राज्यसभा Elections!दिनेश आर्य पर दांव यानि BJP का दलित Card:हाथ मलते-मन मसोसते रहे दिग्गज:CM पुष्कर की करीबी-आशीर्वाद का दिखा नतीजा

CHETAN GURUNG
दिग्गजों को दरकिनार कर के BJP आला कमान,खास तौर पर PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह ने दिनेश आर्य को संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) भेजने का फैसला कर के एक साथ दो मंशा और संदेश को साफ किया। एक तो ये कि चंद महीनों बाद होने वाले Assembly Elections में SC Voters उनके लिए बेहद और उतने ही अहम हैं,जितने अन्य जाति-वर्ग के मतदाता। दूसरा ये कि उत्तराखंड में वह कोई भी बड़ा और नीतिगत फैसला CM पुष्कर सिंह धामी की इच्छा और रुझान को बेहद सम्मान देते हुए लेता रहेगा। दिनेश तब PSD के PRO रह चुके हैं, जब उन्होंने पहली बार मुख्क्यमंत्री की कुर्सी तीरथ सिंह रावत के बाद संभाली थी।
सियासी नजरिए से मोदी-शाह-BJP Chief नितिन नबीन का दिनेश आर्य के नाम को प्रमुखता दिए जाने को इस लिहाज से अधिक अहम माना जाएगा कि तीनों PSD के करीबियों-विश्वासपात्रों पर PSD की संस्तुति पर आँख मूँद के यकीन करने से नहीं हिचकते हैं। चुनाव के बाद कमल लगातार तीसरी बार खिलता है तो वे सरकार के मुखिया की कमान किसको सौंपेंगे, ये भी उन्होंने दिनेश के टिकट के साथ तय कर दिया।
ये बात छिपी नहीं रह गई है कि तीनों ही सरकार आने पर फिर से CM की कुर्सी पर PSD को ही बिठाने की मंशा सार्वजनिक अलग-अलग तरह से जुदा-जुदा मौकों पर अपने अंदाज में करते रहे हैं। चुनाव पुष्कर की अगुवाई में होंगे, का ऐलान वे उस दौर में जोरदार ढंग से करते रहे, जब ये हवा उड़ाई जाती रहती थी कि सरकार के नए सरपंच आने वाले हैं। इस पर बाद में खुद पुष्कर चुटकियाँ लेने लग गए थे कि उनको कम से कम 55-60 बार हटाया जा चुका है।
अहम पहलू ये है कि दिनेश के पास सिर्फ एक Degree है। वह है उनका मुख्यमंत्री का भरोसा जीतना। वह दूसरी पंक्ति के भी बहुत सुर्खियां बटोरने वाले चेहरों में नहीं शुमार होते हैं। देखा जाए तो उनको जिन नामों पर तरजीह मिली, वह हैरान कर सकती है। डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत (दोनों पूर्व CM), अनिल गोयल,मंत्री मदन कौशिक के साथ अन्य कुछ प्रमुख नामों को राज्यसभा सदस्य के टिकट के दावेदारों में शुमार किया जा रहा था। उनके बजाए कम पहचाने जाने वाले कुमायूं के दलित चेहरे को तवज्जो मिली।
गढ़वाल से पहले ही अनिल बलूनी,महेंद्र भट्ट, डॉ कल्पना,नरेश बंसल राज्यसभा में हैं। नरेश की नवंबर में खाली हो रही सीट पर ही दिनेश को तैयार किया जा रहा है। वह BJP के बहुत बड़े नाम कभी नहीं रहे। जिला स्तर पर संगठन की कमान संभाली है। मोर्चों में अलबत्ता वह राष्ट्रीय स्तर पर ओहदा संभाल चुके हैं। वह कई बार नैनीताल सीट से विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार रहे।
कभी उनके हाथ कामयाबी नहीं लगी। कभी कांग्रेस से BJP आए यशपाल आर्य के पुत्र संजीव आर्य तो कभी कांग्रेस Background वाली सरिता आर्य उन पर भारी पड़ीं। मुख्यमंत्री पुष्कर ने उनके दर्द पर मरहम लगाते हुए राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी थी। RS प्रत्याशी चयन के लिए 15 नामों को High Command के पास भेजा गया था, ऐसा बताया जा रहा।
पुष्कर की छांव मिलने पर दिनेश के हिस्से सुकून के तौर पर राज्यसभा टिकट आया। ऐसा समझा जा सकता है कि उत्तराखंड में दलितों की ख़ासी तादाद और उनके ताकत के मद्देनजर BJP उनको साधने में कोई कसर नहीं छोड़ने वाली है। दिनेश से उसने सोच पर अमल की शुरुआत की है। दिनेश RSS के स्वयं सेवक रहने के साथ ही साल-2021 में CM पुष्कर के पहली बार कुर्सी पर बैठने के दौरान जन संपर्क अधिकारी रह चुके हैं।



