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मौजूं मुद्दा::सच ये है कि दलेर मेहँदी ने 35 लाख-अपनी मशहूरी के साथ इंसाफ नहीं किया:मंत्री सुबोध की खुली फटकार पर बहस कर सकते हैं लेकिन Lip Singing दर्शकों के साथ धोखा से कम नहीं:इंदर आर्य-श्वेता माहरा के दर्द को भी सुनना होगा

Chetan Gurung

मशहूर Singer दलेर मेहँदी को उनकी अनियंत्रित तथा संदिग्ध भाव-भंगिमाओं के चलते मंच पर उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल का बुरी तरह फटकार लगा डालने ने इन दिनों उत्तराखंड तथा देश की सांस्कृतिक-सामाजिक और मनोरंजन की दुनिया में भूचाल पैदा कर दिया है। लोग दीगर-दीगर किस्म की दलीलें पक्ष और विपक्ष में दे रहे। सौ बात की सीधी सी बात है कि अगर दलेर मेहँदी ने पूरा मेहनताना वसूला है तो फिर आयोजकों को भी दी गई फीस की पाई-पाई वसूलने का हक है। जो अच्छे और श्रेष्ठ प्रस्तुति के जरिये ही हो सकता था। अगर ऐसा नहीं होता है और ये साफ दिखे कि उनके साथ जान-बूझ के धोखा किया जा रहा है या फिर लोगों की भावनाओं की इज्जत नहीं की जा रही तो फिर ऐसा नजारा दिखना कोई अजूबा नहीं जो नरेंद्र नगर के कुंजापुरी मेले में दिखाई दिया।

एक और प्रख्यात गायक मीका सिंह (बाएँ)अपने भाई दलेर मेहँदी के बचाव में उतर आए हैं

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हुआ यूं कि गाने से पहले और उसके दौरान बोल तक न पाने के साथ ही सूरत-जुबान से एकदम लस्त-पस्त नजर आ रहे नामी हिन्दी-पंजाबी Singer दलेर को सरकार के शक्तिशाली मंत्री सुबोध उनियाल ने पहले सोफ़े से नीचे से फिर मंच पर जा के ऐसी फटकार लगाई, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। दलेर को दुनिया भर के लोग जानते हैं। उनके प्रशंसक दुनिया के कोने-कोने में हैं। कुंजापुरी घटना के बाद लोग कह रहे हैं कि कलाकारों का सम्मान होना चाहिए। उनको इस तरह बे-इज्जत नहीं किया जाना चाहिए। उससे बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या कलाकार को प्रस्तुति के दौरान इस हाल में आ के लोगों को निराश और नाराज करना चाहिए?सिर्फ Lip Sing कर के लोगों की भावनाओं से खेलना चाहिए!

मंत्री सुबोध का इतने बड़े और नामचीन गायक पर इस अंदाज में बिफरना और बिगड़ना जायज था या नहीं,इस पर बहस कराई जा सकती है लेकिन दो बातें साफ दिखीं, जिस पर कोई भी एक और मशहूर गायक मीका सिंह के बड़े भाई बोलो तारारा,तुनक-तुनक Singer का साथ नहीं देगा। एक तो 35 लाख रूपये की भारी-भरकम फीस वसूल करने के बावजूद Stage पर Lip Singing और कोरस का अधिक सहारा लिया जाना और दूसरा, मंच पर ढंग से खड़े और बोल तक न हो पाना। ये साफ नहीं है कि दलेर ने दारू पी थी या नहीं या फिर कोई नशीला पदार्थ लिया था या नहीं, लेकिन प्रथम दृष्ट्या वह खुद पर नियंत्रण रख पाने में नाकाम नजर आ रहे थे। इसको सभी ने देखा। महसूस किया।

सुबोध इसलिए भी बिफरे कि वह नरेंद्र नगर से विधायक हैं और कुंजापुरी मेला धार्मिक आयोजन भी है। कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव भी हैं। दलेर की ऐसी हरकत उनको चुनाव के दौरान परेशानी में डाल सकती है। विपक्षी दल इस घटना को भी हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है। सुबोध ने शुरुआत के कुछ पल इंतजार किया और संयम दिखाया। उनका पारा तब चढ़ा जब Lip Singing अधिक होते देखा। लोग लोकप्रिय गायक को गाते सुनने आए थे लेकिन बक़ौल मंत्री सुबोध वह गाने की Acting भर कर रहे थे। Background से कोरस गाना चल रहा था। बाकी Track पर गाने चल रहे थे। जिसका Show था वह तो महज ओंठ नचा-घुमा भर रहे थे। मंत्री के साथ ही दर्शकों ने भी इसको महसूस कर लिया था।

सुबोध ने ऐतराज किया था कि लोग दलेर को Live गाते सुनने आए हैं। न कि उनकी टीम को सुनने। सिर्फ गाने की Acting करने के लिए 35 लाख रूपये नहीं दिए गए हैं। दलेर झूलते-झूमते नजर आ रहे थे। वह जवाब भी नहीं दे पा रहे थे। सुबोध ने मंच पर पहुँच के साफ आरोप लगाया कि इतने बड़े गायक शराब पी के आए हैं। बोल तक नहीं पा रहे हैं। गाना क्या गाएँगे। उन्होंने गुस्से में एक अन्य गायक का जिक्र भी किया कि वह भी ऐसी ही वजहों से ऐसे पिट के गए कि अब कभी वह यहाँ नहीं आ सकते हैं। मंत्री के तेवरों और दर्शकों से उनको मिल रहे समर्थन को देख के दलेर और उनकी टीम के सदस्य एक किस्म से खामोश ही रहे। स्थानीय विधायक और मंत्री होने के साथ ही कलाकार की दशा और बेहद हल्की प्रस्तुति को देख के अधिकांश की राय सुबोध के हक में हैं।

मीका जरूर अपने भाई के समर्थन में उतरने के साथ ही परोक्ष धमकी भी दे गए। ये दावा भी किया कि आज तक किसी ने भी दलेर के हाथ में दारू का गिलास नहीं देखा होगा। ये बात दीगर है कि नशा सिर्फ दारू में होता है, ऐसा नहीं। ये सभी जानते हैं। नशे के और भी तरीके हैं। भले ये नहीं कहा जा सकता है कि दलेर ने वास्तव में नशा किया ही था। ये जरूर है कि उनकी शारीरिक भाव-भंगिमा उसी किस्म की थी, जैसे नशे में कोई व्यक्ति हो तो नजर आता है। मीका ने ये भी तर्क देने की कोशिश की कि कई बार कलाकार किसी दबाव या फिर मना न कर पाने के चलते तबीयत खराब होने के बावजूद Show करने के लिए राजी हो जाते हैं। उनकी दलील इस तरफ इशारा कर रही कि दलेर ने दारू नहीं पी या नशा नहीं किया था। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। फिर भी उन्होंने Stage Show किया।

दलेर ने भी Video जारी कर कहा कि उनकी प्रस्तुति से किसी को निराशा हुई तो वह खेद जताते हैं। उन्होंने मंत्री के दारू पी के Stage पर आने के आरोप पर कुछ नहीं कहा। उत्तराखंड के लोकप्रिय Singers इंदर आर्य और श्वेता माहरा सरीखी उत्तराखंड के गायकों ने इस घटना को अपने अंदाज में उठाया। दोनों ने कहा कि उत्तराखंड में प्रतिभावान और हर किस्म के,भाषाओं में गाने वालों की कमी नहीं है। उनको फीस देने में सरकार के पास पैसे नहीं होते हैं लेकिन बाहरी गायकों को मुंह मांगी फीस दी जा रही। इन दोनों ने जायज बात कही है। फिर Vocals for Locals का नारा भी सरकार का ही है। दोनों की प्रतिभा में कोई कमी नहीं है। मंत्री सुबोध ने अलबत्ता, ये संदेश जरूर अच्छे से दे दिया कि उत्तराखंड को कोई भी बड़ा कलाकार मामूली या हल्के अंदाज में आइंदा नहीं ले सकता है। उनको उनकी फीस पूरी मिलेगी लेकिन काम भी पूरा लिया जाएगा। नाम चाहे कितना ही बड़ा हो।

याद रहें कि ये वही कलाकार हैं जो देहरादून में ही हर साल के एक एक निजी आयोजन `विरासत’ में सरकार की दी जाने वाली फीस की आधी से भी कम लेते हैं और कोई नखरे भी नहीं करते हैं। सरकार लोगों के लिए सब मुफ्त में करती है। विरासत के आयोजक जम के Fund इकट्ठा करते हैं। सुबोध जब दलेर को तकरीबन डांट रहे थे, तो ये भी कहने से नहीं चूके कि वह पहले काफी नखरे दिखा रहे थे। प्रस्तुति नशे में करने आ गए।

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