
Chetan Gurung
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास एवं शहरी विकास विभाग के सचिव डॉ R राजेश कुमार ने रेलवे Freeze Zone (ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना)में लागू 400 मीटर प्रतिबंध की समीक्षा शुरू करने के साथ ही इससे मुताल्लिक DMs और महकमे के अफसरों को पूरी रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए। ये परियोजना आखिरी चरण की दिशा में है। सुरक्षा कारणों से कुछ प्रतिबंध निर्माण से संबन्धित मामलों में लगाए गए थे। CM पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि इस रेल परियोजना से स्थानीय लोगों को पर्यटन,विकास,रोजगार-स्वरोजगार के मामले में फायदा मिले’।

CM पुष्कर सिंह धामी-रेलवे Freeze Zone की समीक्षा कर वाजिब कार्यवाही करने की हिदायत
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सचिव डॉ. R राजेश ने कहा कि DMs की रिपोर्ट के जरिये ये मालूम करने की कोशिश की जाएगी कि किन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। वहां विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है या नहीं। इस परियोजना के चलते संबन्धित क्षेत्रों में कई वर्षों से पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण स्थानीय लोग प्रभावित हो रहे हैं।

Dr R राजेश कुमार (सचिव-शहरी विकास और आवास)
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर जैसे क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें। इन प्रतिबंधों ने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव भी सामने आने लगे। कई स्थानों पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं ठहराव का शिकार हो गईं।
रेलवे ट्रैक का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान व्यवस्था अब विकास गतिविधियों में बाधा बन रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवास विभाग ने जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन शुरू किया है। यदि तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिबंधों में आंशिक शिथिलता दी जाती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है।
डॉ RRK ने कहा कि इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल संपर्क शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। फ्रीज जोन समीक्षा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। सरकार की कोशिश जनहित और सुरक्षा के बीच संतुलन रखने की है। किसी भी प्रकार की राहत रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी।
जिलों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कराई जा रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जहां विकास गतिविधियों को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही रेलवे से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सरकार की मंशा केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी संतुलित व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे रेलवे परियोजना के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रहें और स्थानीय नागरिकों को भी विकास का लाभ मिल सके।
सचिव (शहरी विकास और आवास) ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की विकास यात्रा का गेम चेंजर माना जाता है। रेल संपर्क से चार धाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इसके आसपास विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी प्रदेश की तस्वीर बदल सकती हैं।



