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मुद्दा मौजूं::युवा हौसला, कड़े फैसले!पुष्कर के खाते में आएंगे बतौर CM 2 नए Record:NDT के 5 साल कार्यकाल का रेकॉर्ड टूट जाएगा:मोदी-शाह को उनके भरोसे का दुगुना-तिगुना Return

The Corner View

Chetan Gurung

उत्तराखंड में कोई भी Party पुष्कर सिंह धामी के CM बनने से पहले कभी भी विधानसभा चुनाव जीत के अपनी सरकार बरकरार नहीं रख पाई थी लेकिन ये कारनामा या चमत्कार जो भी कहें, PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह के साए तले PSD ने साल-2022 में बाखूबी कर दिखा के सभी को चौंका दिया था। कोई भी BJP CM राज्य में 4 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया था। ये भी उन्होंने कर दिखाया। अब तक वह 4 साल 3 महीने का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। अगली बारी एक साथ 2 Record तोड़ने की है या फिर बनाने की है। 5 दिन बाद ये टूटना शुरू हो जाना तय है। वह 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले उत्तराखंड के पहले BJP मुख्यमंत्री 4 जुलाई को हो जाएंगे। फिर वह उत्तराखंड के सबसे अधिक कार्यकाल वाले CM भी बन जाएंगे। Congress के ND तिवारी (अब मरहूम) ने 2 मार्च 2002 को CM की गद्दी संभाली थी और 7 मार्च 2007 तक रहे थे।

PM Narendra Singh Modi (Left) and CM Pushkar Singh Dhami (Right)


HM Amit Shah (Right) and CM Pushkar Singh Dhami (Left)

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पुष्कर पहली बार मुख्यमंत्री 4 जुलाई 2021 को बेहद अप्रत्याशित रूप से बने थे। मोदी-शाह ने पहले त्रिवेन्द्र सिंह रावत फिर कुछ महीने बाद ही तीरथ सिंह रावत सरीखे बेहद अनुभवियों को मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतार के और पार्टी में मौजूद तमाम अनुभवियों पर तरजीह देते हुए कभी दायित्वधारी तक नहीं रहे PSD पर कमाल का दांव खेला था। आज तक इस चाल पर उनको दुगुना-तिगुना Return मिल रहा है। कंटीले ताज को सिर पर रखने और कभी ना-मुमकिन रही चुनौतियों को ध्वस्त करते हुए पुष्कर विधानसभा चुनाव (2027) में भी BJP की अगुवाई करने वाले हैं। उनका कार्यकाल युवा और विकासशील के साथ कठोर प्रशासन (संक्षेप में धामी Model) के तौर पर स्थापित हो चुका है। उनको चुनावों में प्रचार करने पर BJP को विजय मिलने के नाते `पारस पुष्कर’ और उनकी अति सक्रियता के चलते `Phantom CM’ भी कहा जाता है।

Chetan Gurung

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पुष्कर की काबिलियत और उनमें दिखने वाली संभावनाओं को मुखर तौर पर लोगों (सियासत और नौकरशाही से जुड़े) के सामने जाहिर करने में मैं कभी नहीं हिचका। जब वह पहली बार साल-2012 में खटीमा से विधायक बने तो मैं ये कहने से कभी नहीं चूका कि वह एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे। जब उनको तीरथ सरकार में भी जगह नहीं मिली तब भी मैं ये मानता रहा कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उस दिन भी बोला जिस दिन तीरथ सरकार राजभवन में शपथ ले रही थी और पुष्कर के बजाए उनके चेलों तक को मंत्रिपरिषद में जगह मिल गई थी। मैं जिनके सामने बोलता था,वे गवाह हैं। ये जरूर है कि वह सिर्फ 4 महीने बाद ही सरकार के शीर्ष पर बिठा दिए जाएंगे, इतना अंदाज मुझको नहीं था।

उनके मुख्यमंत्री बनने का किस्सा भी खास है। यह जुलाई 2021 की एक उमस भरी सुबह थी। देहरादून के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज थी। मुख्यमंत्री के तौर पर दोनों TSR (त्रिवेन्द्र और तीरथ) पर मोदी-शाह नाकाम का ठप्पा लगा चुके थे। उनको नए-ऊर्जावान-तेज-चतुर-अवाम की नब्ज पकड़ने और उसके मुताबिक काम करने वाला चेहरा चाहिए था। तीरथ शरीफ किस्म के थे लेकिन सरकार पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे थे। Covid काल के कारण सरकार पहले ही चुनौतियों से जूझ रही थी। फिर आया उनका फटी जींस वाला बयान। आला कमान ने उनको हटाने का फैसला ले लिया।

मोदी-शाह की सोच के मुताबिक नई खोज के तौर पर पुष्कर सामने आए। तब तक उत्तराखंड अपनी स्थापना के बाद से ही एक अजीब राजनीतिक अभिशाप से जूझ रहा था। कोई भी मुख्यमंत्री (काँग्रेस राज में नारायण दत्त तिवारी को छोड़कर) अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पा रहा था। इसी माहौल में खटीमा से आने वाले एक कड़क, ऊर्जावान और अपेक्षाकृत युवा चेहरे को राज्य की कमान सौपने पर BJP नेतृत्व में किसी किस्म की असहमति नहीं उभरी। नाम था—पुष्कर सिंह धामी। जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो आलोचकों ने इसे ‘कम समय का चुनावी इंतजाम’ माना।

साल-2022 के विधानसभा चुनाव सिर पर थे, और PSD सरीखी अनुभव से खाली झोली वाले मुख्यमंत्री के पास खुद को साबित करने के लिए एक साल से भी कम का समय था। उनके सामने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था को पटरी पर लाना था, बल्कि अवाम के बीच बिखरे भरोसे को भी समेटना था। वह इसमें इस कदर डूब के काम करने लगे कि जल्द ही ये एहसास होने लगा कि BJP सत्ता में वापसी कर सकती है। ऐसा हुआ तो फिर वही युवा PSD सरकार की कमान संभालेगा।

बस यहीं उनके खिलाफ विरोधियों और कुछ नौकरशाहों ने दुरभिसंधि करना शुरू कर उनको खटीमा के चक्रव्यूह में घेरना शुरू कर दिया।  मकसद एक ही था। CM बनने से पुष्कर को रोक्न। इस साजिश की पूरी और अंदरूनी खबर मोदी-शाह और आला कमान तक थी। पुष्कर के साथ ही वे जानते थे कि सरकार आ रही लेकिन खटीमा हाथ से जाएगा। इसकी किसी ने परवाह नहीं की। पहले ही तय हो चुका था। सरकार आते ही फिर पुष्कर मुख्यमंत्री होंगे। चुनावी अग्निपरीक्षा में पुष्कर Distinctions के साथ पास हुए। नया इतिहास बनाया। बेशक वह आशंकाओं के मुताबिक खटीमा सीट से चुनाव हार गए, लेकिन उनके नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड में “एक बार भाजपा, एक बार कांग्रेस” के दो दशक पुराने मिथक को तोड़ डाला। पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। जो तय था। 23 मार्च 2022 को उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। फिर चंपावत Assembly By-Election 3 June-2022 को फतह कर नए रिकॉर्ड की स्थापना की। 31 मई को voting हुई थी। इसी नतीजे के बाद शुरू हुआ धामी मॉडल का असली सफर। एक के बाद एक लिए गए उनके फैसलों की धमक देश और बाहर भी सुनी जाने लगी। उनका कड़ा प्रशासनिक रुख उनकी पहचान बन चुकी है। Direct IAS वरुण चौधरी को हरिद्वार भूमि घोटाले में बर्खास्त करने सरीखा फैसला उत्तराखंड के इतिहास में कभी नहीं हुआ। DM रहे IAS और अन्य कई अफसरों पर भी कड़े फैसले लिए गए। पुष्कर सरकार की कहानी केवल सत्ता में बने रहने की नहीं, बल्कि ऐसे फैसले लेने की है जिससे उत्तराखंड की राजनीतिक दिशा हमेशा के लिए बदल गई। कुछ बानगी॥

  • नकल माफिया पर Surgical Strike: उत्तराखंड के युवा सालों से पेपर लीक और भर्ती घोटालों से त्रस्त थे। PSD ने कड़ा रुख अपनाते हुए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। जेल की सजा और करोड़ों के जुर्माने के इस प्रावधान ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी। युवाओं को संदेश मिला—”मेहनत का फल अब बिकेगा नहीं।”आज जब NEET Papers लीक की बात हो रही, तब उत्तराखंड में नकल और पेपर लीक सपना भर बन गया है। जो अभूतपूर्व उपलब्धि है।
  • समान नागरिक संहिता (UCC): जहां बड़े-बड़े राज्य झिझकते रहे, वहीं पुष्कर ने देवभूमि में UCC विधेयक पारित कराकर देश में खलबली मचा डाली। यह फैसला उनके प्रशासनिक सोच और साहस का सबसे बड़ा प्रतीक बना। अन्य राज्यों को भी इससे प्रेरणा मिली।
  • अतिक्रमण और कड़े कानून: सरकारी जमीनों और जंगलों में अवैध रूप से बने धार्मिक ढांचों और अतिक्रमण पर जब ‘धामी का बुलडोज़र’ चला, तो उसने यह साफ कर दिया कि देवभूमि की जनसांख्यिकी (Demography) और संस्कृति से समझौता नहीं होगा। इसके साथ ही जबरन धर्मांतरण विरोधी कड़ा कानून भी अस्तित्व में आया।
  1. पहाड़ का पानी और जवानी:विकास का नया Roadmap

इस 5 साल की कहानी का एक अहम पहलू है—पहाड़ के दर्द को समझना। पुष्कर सरकार ने महसूस किया कि जब तक पहाड़ों में रोजगार और बुनियादी ढांचा नहीं होगा, तब तक पलायन नहीं रुकेगा।

  • Connectivity की क्रांति: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का काम तेजी से आगे बढ़ा। ‘All Weather Road’ ने 4 धाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाया। केंद्र की मदद से सीमांत गांवों के लिए ‘Vibrant Village’ योजना लागू की गई। चीन सीमा से सटे गांवों में रौनक वापस लौटने लगी।
  • Global Investors Summit:इस Summit के जरिए राज्य में लाखों करोड़ के निवेश के समझौते हुए। पुष्कर सरकार की मंशा साफ थी—उद्योग सिर्फ मैदानों तक सीमित न रहें, बल्कि पहाड़ों में भी रोजगार के साधन बनें।
  • आर्थिकी और महिला शक्ति: उत्तराखंड की रीढ़ मानी जाने वाली महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित किया गया। ‘होमस्टे योजना’ ने महिलाओं और युवाओं को अपने ही घर में रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया।
  1. सिल्क्याराइम्तिहान भी पास

नवंबर-2023 में उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में 41 मजदूर फंस गए थे। उनकी जिंदगी पूरी तरह खतरे में थी। पूरा देश सांसें थामे बैठा था। मुख्यमंत्री पुष्कर ने खुद वहां पहुँच के डेरा डाल दिया। तब तक डटे रहे जब तक कि आखिरी मजदूर सुरक्षित बाहर नहीं आ गया। International Rescue Team और रैट-माइनर्स का हौसला बढ़ाया। उस Episode ने PSD की आपदा प्रबंधन कला को जगजाहिर किया और उन्हें बेहद संवेदनशील तथा जमीन से जुड़े नेता के तौर पर स्थापित कर दिया।

गुजरे 5 वर्षों में बतौर मुख्यमंत्री पुष्कर ने खुद को सिर्फ ‘विकल्प’ नहीं, बल्कि ‘संकल्प’ के नेता के तौर पर स्थापित किया है या फिर ढाला है। सियासी विश्लेषकों के साथ ही पूर्व नौकरशाह मानते हैं कि अस्थिर राजनीति के दाग को धोते हुए, कड़े फैसलों और युवा सोच के साथ उन्होंने उत्तराखंड को ‘Non-Performing State’ की छवि से निकालकर एक ‘Progressive State’ (विकासशील राज्य) की कतार में ला खड़ा किया है। कम शब्दों में कहें तो उनके 5 साल की कहानी एक ऐसे युवा राजनेता की है जिसने देवभूमि के पारंपरिक राजनीतिक ढर्रे को बदलकर रख दिया।

PSD की खासियत और भी है। वह पार्टी में मौजूद आंतरिक विरोधी हों या फिर Congress के विरोधी, के साथ निजी तौर पर अच्छे रिश्ते रखना पसंद करते हैं। सियासी हमले अलग बात है। हर तबके की नाड़ी की गति और Mood को समझते हैं। युवाओं पर असर बनाने में कायाब रहे। सरकारी नौकरियाँ अमूमन सपना ही होती है, लेकिन आयोगों के जरिये PSD सरकार साढ़े चार साल में ही 34 हजार के करीब नौकरियाँ युवाओं को दे चुकी है। खेलों पर वह खूब Focus रखते हैं। ये PM मोदी का कभी खास और पसंदीदा विषय है। जिस 38th National Games को आयोजित कर पाना पिछली सरकारों और मुख्यमंत्रियों के लिए ना-मुमकिन सा था, उसको पुष्कर ने महज 4 महीने में आयोजित कर पूरे देश और शीर्ष खिलाड़ियों तथा खेल प्रबंधन से जुड़े नामचीन चेहरों को हैरान कर दिया था।

देश का ये सबसे बड़ा खेल आयोजन खानापूर्ति वाला नहीं बल्कि बेहद भव्य और ऐतिहासिक किस्म का रहा। कोई भी राज्य इस अंदाज में NG आयोजित नहीं कर पाया था। 3 साल पहले गुजरात में हुए NG में भी ऐसा नजारा नहीं था। PSD खुद एक-एक फैसले ले रहे थे और हर अहम गतिविधि पर उनकी पैनी-पारखी नजर थी। खेल मंत्री रेखा आर्य और उत्तरांचल ओलिम्पिक संघ ने उनके हर कदम पर उनके हर निर्देश और इच्छा पर कंधे से कंधा मिला के साथ देते हुए काम किए। उनके ही कार्यकाल में उनके प्रोत्साहन पर खेलों के बड़े आयोजन उत्तराखंड में हुए। International Fencing Championship और National Table Tennis Championships पहली बार राज्य में हुए।

इसमें शक नहीं कि पुष्कर के पास अभी कई और Record बनाने के अवसर हैं। 5 साल वाले CM का Record को तोड़ने के बाद उनके पास सबसे अधिक समय तक लगातार CM रहने का Record रहना तय है। वह अगले विधानसभा चुनाव में फिर BJP को विजयश्री दिलाते हैं तो पार्टी को सरकार की Hattrick दिलाने वाले मुख्यमंत्री का तमगा भी धारण कर सकेंगे। ये ना-मुमकिन कम से कम आज की तारीख में नहीं लगता है। पार्टी के भीतर उन्होंने बड़ी सफाई और कुशलता तथा परिपक्वता के साथ असंतुष्ट और नाखुश नजर आने वालों को मना सा लिया है। वह नाराज होने का संदेश देने वाले गदरपुर से पार्टी के ही MLA अरविंद पांडे के घर उनके परिवार से मिल आए। उसके बाद सब ठीक लग रहा।

BJP के ही और क्षत्रपों त्रिवेन्द्र सिंह रावत,अनिल बलूनी और अजय भट्ट से भी रिश्ते बेहतर हुए हैं। नौकरशाहों को उनके दौर में सबसे अधिक सुकून मिला है। खास तौर पर अच्छी छवि वाले अधिकांश IAS-IPS को। उनको DMs-SSPs की कुर्सी मिली ही नहीं बल्कि लंबा समय भी काबिलियत दिखाने के लिए दिया गया है। पहले 6 महीने से पहले DM-SSP हटा दिए जाते थे। शासन में भी सचिव से ले के प्रमुख सचिव और IPS में DGP-IGP-SSPs को पर्याप्त वक्त तथा मौके दिए जा रहे। अब कोई नौकरशाह ये शिकायत नहीं कर सकता कि उनको काम करने और काबिलियत दिखाने के पूरे मौके नहीं मिले।

मुख्यमंत्री के तौर पर Record Holder होने जा रहे पुष्कर से उनकी अति व्यस्तता के चलते अब बहुत कम मुलाकातें हो पाती हैं लेकिन आपसी रिश्तों की गर्माहट और सम्मान में कोई कमी नहीं आने देना बहुत बड़ा सम्मान मेरे लिए भी है। किसी भी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे शख्स से आखिर आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं। हमारा रिश्ता तकरीबन पौन 3 दशक का है, और ये हर पल अधिक मजबूत ही हुआ है। ये सिर्फ सियासी-व्यावहारिक और नफा-नुक्सान वाला नहीं रहा। न ही राजनीतिज्ञ-पत्रकार वाला। ये खास और कुछ अलग है। मुख्यमंत्री के तौर पर CM पुष्कर को नए Record की अग्रिम शुभकामनाएँ..

 

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