
Chetan Gurung
मुख्यमंत्री और फौजी पुत्र पुष्कर सिंह धामी सोमवार को किसान बन गए और अपने निजी आवास नगला तराई में खुद के खेत में हाथों से गोबर खाद डालने के साथ ही टिलर से खेत की जुताई भी की। खास पहलू ये रहा कि इस दौरान उनकी माता बिशना देवी भी खेती पर बातें करती हुईं उनके साथ रहीं।




खेत में किसानी के बाद माँ बिशना देवी के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
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मुख्यमंत्री ने फावड़ा और तसला थाम कर एकदम किसान के अंदाज में कार्य किए। उन्होंने गुलाबी टी शर्ट और सफ़ेद पैंट पहनी हुई थी। उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा है। आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है।
CM पुष्कर ने गोबर की खाद को भूमि की उर्वरता बढ़ाने वाला करार देते हुए उसका अधिक से अधिक इस्तेमाल कर पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाने पर बल दिया। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक एवं प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अनेक योजनाओं के माध्यम से किसानों को हर किस्म की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
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मुख्यमंत्री ने खटीमा में माँ पूर्णागिरि मंदिर में झाड़ू-पोंछा लगा के परिसर को साफ रखने का संदेश दिया। उन्होंने हाथ में लंबी झाड़ू थाम रखी थी। बाल्टी में पानी ले के मग से बरामदा साफ करते रहे। वह एकदम समर्पित-तल्लीन भक्त नजर आए। मंदिर परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधा भी रोपा। खेत और मंदिर में मुख्यमंत्री ने खुद को मौजूदा Status से एकदम इतर आम इंसान वाला अंदाज दिखाया।


