Current Affairs::Glamour के झोंक में शायद ऋषभ पंत भूल गए कि पुष्कर सिंह धामी CM हैं-Broker नहीं:अपने X Post को दुबारा पढ़ें:उत्तराखंड के लिए एक Match नहीं खेले-न कभी दैवीय संकट में मदद को सामने आए:घर के लिए सरकारी दर पर जमीन क्यों दी जाए?
फिर लक्ष्य सेन-वंदना कटारिया-स्नेह राणा ने क्या गुनाह किया?महान एथलीट जसपाल राणा ने 4 Asian Games Gold-9 Commonwealth Gold जीते थे-उनको तो 1 इंच जमीन सरकार से नहीं मिली

Chetan Gurung
Cricketer ऋषभ पंत आधी रात को शायद नींद के झोंक में भूल गए कि वह X Post में जिन पुष्कर सिंह धामी को जमीन दिला दो कह के उत्तराखंड को कोस रहे, वह ज़मीनों के धंधे से जुड़े Broker नहीं बेहद उच्च संवैधानिक ओहदे को संभाल रहे CM हैं। ये उनकी खुशकिस्मती और खेलों को बढ़ावा देने तथा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए मशहूर PSD की भलमनसाहत है जो उन्होंने ऋषभ की खेल जगत में योगदान का जिक्र कर जाहिर किया कि उनको इस विकेट कीपर बल्लेबाज की Post से नाराजगी नहीं है। उन्होंने इस पर X पर ही Post भी लिखी। ये बात दीगर है कि Midnight Post पर ऋषभ को गरियाने वालों की लंबी फौज सामने आ चुकी है।



ऋषभ की Post की अँग्रेजी पर तो खूब चटखारे लिए जा रहे लेकिन उनकी अस्पष्ट भाषा से ये साफ नहीं हो रहा कि वह घर बनाने के लिए जमीन चाह रहे हैं या किसी Commercial मकसद से। उनको अगर घर के लिए ही जमीन चाहिए तो ये कहीं से भी कोई छोटा मुद्दा तक नहीं है। वह उत्तराखंड डोमिसाइल वाले हैं। पिथौरागढ़ से हैं। रूड़की में पहले से उनका घर है। फिर वह ये क्यों लिख रहे कि उनको पहाड़ी लोगों के बीच अपने उत्तराखंड में लौट के वापिस आना है। यहीं घर बना के रहना चाहते हैं। ऋषभ के मुताबिक 3 साल से वह उत्तराखंड में जमीन तलाश रहे हैं। एक से एक बड़े Projects उत्तराखंड में आ रहे। बड़े से बड़े बंगले यहाँ रोज ही बन कर तैयार हो रहे। सिर्फ ऋषभ को क्यों और कैसी दिक्कत जमीन खरीदने में आ रही?

दिवंगत जसपाल राणा से बड़ा खिलाड़ी उत्तराखंड तो दूर देश और एशिया में भी नहीं हुआ है:उनको भी जमीन कभी नहीं मिली
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Post पढ़ के ऐसा भी लगता है कि भारतीय One Day और T-20 Cricket से लगातार बाहर चल रहे इस Wicket Keeper Batter की पहली प्राथमिकता शायद जमीन मुफ्त में सरकार से पाने की है। ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि उन्होंने Post में लिखा है कि वह सरकारी Rate पर जमीन खरीदने के लिए भी तैयार हैं। जमीन तो खरीदनी ही पड़ेगी। मुफ्त में कैसे मिल सकती है? सरकारी दर पर भी जमीन घर बनाने के लिए क्यों दी जानी चाहिए? ऋषभ ने कभी उत्तराखंड के लिए कोई योगदान दिया हो, ऐसी नजीर कहीं नहीं है। उत्तराखंड में जब भी दैवीय आपदा आई, वह मदद के लिए कभी नजर नहीं आए। उत्तराखंड के लिए कभी नहीं खेले। वह राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ये भी एक अहम पहलू है कि RP के पास पहले से ही उत्तराखंड में घर है। उनकी माँ और परिवार के अन्य लोग यहीं रहते हैं। फिर वह ऐसा कैसे कह रहे कि वह अपने पहाड़ी लोगों के मध्य लौटना चाहते हैं। अगर उनकी प्राथमिकता मुफ्त जमीन सिर्फ देश का प्रतिनिधित्व करने के नाते चाहिए तो याद रखना होगा कि उनसे पहले फिर इस पर दावा दिवंगत जसपाल राणा का बनता था। ऋषभ उपलब्धियों के मामले में जसपाल के आसपास भी नहीं। जसपाल ने अकेले अपनी Pistol के बूते Asian Games में 4 Gold-2 Silver-2 Bronze और Commonwealth Games में 9 Gold-4 Silver-2 Bronze Medal जीतने का अद्भुत कारनामा कर दिखाया था। उनसे अधिक Gold अंतर्राष्ट्रीय और मान्यता प्राप्त प्रतियोगिताओं में किसी भी भारतीय तो दूर एशियाई ने भी नहीं जीता है। हैदराबाद National Games-2002 में अकेले ही 6 Gold Medal जसपाल ने जीते थे। वह सही माने में महान एथलीट थे।
उनसे तब की आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी तरफ से खेलने की पेशकश की थी। जो एक Gold पर 5 लाख रूपये दे रही थी। जसपाल नए-नवेले उत्तराखंड के लिए ही खेले। एक फूटी कौड़ी उनको हालांकि राज्य सरकार से नहीं मिली। व्यक्तिगत उपलब्धियों की बात करें तो लक्ष्य सेन (Badminton के top खिलाड़ी)-वंदना कटारिया (ओलिम्पिक के एक मैच में 3 गोल करने वाली)-स्नेह राणा (50-50 Overs Cricket की World Cup Champion India Team की सदस्य) की उपलब्धि भी बहुत बड़ी हैं। जसपाल को कभी इकन्नी तक सरकार से नहीं दी गई। जमीन तो बड़ी बात है। उनको भारत सरकार ने अर्जुन अवार्ड-पद्मश्री-द्रोणाचार्य अवार्ड (Paris Olympic में उनकी Trainee शूटर मनु भाकर ने 2 Medal जीते थे) से नवाजा था। लक्ष्य-वंदना और स्नेह को भी जमीन नहीं दी गई। ऋषभ को अगर सरकारी दर पर भी जमीन दी जाती है तो बाकी खिलाड़ियों को नजर अंदाज कैसे कर सकते हैं? फिर देश के लिए युद्ध भूमि में शहादत देने वाले जाँबाज सैनिकों के परिवार को क्यों सस्ती जमीन नहीं दी जानी चाहिए?
ऋषभ की Post की भाषा आपत्तिजनक न भी हो तो शोभनीय भी नहीं कही जा सकती है। फिर उन्होंने जमीन अधिग्रहण कराने की बात कही है। भूमि अधिग्रहण किसी सरकारी और अच्छे कार्यों के लिए किया जाता है। किसी आम या खास शख्स को घर या व्यावसायिक मकसद से इस्तेमाल के लिए नहीं। ये बताना समीचीन होगा कि सरकारी दर की जमीन व्यावसायिक या अन्य श्रेणी की जमीन की दर के मुक़ाबले बेहद कम होती है। मुख्यमंत्री पुष्कर ने हालांकि ये नहीं जताया कि उनको ऋषभ की Post से किसी किस्म की नाखुशी हुई। वह खेलों और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए और हर मुसीबतजदा की मदद के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने ऋषभ की तारीफ की और कहा कि उनको खुशी है कि देश के लिए नाम रोशन करने वाले Cricketer अपनी माटी की ओर फिर लौटना चाहते हैं। उनकी जमीन खरीद की इच्छा पूरी की जाएगी। अफसरों को इस दिशा में काम करने के लिए कहा गया है।



