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जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करें-CS आनंदबर्द्धन:दून विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन-AI पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

Chetan Gurung

देहरादून: हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण लगातार उत्पन्न हो रही चुनौतियों, आपदाओं और सतत विकास के मुद्दों पर मंथन के लिए दून विश्वविद्यालय में “बदलती जलवायु में हिमालय: आपदाएं, सतत विकास एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका” विषय पर आयोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करने के दौरान मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में आपदाओं के प्रभावी आकलन, जोखिमों को कम करने और संभावित खतरों का समय रहते पूर्वानुमान लगाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।

उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते समय सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि तकनीकी समाधान पूरी तरह से स्थानीय आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल हों। इसके साथ ही सतत विकास की योजनाओं में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी अनिवार्य है। देश-विदेश से पहुंचे प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

दक्षिण कैरोलिना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं IAIRO के CEO प्रो. अमित शेठ ने AI की उभरती तकनीक ‘स्मॉल एआई’ की संभावनाओं पर कहा कि कम संसाधनों में सुलभ और प्रभावी तकनीकी समाधान विकसित करके भारत की विशिष्ट विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है। हिमालयी क्षेत्र में बार-बार आने वाली आपदाओं की चुनौतियों से निपटने में यह तकनीक बेहद मददगार साबित हो सकती है।

अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के संयुक्त सचिव डॉ. निशांत वर्मा ने देश में अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में एएनआरएफ के योगदान की जानकारी दी। मेजबान विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने संस्थान की शैक्षणिक और शोध संबंधी उपलब्धियों से अवगत कराते हुए कहा कि शिक्षकों और शोधार्थियों के प्रयासों से विश्वविद्यालय में अनुसंधान के माहौल को निरंतर सशक्त किया जा रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की सहित देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधार्थी और दून विश्वविद्यालय के शिक्षक भाग ले रहे हैं। इस दौरान जलवायु परिवर्तन के खतरों, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और निर्णय प्रक्रिया में AI के प्रयोग पर विस्तृत चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। कार्यक्रम का संचालन भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. विपिन कुमार के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

 

 

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