Economic Corridor का PM मोदी के हाथों आगाज:पुष्कर के सियासी सफर को देगी Express रफ्तार:Hat Trick वाले CM बनाने के लिए झोंकी जा रही पूरी ताकत! नमो पर PSD तिलिस्म!जब अपेक्षा की गई तभी उपस्थित हो गए
The Corner View

Chetan Gurung
TSR-1 और TSR-2 (त्रिवेन्द्र सिंह रावत-तीरथ सिंह रावत) राज में पुष्कर सिंह धामी को राज्यमंत्री का ओहदा भी नहीं मिल पाया था और ऐसा लगने लगा था कि उनके लिए मंत्री बनने की मंजिल अभी कोसों दूर है। इस सोच की वजह थी। त्रिवेन्द्र के बाद तीरथ मुख्यमंत्री बने तो कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव थे। Covid-19 काल चल रहा था। सरकार व्यवस्थाओं को ले के आलोचनाओं के घेरे में थी। फिर उत्तराखंड का इतिहास गवाह था कि सरकार ने फिर 5 साल के लिए नहीं आना है। BJP हताश-निराश थी। किसी के मस्तिष्क में क्या ही आना था कि चुनाव से कुछ महीने पहले तीरथ को भी सलाम-नमस्ते कर दिया जाएगा। ऐसा हुआ। जो लोगों की जेहन में नहीं आ सकता था, वह हुआ। कभी राज्यमंत्री या उप मंत्री भी न बने और सरकार का सिफर अनुभव तथा वरिष्ठता में कहीं निचले पायदान में मौजूद युवा-ऊर्जावान-हिम्मती-हौसला न हारने वाले और तकरीबन आसमान से उतरे किस्म के खटीमा-पिथौरागढ़ के लाल पुष्कर अचानक एक ही BJP सरकार में तीसरे CM बना दिए गए। फिर इतिहास लिखने और रचने का सफर जो शुरू हुआ तो आज तक अविराम-निरंतर कायम है। PM नरेंद्र मोदी कल यानि 14 अप्रैल को New Delhi-Dehradun Economic Corridor के लोकार्पण के लिए देहरादून आ रहे। इसके साथ ही राजनीतिक नजरिए से आँके तो इसका सबसे अधिक फायदा BJP और पुष्कर को मिलेगा। PSD का सियासी सफर इसके बाद बिला शक Super Fast-Express रफ्तार पकड़ेगा। उनके महत्वाकांक्षी सियासी संगी-साथी और दूर छूट जाएंगे।


PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह के सबसे भरोसेमंद बन के उभरे और स्थापित हो चुके हैं CM पुष्कर सिंह धामी
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मोदी का पुष्कर के साथ भावनात्मक किस्म का भी नाता झलकता रहा है। मुख्यमंत्रियों का प्रधानमंत्री से मिलना बड़ी बात नहीं लेकिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के नाते PSD जितनी बार चाहते रहे हैं, सहजता से मिलने का वक्त PMO से पाते रहे हैं। वह जब PM को देवभूमि में चाहते हैं, मुराद पूरी होती रही है। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का अधिकांश हिस्सा या कहें कि लगभग पूरा ही हिस्सा योगी के UP से गुजरता है। उत्तर प्रदेश बड़ा और राजनीतिक नजरिए से अधिक अहम राज्य है। जो समारोह प्रधानमंत्री देहरादून के महेंद्र ग्राउंड (डाकरा-गढ़ी कैंट) में कर रहे, वह आराम से दिल्ली के करीब UP के हिस्से में भी किया जा सकता था। तब Project और समारोह का शायद उतना फायदा न मिल पाता। न ही पुष्कर सरीखी मेहनत और कामयाबी से आयोजन को UP-दिल्ली राज्य सरकार एतिहासिक बना पातीं।

CM पुष्कर सिंह धामी
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मोदी और उनके चाणक्य HM अमित शाह को सिर्फ पुष्कर पर यकीन था और है। देहरादून में समारोह के आयोजन के पीछे ये बड़ी वजह है। समीक्षक इससे भी इतर देख रहे। उनका मानना है कि मोदी-शाह दरअसल अपने Blue Eyed और Tested पुष्कर की बतौर CM अगले विधानसभा चुनाव में फतह के साथ Hat Trick देखना चाहते हैं। इसके लिए दोनों अपनी पूरी ताकत झोंक रहे। हर जतन कर रहे। मोदी-शाह और खुद पुष्कर की कोशिश BJP को उत्तराखंड में लगातार मजबूती दे रही। इसमें कोई शक नहीं कि लगातार दो बार सरकार चलाने के बावजूद BJP या पुष्कर सरकार कभी संकट में नहीं दिखी।
अखबारों-Social Media और News Channels में भले बीच-बीच में नेतृत्व परिवर्तन होने वाला है। अलां या फलां अगले मुख्यमंत्री बनने वाले हैं। बस कभी भी शपथ हो सकती है, किस्म की हवाबाजी होती रहती है। ख्वाहिशें रखने वालों के चेले-चपाटे किस्म के लोग भी दावा करते और फोन-Whats app Message करते रहते थे कि नए मुख्यमंत्री की शपथ के लिए बस ऐलान दिल्ली से होने वाला है। ऐसी सरगोशियाँ वैसे पुष्कर के दूसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने ही शुरू हो गई थीं। जिनको मोदी-शाह ने चुनाव न जीत पाने के बावजूद विश्वास-भरोसे की पालकी पर बैठा के काँटों का ताज पहनाने में पल भी नहीं लगाया था।

Chetan Gurung
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दिलचस्प पहलू ये है कि अपने बदले जाने को ले के खुद PSD भी चुटकी लेते रहते हैं। वह खुद सार्वजनिक स्थानों-Live Video Interviews में जिक्र करते रहते हैं कि कम से कम 55-60 बार उनको बदलने की हवा चलाई जा चुकी है। जो उम्मीदवान लोग मुख्यमंत्री बदलने की बयार बहाने में लगे थे, उनको हालिया मंत्रिमंडल विस्तार और उसमें कुछ मंत्रियों के महकमों में उल्लेखनीय फेरबदल से साँप सूंघा हुआ हुआ नजर आ रहा। सभी को आला कमान से साफ संकेत ही नहीं हिदायत किस्म की सूचना दे दी गई है। अगला चुनाव पुष्कर की अगुवाई में होगा। जाहिर है कि जो फतह की सूरत में रचे जाने वाले इतिहास के रचयिता के अलावा सरकार का मुखिया कोई हो भी नहीं सकता है। BJP के चुनावी समर में बाजी मारने की सूरत में किसी और के लिए सत्ता के शीर्ष का फाटक बंद ही रहेगा।
पुष्कर को ले के मोदी-शाह के लगाव और अत्यधिक यकीन पर विश्लेषकों की सोच एक जैसी है। ऐसा समझा जाता है कि BJP के पास मोदी-शाह के बाद Leaders की पांत और उस पांत में शामिल होने लायक भरोसेमंद चेहरों की भारी किल्लत है। पुष्कर उम्मीदों के किरण माफिक हैं। चुनावों में उनकी सफलताओं संग उनका अविवादित रहना,कुशल नेतृत्व-रणनीतिक चातुर्य प्रदर्शित करते रहना,Visionary होना,विपक्ष का भी भरोसा जीतना और उसके नेताओं संग अच्छे रिश्ते आला कमान के सियासी स्केल पर खरा उतारते हैं। बतौर CM पुष्कर ने नकल कानून-Land Laws-धर्मांतरण कानून-UCC और तमाम सख्त कदम उठाए। उन पर केंद्र और अन्य राज्यों की सरकारें भी फिदा हैं। वे उन क़ानूनों को खुद भी लागू कर रहे। भ्रष्टाचार पर देश भर में सबसे अधिक Action उत्तराखंड में ही हो रहे। मछली से ले के मगरमच्छ तक पर फंदा डाला जा रहा है।
उत्तराखंड ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी इस किस्म के नेताओं का BJP में टोटा है। PM-HM के विश्वास की कसौटी पर PSD शुरू से ही शीर्ष पर हैं। ये हकीकत है कि मोदी-शाह की जनसभाओं में अगर सबसे ज्यादा लोग और भीड़ नजर आया करती है तो वह उत्तराखंड है। दोनों को यहाँ अवाम से दो-चार होने में लुत्फ आता नजर आया है। Expressway का औपचारिक उद्घाटन कर के प्रधानमंत्री कल उत्तराखंड की आर्थिक समृद्धि का द्वार खोलेंगे लेकिन BJP की अंदरूनी सियासत का गुप्त द्वार भी बंद कर देने का खामोश इशारा कर जाएंगे। पुष्कर के लिए मोदी का ये वाला दौरा अबकी बेहद खास इसी लिए होगा।



