उत्तराखंडदेशयूथशिक्षा

आधुनिकता संग सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजना जरूरी-प्रो BKS:Graphic Era में लोक जनजातीय कला प्रदर्शनी आयोजित

Chetan Gurung

एम्स (गुवाहाटी) के अध्यक्ष एवं पद्मश्री प्रो. BKS संजय ने कहा कि आधुनिकता का अर्थ अपनी परंपराओं को भूल जाना नहीं है। आज तकनीक और डिजिटल दुनिया तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रही है. मौजूदा दौर में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत को संरक्षित रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी है।

आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पर आधारित लोक-जनजातीय कला प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि कला केवल चित्रों और कलाकृतियों तक सीमित नहीं है. यह हमारी जड़ों, परंपराओं, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ने का माध्यम है।

चमनलाल महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ सुशील कुमार उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य के भीतर चल रहे द्वंद्व, तनाव और भावनाओं को अभिव्यक्ति देने का सशक्त माध्यम है। कला और साहित्य मनुष्य को संवेदनशील बनाते हैं और उसके भीतर संतुलन पैदा करते हैं।

इस चार दिवसीय लोक एवं जनजातीय कला प्रदर्शनी में कला के विभिन्न आयामों और पारंपरिक शैलियों को समझने के लिए कला कार्यशाला, कला प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ विजुअल आर्ट्स और प्रयागराज के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम में डीन ऑफ एकेडमिक्स डॉ प्रमोद नायर, विजुअल आर्ट्स डिपार्टमेंट के हेड डॉ आनन्द कर्माकर, विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button