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजरता है।
PSD ने कहा कि प्रदेश का 70 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र वनाच्छादित है। यहां हिमालय, ग्लेशियर, वन संपदा और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है। ऐसे में उत्तराखंड का दायित्व केवल अपने पर्यावरण को संरक्षित करना ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व के पर्यावरणीय संतुलन में योगदान देना भी है। प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान अतिवृष्टि, बादल फटने, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रदेश को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष भी धराली सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से भारी नुकसान हुआ है। चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून, हरिद्वार और चंपावत सहित अनेक क्षेत्रों में आपदा की घटनाएं सामने आई हैं।
पुष्कर ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है। राज्य में तीन लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। इन समूहों के उत्पादों की मांग देश-विदेश में बढ़ रही है। हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को एक व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ धाम में 5 नवंबर, 2021 को व्यक्त किए गए ‘21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा’ के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि मातृशक्ति उत्तराखंड को इस दशक में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विकास, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कभी ठहराव नहीं आना चाहिए।
PSD ने कहा कि उनकी सरकार प्रारंभ से ही युवाओं के प्रति समर्पित रही है। छात्र राजनीति और युवा मोर्चा के माध्यम से लंबे समय तक युवाओं के बीच कार्य करने के दौरान उन्होंने उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को नजदीक से समझा है। वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री का दायित्व संभालने के बाद उन्होंने प्रदेश के सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने का संकल्प लिया। उस समय लगभग 24 हजार पदों का बैकलॉग था। सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की। अब तक 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां प्रदान की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार के लिए अपने घर और गांव से दूर न जाना पड़े। इसी दिशा में पर्यटन, स्वरोजगार, होमस्टे, होटल व्यवसाय, टैक्सी संचालन, बागवानी और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने माणा गांव को देश का अंतिम गांव कहने के स्थान पर प्रथम गांव के रूप में पहचान देने का संदेश दिया था।
CM ने आदि कैलाश यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे स्थानीय लोगों को होमस्टे, होटल, परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। राज्य में स्टार्टअप की संख्या पहले लगभग 700 थी। अब ये संख्या बढ़कर लगभग 2,200 हो गई है। होम स्टे की संख्या लगभग 4 हजार से बढ़कर 8 हजार से अधिक हो गई है। राज्य का बजट वर्ष 2021 की तुलना में काफी बढ़ा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और विकास गतिविधियों में तेजी आई है। नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में उत्तराखंड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी उपलब्धियों को प्रमाणित किया है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सम्मान प्राप्त हो रहे हैं। मसूरी, रामनगर, मुक्तेश्वर और अन्य पर्यटन स्थलों के साथ-साथ नए वेडिंग डेस्टिनेशन विकसित किए जा रहे हैं। राज्य में विकास और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता केवल नारों और घोषणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार के कार्यों और परिणामों के आधार पर निर्णय लेती है। लोकतंत्र में जनता पांच वर्षों के कामकाज का मूल्यांकन करती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता जागरूक और विवेकशील है। सरकार के लिए विकास के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, देवभूमि की पवित्रता और मूल पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
PSD ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित, समृद्ध और अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा उत्तराखंड सौंपा जाए। समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में कहा कि यह उनकी पार्टी की विचारधारा के प्रमुख संकल्पों में से एक रहा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण और देश में समान नागरिक संहिता लागू करना पार्टी के महत्वपूर्ण संकल्प रहे हैं। उत्तराखंड को यह गौरव प्राप्त हुआ कि वह स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना। Live in relationship के संबंध में UCC में किए गए प्रावधानों का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निवेश और विकास परियोजनाओं के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब तक लगभग एक लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। लगभग 24 से 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति का जीवन बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे को दृढ़ता से ‘ना’ कहें। विशेषकर विद्यालयों, महाविद्यालयों और छात्रावासों में पढ़ने वाले युवाओं को अपने मित्रों के दबाव में आकर किसी भी प्रकार के नशे की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ केवल सरकार और पुलिस प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति, अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं को भी जागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। सामूहिक प्रयासों से ही उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।



