बड़ी खुसर-पुसर!!टिकट बदले जाते हैं तो मिलेगा अधिक फायदा!BJP में मौजूदा MLAs-मंत्री पर मोदी-शाह-पुष्कर के फैसलों पर Assembly Elections नतीजे का दारोमदार!पिछली बार भी PM-HM के नाम,PSD की तूफानी मेहनत ने उबारा था डूब रही BJP को
Internal Survey की रिपोर्ट Positive लेकिन नए चेहरों पर दांव खेलने पर अधिक लाभ!

Chetan Gurung
BJP के भीतर एक सवाल इन दिनों खूब उछल रहा और उसके जवाब तकरीबन एक सरीखे मिल रहे। आम राय बन रही है कि मौजूदा कई MLAs-कुछ मंत्रियों के टिकट काटे जाते हैं और नए-ताजा दम-लोकप्रिय और मेहनती चेहरों पर Assembly Elections में दांव खेला जाता है तो सत्तारूढ़ BJP की बगिया फिर महकेगी-सरकार उसकी गोद में आ बैठेगी। ये ऐसा पहलू है, जो चुनावी नतीजे को ख़ासी हद तक प्रभावित कर सकता है। साल-2022 के विधानसभा चुनाव में PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह के जादू तथा TSR-1 और 2 को दरकिनार कर दरिया में तकरीबन डूब चुकी पार्टी को बचाने के लिए युवा और ऊर्जावान चेहरे पुष्कर सिंह धामी के हाथ चुनावी सेनापति के रथ की रास थमाने के आला कमान के फैसले ने करिश्मा कर दिखाया था। BJP फिर लगातार दूसरी बार सरकार बनाने में कामयाबी पाई थी। PSD ने उत्तराखंड सियासत में कामयाबी की नई और ऐतिहासिक पटकथा लिख के सभी सियासी दिग्गजों को हैरान कर दिया था।

हकीकत ये है कि तब भी अधिकांश मंत्री और विधायकों को ले के अवाम खुश नहीं थी। इसका खामियाजा BJP भरेगी, इसको नकारने वाले खुद पार्टी में नहीं थे। पार्टी में चर्चा अक्सर इस पर होती थी कि सीट 20 आएगी या उससे कम। कभी उप मंत्री तक न रहे पुष्कर ने मोदी-शाह के आखिरी पलों में दिखाए गए भरोसे की कसौटी पर जबर्दस्त ढंग से खरा उतर के दिखाया। जैसा हाल तब विधायकों और मंत्रियों के चलते BJP का हुआ था, वैसा अभी भी काफी हद तक है, ऐसा माना जाता है। पार्टी ने अंदरूनी सर्वेक्षण कराए तो रिपोर्ट यही आई कि सरकार लाने में पुष्कर फिर सफल हो रहे और उनकी अगुवाई में BJP सत्ता संभालने की Hat Trick लगाने वाली है। इसके बावजूद आला कमान सोच में है।
भीतर की पक्की खबर ये भी बता रही है कि सर्वेक्षण जैसे नतीजे हासिल करने के लिए लेकिन असरविहीन-कामकाज से प्रतिष्ठा स्थापित करने में नाकाम रहे और नकारात्मक छवि वाले कुछ MLAs और कुछ मंत्रियों से पार्टी को मोह छोड़ना होगा। उनके टिकट काटने ही होंगे। उनकी पैरवी भले किसी भी स्तर पर हों। ये स्थापित हो चुका है कि 90 फीसदी मौजूदा BJP विधायक सिर्फ मोदी-शाह के नाम पर और पुष्कर की भीषण मेहनत के बूते ही जीतेंगे। उनके कारतूस के खोल के भीतर बारूद खत्म या फिर बहुत कम हैं। आलम ये है कि रेखा आर्य और सुबोध उनियाल के अलावा शायद ही कोई मंत्री ऐसा होगा, जिसको पूरे प्रदेश में भ्रमण करते और सक्रिय देखा जा सकता हो।
रेखा को मुख्यमंत्री पुष्कर के बाद भाषण कला में भी खासा ऊपर माना जाता है। वह अपने महकमों का अध्ययन पूरा कर के बोलने और महकमे में नियंत्रण के लिए जानी जाती हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर के साथ कदमताल करने और उनकी अगुआई में उनकी सोच पर प्रभावी ढंग से अमल में लाने के लिए भी उनको पूरे नंबर दिए जा सकते हैं। उनके पास खेल,खाद्य आपूर्ति और महिला सशक्तिकरण किस्म के अहम महकमे हैं। पुष्कर को देश भर के सबसे मेहनतकश,दूरदर्शी और चुनावी नजरिए से पारस पत्थर की तरह देखा जाता है। उनके UCC-सरकारी नौकरियों की परीक्षा से जुड़े दुनिया के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून को केंद्र और अन्य कई राज्यों की सरकार भी अपना रही हैं।
पुष्कर को मोदी और शाह के ईशारे समझने वाले से अधिक उनके ईशारे होने से पहले ही उनकी मंशा समझ के क्रियान्वयन पर उतारू हो जाने वाले BJP शासित राज्यों के सबसे जुझारू और Smart CM की प्रतिष्ठा हासिल है। राजनीति की अच्छी और पैनी समझ रखने वाले इससे ना-इत्तफ़ाकी नहीं रखते हैं कि लोगों को न BJP न पुष्कर से नाखुशी है। अलबत्ता, कई विधायक अपनी विधानसभा क्षेत्र के लोगों की नजरों और उनकी सोच-इम्तिहान में खरे नहीं उतर सके हैं। उनकी जगह नए चेहरों को चुनावी समर में उतार दिया जाए तो मोदी-शाह-पुष्कर की तिकड़ी के चेहरों पर फिर से मुस्कुराहट आना और कमल को खिलने से लगातार तीसरी बार रोक पाना आपसी भीषण मारकाट-सिर फुटव्वल और आंतरिक दुश्मनी में उलझी Congress और अन्य विपक्षी दलों के लिए ना-मुमकिन की हद तक मुश्किल होगा।
बताया जा रहा है कि BJP और मोदी-शाह शायद अवाम के दिल-दिमाग को पढ़ चुके हैं। वे अवाम की इच्छा के मुताबिक ही कदम उठाते हैं तो अचरज सरीखा कुछ न होगा। सौ बात की एक बात और खरी-खरी ये है कि सरकार आती है तो इसकी कमान फिर PSD के हाथों में सौंपने का निर्णय मोदी-शाह-नितिन नबीन की तिकड़ी पहले ही ले चुकी है। सवाल ये हो सकता है कि क्या वह साल 2029 के लोकसभा चुनाव कराने के बाद केंद्र में और बड़ी ज़िम्मेदारी संभालेंगे या फिर पूरे 5 बरस फिर मुख्यमंत्री रहेंगे।



