Good News::दशकों से लटके किशाऊ Dam Project का रास्ता साफ:HM अमित शाह की मौजूदगी में हो गए करार पर उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों के दस्तखत:CM पुष्कर ने कहा,`भावी पीढ़ियों को इसका फायदा मिलेगा:विकास-पर्यावरण में संतुलन पर ज़ोर देंगे’
1562 MCM क्षमता का जलाशय बनेगा:422 MW विजली उत्पादन क्षमता विकसित होगी

Chetan Gurung
बरसों-बरस से लटके किशाऊ बहुउद्देशीय बांध Project के क्रियान्वयन पर आखिरकार आज अहम फैसला हुआ तथा कदम उठे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सामने उत्तराखंड समेत सभी संबन्धित राज्यों ने करार (MoU) पर दस्तखत कर दिए। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में इस पर अहम बैठक के दौरान उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश,उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने समझौता ज्ञापन पर मंजूरी देते हुए कलम चलाई। लगभग आठ दशकों से लटकी परियोजना जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल तथा यमुना के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं निर्णायक कदम है।




मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके को किशाऊ परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में बढ़ाया गया ऐतिहासिक कदम करार दिया। उन्होंने भारत सरकार सहित सभी सहभागी राज्य सरकारों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इतने लंबे समय में परियोजना को आगे बढ़ाने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई।
PSD ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का खास तौर पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में 16 जून 2026 की बैठक में परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण अड़चनों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।
उन्होंने कहा कि किशाऊ कोई सामान्य बांध परियोजना न हो के जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी राष्ट्रीय महत्व की बहुउद्देशीय परियोजना है। परियोजना से लगभग 1,562 MCM क्षमता का विशाल जलाशय बनेगा। 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होगी। इसका लाभ उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित पूरे अपर यमुना बेसिन को मिलेगा।
CM पुष्कर ने कहा कि किशाऊ परियोजना अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का महत्वपूर्ण उदाहरण है। केंद्र और राज्य सरकारों के सामूहिक प्रयासों तथा सहभागी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय से दशकों से लंबित परियोजना को अब निर्णायक गति मिली है। परियोजना के निर्माण में कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी सामने आएंगी। परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील एवं सम्मानजनक पुनर्वास उत्तराखण्ड सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है। राज्य सरकार इस दिशा में पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी। परियोजना के लिए लगभग 2,500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके कारण क्षतिपूरक वनीकरण के लिए बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता पड़ेगी। उत्तराखण्ड जैसे वनाच्छादित और पर्वतीय राज्य के लिए इतनी बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
PSD ने कहा कि उन्होंने भारत सरकार तथा सभी सहभागी राज्यों से अनुरोध किया कि क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि Identify करने में उत्तराखण्ड को सहयोग प्रदान किया जाए। उत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय एवं वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आज हए MoU से होने वाला लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री CR पाटिल, UP के CM योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की CM रेखा गुप्ता, राजस्थान के CM भजन लाल शर्मा, हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी, HP के CM सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा अन्य का आभार मुख्यमंत्री ने व्यक्त किया।



