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National FDP in Graphic Era:Metal Weathering पर Experts में मंथन

Chetan Gurung

तमाम स्थापित और दिग्गज Graphic Era Deemed University में Metal Weathering पर आज से शुरू 7 दिनी National Faculty Development Program में मंथन करने जुट गए। ‘वे Metal Weathering के उन्नत विश्लेषण’ पर विचार पेश करेंगे।


पहले दिन धातु अपक्षय की जटिलताओं, उसकी उन्नत विश्लेषण तकनीकों और व्यावहारिक समाधानों पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने धातु को मानव सभ्यता का अभिन्न अंग करार देते हुए कहा कि औद्योगिक उपकरणों की मजबूती से लेकर परिवहन साधनों की विश्वसनीयता और मेडिकल इंप्लांट की जीवनदायिनी भूमिका तक इसका अस्तित्व हर क्षेत्र में रचा बसा है। उन्होंने कहा कि धातु अपक्षय तकनीकी चुनौती संग मानव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा वैश्विक मुद्दा है।

उन्होंने उन्नत तकनीकों और रियल टाइम मॉनिटरिंग को अनिवार्य बताते हुए कहा कि धातु की अप्रत्याशित प्रकृति, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और खाद्य उद्योग से जुड़ी जटिलताएं आज इस क्षेत्र की गंभीर चुनौतियां हैं ।
FDP के दौरान विषय से जुड़े Online और Offline सत्र आयोजित किए जाएंगे। विवि का मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स इसको आयोजित कर रहा है। कार्यक्रम का संचालन डा. गोपाल जी शर्मा और डा. मानवेंद्र कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के HoD डा. कपिल कुमार शर्मा, डिपार्टमेंट ऑफ फिजिक्स के HoD डा. फतेह सिंह गिल, डा. देशबंधु सिंह, डा. किरण शर्मा मौजूद रहे।
–समुद्री शैवाल भविष्य की ऊर्जा

सेंट्रल साल्ट एंड मरीन केमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के साइंटिस्ट डा. सौरीश भट्टाचार्य ने कहा कि समुद्री माइक्रो शैवाल अपशिष्ट कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग में मददगार है होने के साथ ही भविष्य की सतत ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत भी बन सकता है।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विज्ञान विभाग में ‘सस्टेनेबल बायोफ्यूल  फ्रॉम मरीन माइक्रो एल्गी’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान देते हुए उन्होंने माइक्रोएल्गी की आउटडोर मास कल्टीवेशन तकनीक, कार्बन उत्सर्जन के प्रबंधन और विकसित माइक्रोएल्गल बायोडीजल उत्पादन पद्धति पर विस्तार से चर्चा की।

डा. सौरीश ने शैवाल की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर आउटडोर मास कल्टीवेशन से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जा सकेगा। कार्यक्रम में पर्यावरण विज्ञान विभाग की HoD डा. प्रतिभा नैथानी के साथ व्याख्यान में डा. प्रदीप कुमार शर्मा, डा. अर्चना बछेती, डा. सुमन नैथानी मौजूद रहे।

–अरुकांश और निधि Debate में अव्वल–
ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में त्रिभाषा विषयक वाद- विवाद प्रतियोगिता में BA (Political) के अरुकांश दास और दून यूनिवर्सिटी की निधि जोशी ने पहला स्थान, BA (LLB) की सौम्या सिंह ने दूसरा और B-Tech (CS) के प्रियांशु बिष्ट ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। आरंभ के नाम से इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
पैनल चर्चा का विषय ‘त्रिभाषा सूत्रः अकादमिक समृद्धि व भाषाई विविधता में सहायक’ था। विशिष्ट पैनलिस्ट पूर्व Director (LBSNAA) डा. संजीव चोपड़ा, ONGC के पूर्व CEO शशि रंजन, ग्राफिक एरा की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार शिक्षक डा.मालथी S और मुख्य प्रॉक्टर डा.AS शुक्ला रहे।
कार्यक्रम में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा. प्रतिभा लामा, मैनेजमेंट स्टडीज के विभागाध्यक्ष डा. राजेश तिवारी, डिबेटिंग सोसायटी की संयोजक डा. भारती शर्मा, डा. शाहबाज बेगम, डा. मनस्वी सेमवाल मौजूद रहे।

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