
Chetan Gurung
शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने Graphic Era विवि में राय जताई कि Artificial Intelligence की क्षमता का इस्तेमाल जटिल समस्याओं के समाधान और कार्यक्षमता बढ़ाने से अधिक होना चाहिए। इसको प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी बनाया जाना चाहिए।
आज ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में कम्प्यूटेशनल तकनीकों पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में IIITM-ग्वालियर के निदेशक एवं IEEE-UP Sectrion के Immediate Past Chair Dr SN सिंह ने कहा कि तेजी से बढ़ती कम्प्यूटिंग क्षमताओं के साथ सस्टेनेबिलिटी को तकनीकी विकास का अहम हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। कम्प्यूटिंग तकनीकों को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वे बेहतर प्रदर्शन के साथ कम ऊर्जा की खपत करें और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करें।
कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी केवल विचारों और नीतियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना ही उसकी वास्तविक सार्थकता है। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के महानिदेशक डा. मोहम्मद रिहान ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन पर्यावरण को हो रही क्षति का प्रमुख कारण बन रहा है। दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मलेन में विभिन्न विशेषज्ञ व्याख्यानों में मशीन लर्निंग, कम्प्यूटेशनल टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल कम्प्यूटिंग, स्मार्ट ग्रिड, साइबर-फिजिकल सिस्टम, इंटरनेट ऑफ थिंग्स डेटा एनालिटिक्स और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।
सम्मलेन में 9 देशों के प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भाग लिया। सम्मलेन का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने IEEE-UP और ANRF के सहयोग से किया। सम्मलेन में डीन ऑफ कंप्यूटिंग एंड इंटरनेशनल अफेयर्स डा. DR गंगोडकर, NIT-कर्नाटक के प्रोफेसर डा. शशिधर कूलागुडी भी शरीक हुए।



