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CM पुष्कर की दिशा में तेजी से दौड़ रहे BJP MPs-मंत्रियों-दिग्गजों के पग:बिहार के बांकीपुर Election से PSD की अहमियत में इजाफा!

केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टमटा-BJP प्रदेश प्रमुख महेंद्र भट्ट-MP माला राज्यलक्ष्मी-अजय भट्ट-निशंक की PSD से गुलदस्ता मुलाक़ात

Chetan Gurung

बिहार की बांकीपुर Assembly Bye-Election का नतीजा उम्मीदों के खिलाफ आने के बाद से उत्तराखंड के BJP दिग्गजों और यहाँ के MLAs समेत केंद्र और राज्य के मंत्रियों के कदम अचानक ही कारगिल शहीद मेख गुरुंग मार्ग पर CM Camp आवास की तरफ तेज हो उठे हैं। पार्टी के मँझोले और बड़े कद के नेता भी मुख्यमंत्री से मिलने के लिए वक्त और मौके को हासिल करने की कोशिशों में दिख रहे। आज भी BJP के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा MP महेंद्र भट्ट-केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टमटा के साथ ही MP माला राज्यलक्ष्मी-अजय भट्ट-कल्पना सैनी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा पूर्व CM डॉ रमेश पोखरियाल निशंक शाम तक मिल चुके थे। मंत्री खजानदास पहले मिल चुके हैं।

केन्द्रीय राज्यमंत्री अजय टमटा-पूर्व CM डॉ रमेश पोखरियाल निशंक-MP माला राज्यलक्ष्मी-डॉ कल्पना सैनी-MP और BJP State Chief महेंद्र भट्ट (ऊपर से नीचे की तरफ) ने आज CM पुष्कर सिंह धामी से मुलाक़ात की

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बांकीपुर सीट का नतीजा सामने आने के बाद माना जा रहा है की BJP के भीतर मुख्यमंत्री पुष्कर की अहमियत और प्रतिष्ठा में खासा इजाफा हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के खाली की गई सीट राज्य में अपनी सम्राट सरकार होने के बावजूद गंवा बैठने को BJP के लिए बहुत बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। इस नतीजे ने PSD को ले के ये साफ कर दिया कि उत्तराखंड में पार्टी को मिली कामयाबियों में PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर की अपनी सियासी रणनीतियों और मेहनत-चातुर्य-कौशल-चुनावी प्रबंधन प्रतिभा का भी बहुत हाथ है।

Minister Khajan Das  and BJP city President Siddharth Agarwal with CH Pushkar Singh Dhami

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राजनीति के चतुर और मंझे-सुलझे लोगों की सोच है कि पुष्कर के पास विपक्षी दलों की हर चाल की काट है। ऊपर से उनके तरकश में कई अमोघ अस्त्र तथा गड्डी में तुरुप के पत्ते हैं। मोदी International Brand हैं और शाह बहुत बड़े रणनीतिकार हैं। इसके बावजूद ये भी उतना ही सच है कि दोनों की सोच को क्रियान्वित करना और उसको आकार देने में PSD से बड़ा शाहकार संगठन में देश भर में शायद ही हो। वह विपक्ष को खुश या फिर उसकी नस दबा के ईलाज करते हुए हवा को अपने हक में करने का गुर बाखूबी जानते हैं। बांकीपुर में सम्राट नाकाम न होते शायद अगर वह कुछ पल पुष्कर की सोहबत में गुजारते या फिर उनसे गुर सीख लेते।

PSD की अगुवाई में मोदी-शाह की छाया में BJP ने एक के बाद एक कई चुनावी मोर्चों को फतह किया है। PM-HM के नैनसुख के तौर पर स्थापित पुष्कर को नितिन नबीन के भी Good Books में शुरू से ही समझा जाता है। तीनों ही साफ बोल चुके हैं कि फिर सरकार आएगी और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर चेहरा नया नहीं होगा। विधानसभा चुनाव के लिए 6 महीने से कुछ ही ज्यादा रह गए हैं। अधिकांश विधायकों और कुछ मंत्रियों की हवा खिसकी हुई है। ऐसा पार्टी के भीतर के सूत्र बताते हैं। पार्टी-संघ-राज्य सरकार और केंद्र सरकार-केन्द्रीय नेतृत्व के स्तर पर तमाम और कई सर्वेक्षण होते रहेंगे। शुरुआती सर्वे में अनेक सुस्त-सिर्फ मोदी-शाह-पुष्कर के नाम की खा रहे विधायकों और कुछ मंत्रियों को ले के रिपोर्ट ना-माकूल आई बताया जा रहा।

बाद की रिपोर्ट भी ऐसी ही आती है तो टिकटों के बँटवारे में कई मौजूदा विधायकों संग मंत्रियों की भी छुट्टी मुमकिन है। उनको सिर्फ एक ही कद्दावर शख्स संजीवनी बूटी दे सकता है। वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं। आला कमान उनको पहले से ही बहुत ऊंचा आँकता है। मौजूदा सियासी माहौल में इसमें और वृद्धि हुई है। सभी समीकरणों को देखते हुए मंत्रियों-विधायकों के साथ ही सांसदों में भी मुख्यमंत्री पुष्कर से मिलने का सिलसिला बहुत तेज हो गया है। आधिकारिक तौर पर आज भी जिस किसी से PSD ने गुलदस्ते वाली भेंट की, ये कहा गया कि विकास योजनाओं को ले के मंत्रणा हुई। असलियत में जो होता है,उसका सिर्फ अंदाज लगाया जा सकता है।

समझा जा रहा है कि सिर्फ पुष्कर की सिफ़ारिश को ही मोदी-शाह के यहाँ अधिकांश मामलों में तवज्जो मिलती रही है। वही विधायकों-मंत्रियों की सियासी जिंदगी बना और खत्म कर सकते हैं। सांसदों को भी इसका एहसास है। वे भी केंद्र में मंत्रालयों के धक्के खाने से बेहतर सीधे मुख्यमंत्री से गुजारिश कर अपने कामों को पूरा कराने में यकीन रखते दिखते हैं। BJP में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की भी चर्चा है। निशंक भी नए पार्टी प्रदेश प्रमुख बनने की इच्छा रखते हैं। CM पुष्कर की हरी झंडी किसी भी मामले में और किसी के लिए भी बहुत अहमियत रखती है। उनकी नजरें इनायत हासिल करने की तमन्ना रखने वालों में वे चेहरे भी हैं, जो टिकट हासिल कर विधानसभा चुनाव के समर में तलवार भांजना चाह रहे हैं।

उनको लगता है कि पुष्कर के रहते उनके लिए मुक़ाबला फतह करना मौजूदा सियासी दौर में भी बहुत मुश्किल शायद ही हो। मोदी-शाह की रणनीतियों पर अमल में पुष्कर से बेहतर शख्स संगठन में देश भर में नहीं माना जाता है। ये बात दीगर है कि PSD से मुलाक़ात का वक्त CMO से पाने के लिए अधिकांश को बहुत पापड़ बेलने पड़ रहे। मुख्यमंत्री लगातार दौरों या फिर सरकारी कामकाज में बेहद व्यस्त रहते हैं। उनका चंद मिनट का वक्त हासिल करना भी अमृतपान से कम नहीं समझा जाता है।

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