Big News::तकदीर बदलने वाला फैसला लागू:मदरसा Board अलविदा::नए जमाने की तालीम हासिल करेंगे अब अल्पसंख्यक बच्चे भी:Quality Education-Skill Development से जुड़ सकेंगे:बोले CM पुष्कर,`श्रेष्ठ उत्तराखंड के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण भी ताकत देगा’
6 Notified अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को शिक्षा में बराबर का हक

Chetan Gurung
उत्तराखंड में मदरसा Board आज अलविदा हो ग आया और 6 Notified अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चे भी अन्य बच्चों की तरह नए जमाने की पढ़ाई कर सकेंगे। वे भी Quality Education और Skill Development से जुड़ी तालीम हासिल कर सकेंगे। CM पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक बच्चे अब तक आधुनिक जरूरतों के हिसाब से चलने वाली पढ़ाई में पिछड़ने के कारण जमाने के साथ कदमताल नहीं कर पा रहे थे। अब वे भी श्रेष्ठ शिक्षा हासिल कर के खुद के,परिवार के और देश-समाज के विकास में अहम भूमिका निभा सकेंगे।







मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की आधिकारिक शुरुआत भी आज की। उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र और अल्पसंख्यक विद्यालयों के बच्चों को NCERT की किताबें भी भेंट की। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में भी वह आदर्श मॉडल के तौर पर स्थापित हो।
उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। आज से यह आस्तित्व में आ गया है। मदरसा बोर्ड खत्म हो के इतिहास हो गया है। ये फैसला राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा।
PSD ने कहा कि मौजूदा दौर ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। AI, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे ये सरकार की मंशा है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है। उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत जरिया साबित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
इस अवसर पर मंत्री गणेश जोशी, प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।



