Big Issue::सख्त नकल कानून बनाम पारदर्शी इम्तिहान का नया दौर:केंद्र सरकार भी चली अब CM पुष्कर की राह:NEET Exams Paper Leak के बाद और कड़क होगा कानून

Chetan Gurung
उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी का 3 साल पहले प्रतियोगी परीक्षाओं को बेदाग और विश्वसनीय बनाने की खातिर लाए गए कठोरतम Anti Copying Law से प्रेरित हो के बाद में कई राज्यों (गुजरात-UP-राजस्थान-हरियाणा-उड़ीसा-आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़) ने इसको अपनाया। फिर केंद्र की मोदी सरकार ने इसे हाथों-हाथ लिया। NEET Paper Leak और Students-Youth आंदोलन के बाद अब PM नरेंद्र मोदी इस कानून को अपने ही भरोसेमंद मुख्यमंत्री PSD के नकल कानून सरीखा सख्त बनाने के लिए संसद में संशोधित कानून बना रहे। वह Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 के सहारे इसको उत्तराखंड के पुष्कर सरकार की तरह और सख्त तथा छिद्र रहित बना रहे हैं। मोदी सरकार के इस फैसले का मकसद NEET Exams में Paper Leak को एकदम रोकना और इसके पीछे के उस्तादों को कठोर दंड दे कर युवाओं का भविष्य बचाना है।
Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill–2026 (तथा इसका मूल अधिनियम 2024) NEET (नीट) की सभी परीक्षाओं को पूरी तरह कवर करता है। इन Exams को National Testing Agency (NTA) आयोजित करता है। हाल में दिल्ली और देश के कई हिस्सों में NEET Paper leak को ले के युवाओं और Students ने भीषण बवाल काटा। इसके बाद ही संशोधन विधेयक लाया जा रहा है। NEET-UG और NEET-PG परीक्षाएं NTA/केंद्र आयोजित करता है। ताजा संशोधन कानून कानून सीधे तौर पर NEET के लिए है।
देखें तो इस संशोधन बिल में तमाम कड़े प्रावधान किए गए हैं। NEET जैसी परीक्षा में पेपर लीक करने, सॉल्वर गैंग चलाने या संगठित धांधली करने पर 5 के बजाए अब 10 वर्ष तक की जेल होगी। ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रस्ताव भी है। Special Fast-Track Courts का राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष रूप गठन होगा। 3 महीने (90 दिन) के भीतर मामले का निपटारा अनिवार्य होगा। STF के गठन का अधिकार केंद्र को देने,Service Providers पर सख्त कार्रवाई करना और जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ा के 5 करोड़ रूपये करने संग 8 साल तक के लिए Blacklist करना भी नए Bill का हिस्सा है। इस सबके बावजूद पुष्कर सरकार का नकल कानून नकल Mafia को थरथराने और खून सुखाने के मामले में देश भर में बेमिसाल है।
February-2023 में लागू उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के निवारण और रोकथाम के उपाय) अधिनियम में गैर-जमानती प्रावधान हैं। इसमें 10 साल से ले के आजीवन कारावास,संगठित नकल माफिया के साथ ही प्रिंटिंग प्रेस, कोचिंग संस्थान या पेपर लीक गिरोह में शामिल व्यक्तियों के लिए ऐसी ही सजा का प्रावधान है। नकल माफिया को 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना भी देना होगा। इतनी बड़ी जुर्माना राशि से नकल माफिया का सहमना लाजिमी है। वे कभी ऐसे मामलों में दबोचे गए तो इतनी बड़ी जुर्माना राशि से उनकी कमर टूट जाना तय है।
जुर्म के जरिए अर्जित अवैध संपत्ति को जब्त (Attachment of Property) करने का अधिकार भी सरकार के पास है। नकल करने वाले परीक्षार्थियों को पकड़े जाने पर 3 साल की सजा और न्यूनतम ₹5 लाख का जुर्माना तय है। पुष्कर नकल कानून में Charge Sheet दाखिल होने के बाद से 2 से 5 साल और दोष सिद्ध होने पर 10 वर्षों के लिए सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिए प्रतिबंधित करने का प्रावधान है।
ये प्रावधान PSD सरकार के नकल कानून के थीम को समझने के लिए काफी है। देश के अलग-अलग राज्यों में भर्ती धांधली की घटनाएं सामने आने के दौर में ये CM पुष्कर की बड़ी उपलब्धि है कि हजारों सरकारी नौकरियाँ अलग-अलग भर्ती आयोगों के जरिये होने के बावजूद नकल कानून लागू होने के बाद एक भी मामला सामने नहीं आया।
साल-2022-2023 में उत्तराखंड में कुछ भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आईं, तो CM पुष्कर ने तुरंत जांच बैठाकर दर्जनों नकल माफियाओं को जेल भेज दिया था। इसके बाद ही मुख्यमंत्री ने नकल समस्या के स्थाई समाधान के लिए देश का सबसे कड़ा कानून बनाने की इच्छाशक्ति दिखाई। केंद्र सरकार और कई अन्य राज्यों ने इसको आदर्श (Model Law) कानून माना। देश में सबसे पहला एंटी-कॉपीइंग एक्ट साल-1992 में उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ले आई थी लेकिन सियासी दबावों के चलते उस कानून को बाद में वापस ले लिया गया था।
PSD सरकार अपने नकल कानून को और आक्रामक अंदाज में लागू कर रही। उसकी देखा-देखी केंद्र-राज्य सरकारें भी आक्रामकता दिखा रहीं। पुष्कर सरकार सिर्फ नकल माफिया पर नकेल नहीं कस रही। सरकारी नौकरियों की भी बहार उत्तराखंड में आई हुई है। तकरीबन 35 हजार सरकारी नौकरियाँ अलग-अलग ओहदों के लिए आयोगों के जरिये युवाओं को दी जा चुकी हैं। उत्तराखंड के लिए भी ये कम गौरवशाली नहीं है कि उसके कानून अन्य राज्यों के साथ केंद्र सरकार भी अपना रही।



