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Big Story::पारस `पुष्कर’ ही The Best!!Assembly Election फतह किया तो फिर CM!सरकार की Hattrick का जिम्मा संभालेंगे:BJP Chief नितिन नबीन ने किया खुलासा:अति महत्वाकांक्षियों में खलबली-लगा झटका!

Chetan Gurung

पंचायत से ले के Parliament Elections तक तकरीबन हर Seat पर BJP के लिए पारस पत्थर साबित होते रहे CM पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में Assembly Elections लड़े जाएंगे। BJP Chief नितिन नबीन ने एक News Channel में साफ किया कि उनका शासन बेहतरीन ढंग से चल रहा है। वही CM चेहरा भी होंगे। ये साफ इशारा है कि सरकार की Hattrick लगने पर वह मुख्यमंत्री बनेंगे।

BJP Chief Nitin Nabin ने खुल के बोल दिया कि सरकार आने पर The Best `पारस’ पुष्कर सिंह धामी CM की Hattrick बनाएँगे

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BJP की अंदरूनी जानकारी ऊपरी स्तर पर रखने वालों के पास ये जानकारी हालांकि नई नहीं है। उनको काफी पहले से मालूम है कि PSD को ही चुनाव लड़ाने का जिम्मा सौंपा जाना है। सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के लिए भी आदेश PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह से सज्जित High Command से मिलना तय है। कहा जाता है कि पारस पत्थर से जिसको छू लिया जाए वह सोना बन जाता है।

इसको सियासत से जोड़ के देखें तो ये अहम और चमत्कारिक संयोग है कि जिन भी राज्यों और लोकसभा-विधानसभा चुनावों में पुष्कर ने प्रचार किया, उनमें से अधिकांश सीटों पर कमल का फूल जरूर खिला है। उत्तराखंड में जब उन्होंने अप्रत्याशित तौर पर CM की कमान संभाली थी तो BJP विधानसभा चुनावों (साल-2022) में सफाए की दशा में थी। सरकार चलाने में सिफर अनुभव और राज्य BJP के कई दिलजले दिग्गजों से कोई सहारा मिलने के बजाए साज़िशों और काँटों की कुर्सी सजाए जाने के बावजूद ये PSD थे जिन्होंने न सिर्फ BJP को फिर सत्ता दिलाई बल्कि लगातार दो बार सरकार में किसी दल के आने का करिश्मा भी कर दिखाया था।

इसके बाद ही मोदी-शाह समेत पूरा आला कमान के वह लाडले बने। उनके `अमोघ अस्त्र; या `ब्रह्मास्त्र’ के तौर पर उनके तरकश में सज गए। दिल्ली में शीर्ष स्तर पर ये जानकारी हालांकि कोई आश्चर्यजनक नहीं है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी की कमान PSD ही संभालेंगे। नितिन नबीन ने बस इसका साफ-साफ खुलासा किया है। PM मोदी हो या फिर HM शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जब भी उत्तराखंड आए, प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर पुष्कर की Branding बतौर अगले मुख्यमंत्री भी करने से नहीं चूके। BJP प्रमुख ने जो कहा, उसमें मोदी-शाह की मंजूरी का होना लाजिमी है। दोनों की इच्छा और मंजूरी के बिना BJP में पत्ता नहीं हिलता है, ये किसी से छिपा नहीं है।

नितिन ने अब और अच्छी तरह ये संदेश उत्तराखंड BJP को दिया है कि वे पुष्कर के पीछे लामबंद हो जाएँ। फालतू और नाहक किस्म के ख्वाबों को देखना बंद करें। BJP को जितवाने में जुटें। नेतृत्व परिवर्तन का शोर-शराबा मचाने वालों को भी समझ में आ गया होगा कि अब ऐसा होने का न वक्त रह गया है न ही कोई आसार बच गए हैं। ज्यादा चूँ-चपड़ पर उल्टे चुनावों में उनको खुद के टिकट कटने या फिर अपने चेलों के टिकट कटने के खतरे से गुजरना पड़ सकता है। BJP के सभी क्षत्रप हालात समझ चुके हैं। वे अब मुख्यमंत्री के साथ समीकरण स्थापित कर सबसे पहले चुनावों में खुद और चेलों के लिए टिकट का ज़ोर लगाना चाहेंगे।

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान के बाद कुछ बेहद महत्वाकांक्षी या फिर विवादों से घिरे मंत्रियों के होश फाख्ता बताए जा रहे। उनको दो किस्म का डर सता रहा। उनको अंदेशा हो रहा कि कहीं उनका टिकट न काट दिया जाए। खास तौर पर उनके प्रदर्शन-छवि और मुख्यमंत्री के साथ उनके तालमेल के आधार पर। उनको ये भी आशंका खा रही होगी कि माना जीत गए और सरकार भी आ गई तो फिर पुष्कर आज के मुक़ाबले कहीं ज्यादा ताकतवर हो के उभरेंगे। फिर वह मंत्रिमंडल गठन में उनको झटका दे सकते हैं। उनको एक झटका और लग सकता है। वह भी चुनाव से पहले।

कुछ मंत्री और विधायक अपनी मौजूदा विधानसभा क्षेत्र में हालात को पहले सरीखा मुफीद और माकूल महसूस नहीं कर रहे हैं। वे सीट बदलने की फिराक में बताए जा रहे। अंदरखाने की खबर है कि सीट बदलने के मामले में आला कमान राजी नहीं है। उसको लगता है इससे नकारात्मक संदेश जाएगा। अलबत्ता,CM पुष्कर चाहें और उनकी सिफ़ारिश रही तो सीट बादल के दूसरी जगह से लड़ने की उनकी मंशा पूरी हो सकती है। 5 साल अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए चुपके-चुपके-चोरी-चोरी PSD को हिलाने की नाकाम कोशिश करने वालों को इसमें शायद ही राहत मिले।

 

 

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