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सियासत!!कील-कांटे सब निकाल लिए-अब Target-60 पर निशाना:CM पुष्कर-BJP का Plan Hattrick:अश्वमेध यज्ञ हो गया-राजसूय की फिर तैयारी! PSD को PM मोदी-HM शाह-President NN से खुली छूट

Chetan Gurung

BJP आला कमान (PM नरेंद्र मोदी-HM अमित शाह और President नितिन नवीन से सज्जित) ने CM पुष्कर सिंह धामी की राह के थोड़े-बहुत बचे हुए कील-कांटे निकालने के साथ ही उनको खुली छूट दे दी है कि वे सरकार की Hattrick के लिए जो चाहे,वह करें। अंदरखाने की माने तो मुख्यमंत्री ने अगले साल होने वाले Assembly Elections में खुद का लक्ष्य 70 में से 60 सीटें जीतने का तय किया है। पिछली बार से ये 13 सीटें अधिक हैं। PSD ने तकरीबन हर चुनाव घर के भीतर और बाहर के अपने कदम रखते हुए जिताने का तगड़ा Record रखा है। एक किस्म से उनका अश्वमेध यज्ञ हो चुका है। अब चुनाव को तीसरी बार फतह करने के बाद राजसूय यज्ञ की मंशा पेश कर रहे हैं।

HM अमित शाह संग CM पुष्कर सिंह धामी


BJP प्रमुख नितिन नवीन भी CM पुष्कर को ले के कई बार अहम चुनावी ऐलान कर चुके

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ये छिपा सत्य नहीं रह गया है कि आला कमान और संघ और सबसे ऊपर मोदी-शाह-नितिन को उत्तराखंड में पुष्कर की कमान को ले के कोई शक नहीं है। इस शीर्ष तिकड़ी को एहसास है कि उनकी मेहनत और छाया के साथ देवभूमि में उनके युवा मुख्यमंत्री और इतिहास लिख चुके पुष्कर ही इंसाफ कर सकते हैं। वही उनकी सोच और योजनाओं के मुताबिक BJP को एक बार फिर चुनावी चुनौतियों को फतह कर पार पहुंचा सकते हैं। तीनों ही बार-बार ये साफ तौर पर कह चुके हैं कि चुनाव पुष्कर की कमान में होंगे। मुख्यमंत्री बनने की काल्पनिक दौड़ और Virtual Race अब खत्म हो चुकी है। Social Media या अन्य किस्म की Media में भी अब इसका जिक्र खत्म हो चुका है।

अंदरखाने कुछ अति महत्वाकांक्षियों के चलते छिटपुट किस्म के कील कांटे उभरते दिख रहे थे। कुछ अति उत्साहियों ने कुछ तेवर दिखाए। उनकी पीठ पर कुछ कथित सरदारों का हाथ दिख रहा था। BJP के खास सूत्रों के मुताबिक आला कमान को ये सब उस मुख्यमंत्री के खिलाफ होते कतई नहीं पसंद आया,जिसके काँधों पर वह अगले चुनाव का दांव खेलने जा रहा। इसके बाद उसने सिर्फ घुड़की दी। इतने में सब खामोश हो गए। सूरते हाल ये है कि वे अब काम करें न करें लेकिन नुकसान करने की दशा या हिम्मत में नहीं हैं। उन पर मोदी-शाह-NN के टीम की पैनी निगाहें हैं। उनके हरकतों की Scanning चल रही।

पिछले चुनाव में जिन नामों पर जरा भी गड़बड़ करने का शक था, उनकी हरकतों पर भी सख्त नजर है। उन लोगों पर ही चुनाव में नतीजों को बेहतर करने की कोशिशों का जिम्मा सौंपा जा रहा है। असंतोष की बयार को BJP में अब पूरी तरह छांट दिया गया है। जो धड़ेबाजी में व्यस्त थे, वे भी अब सारा सियासी माजरा समझ चुके हैं। वे पुष्कर के नेतृत्व को स्वीकार कर पार्टी के लिए काम करने की Guideline के पालन में उतर चुके हैं। अब क्षत्रपों और कुछ कथित अति महत्वाकांक्षियों की कोशिश और ज़ोर इस पर है कि कैसे अपनी सीट बचाई जाए। कैसे खुद का या फिर खुद अगर क्षत्रप हैं तो शिष्यों के टिकट कटने से बचाएं। कैसे अपनी Lobby वालों को टिकट दिलाई जाए।

कुछ मौजूदा मंत्री और विधायक ऐसे भी हैं, जो विधानसभा सीट बदल कर अन्य अधिक मुफीद जगह से लड़ने की इच्छा रखते समझे जा रहे हैं। इन सभी के पास लेकिन अपने इच्छित मार्ग से गुजरने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है। वह रास्ता शहीद मेख गुरुंग मार्ग स्थित CM House से हो के जाता है। ये हकीकत सभी मान चुके हैं कि पुष्कर जिस पर हाथ रखेंगे, उसकी चुनावी वैतरणी टिकट के मामले में सबसे पहले पार होगी। चुनाव जीतने से ज्यादा कठिन वर्तमान में कमल का फूल बतौर Symbol हासिल करना हो गया है। PSD इस कदर पार्टी की शीर्ष तिकड़ी के विश्वासपात्र हो चुके हैं कि वह जिसको चाहे,उसको टिकट दिला सकते हैं और काट भी सकते हैं। आला कमान के पास उन पर यकीन न करने का कोई कारण नहीं है।

CM पुष्कर ने BJP को और अधिक सशक्त करने और पार्टी में सकारात्मक और खुशगवार माहौल रखने के लिए दायित्वों की पूरी कोठरी खोल दी है। इसमें भी उन्होंने खासा Smart और समझदार Move चला। गोरखा कल्याण परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति कर एक बड़े समाज को प्रभावित करने का बड़ा कदम उठाया। लाखों की तादाद में मौजूद गोरखाली समुदाय चुनाव में निर्णायक भूमिका में रहेंगे, ये तय है। दायित्वों के बारे में ये माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश पार्टी प्रमुख महेंद्र भट्ट से मशविरा कर के फैसले लिए। भट्ट को मुख्यमंत्री के बेहद करीबियों में शुमार किया जाता है। दोनों की राय में भिन्नता होने की कोई गुंजाइश नहीं रहती है।

कौन सी पार्टी सरकार में आएगी या किसके हिस्से कितनी सीटें आएंगी, ये कहना मुश्किल है। ये रिपोर्ट जरूर छन के बाहर आई है कि CM पुष्कर ने पार्टी नेतृत्व को आश्वस्त किया है कि इस बार के नतीजे पिछली बार से भी कहीं बेहतर रहेंगे। वह कितनी सीटें BJP को वह दिलाएँगे, इसका खुलासा नहीं किया गया है लेकिन जितना भितरी खबरियों ने बताया,उसके अनुसार ये आंकड़ा 60 के आसपास है। इतना बड़ा लक्ष्य रखने का कारण भी है। पश्चिम बंगाल-असम में BJP की भीषण विजय,TMC के बंगाली MPs-MLAs,AAP के MPs की बगावतों से देश-उत्तराखंड में Brand Modi-Shah-BJP और मजबूत हुआ है। इसके साथ ही उत्तराखंड Congress में खुल के अंदरूनी झगड़े उभरे हैं।

उत्तराखंड BJP में असंतोष के छिटपुट बादल आला कमान की फटकार की आँधी में उड़ चुके हैं। हर किस्म के विवादों को मुख्यमंत्री पुष्कर शुरुआत में ही निबटारा-समाधान करने में कामयाब रहे हैं। हिंदुवादियों को खुश करने से जुड़े धर्मांतरण विरोधी कानून-सरकारी भूमि पर अवैध मजार-मस्जिदों पर पर कार्रवाई,अवैध मदरसों पर सख्ती BJP को फायदा देंगे। युवाओं को खुश करने के लिए सरकारी नौकरियों का पूरा Locker खोल दिया गया, जो तकरीबन कई तालों में एक किस्म से बंद पड़ा हुआ था। 35 हजार के करीब लोगों को सरकारी नौकरी आयोगों के जरिये दिए जाने के कदम को सरकार की बड़ी उपलब्धियों में शुमार होने से कोई नहीं रोक सकता है।

Land Law और नकल विरोधी कानून-Triple तलाक पर रोक से भी BJP को चुनाव में लाभ हो सकता है। भूमि कानून उत्तराखंड के लोगों के लिए राज्य गठन से ही बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा रहा है। पुष्कर ने इसको बेहद सख्त कर दिया है। 8-9 महीने बाद होने वाले चुनाव PSD के लिए निजी तौर पर भी ऐतिहासिक के साथ ही सियासी तौर पर बेहद अहम साबित होंगे। वह चुनाव को कामयाब ढंग से अंजाम देने के साथ ही पार्टी की शीर्ष पांत (तिकड़ी वाली) के लिए बेहद अहम हो जाएंगे। अगली पांत के वह प्रमुख चेहरे हो जाएंगे। राज्य के साथ ही देश में उनको प्रमुख BJP चेहरे के तौर पर तवज्जो मिल जाएगी।

 

 

 

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