
Chetan Gurung
देहरादून: पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु की अध्यक्षता में बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक में राजाजी नेशनल पार्क और प्रसिद्ध फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के प्रस्तावित ईको सेंसिटिव जोन (Eco-Sensitive Zone) के संबंध में व्यापक विचार-विमर्श के बाद तय हुआ कि पारिस्थिकी संतुलन और जन भावनाओं का खास ख्याल इस बाबत रखा जाए।

बैठक में दोनों राष्ट्रीय उद्यानों के प्रस्तावित ईको सेंसिटिव जोन के क्षेत्रफल और विस्तार, जोनल मास्टर प्लान, निगरानी समिति के गठन तथा जोन के अंतर्गत आने वाली प्रतिबंधित, विनियमित और अनुमत गतिविधियों पर चर्चा की गई। प्रमुख सचिव RKS ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों का तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं से गहन परीक्षण किया जाए।
उन्होंने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त कर अंतिम प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया। राजाजी नेशनल पार्क के संबंध में निर्देश दिए गए कि इससे जुड़ी स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आगामी कैबिनेट बैठक में मार्गदर्शन प्राप्त किया जाए।
सुधांशु ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में विधिक परामर्श लेते हुए राज्य की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में एक सप्ताह के भीतर प्रतिउत्तर (Counter) तैयार कर भेजने के निर्देश भी दिए। फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क के ईको सेंसिटिव जोन की समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव ने क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही और उसकी वहन क्षमता (Carrying Capacity) का विशेष ध्यान रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि ईको सेंसिटिव जोन के प्रस्ताव तैयार करते समय पारिस्थितिकी संरक्षण और स्थानीय जनभावनाओं के बीच सामंजस्य का ध्यान खास तौर पर रखा जाए। पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। स्थानीय लोगों के हित भी सुरक्षित रहें। बैठक में सचिव (वन) C रविशंकर, PCCF (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल, CCF साकेत, निदेशक (नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व) पंकज कुमार, DFO (केदारनाथ) रजत सुमन और अपर सचिव अभिषेक रुहेला उपस्थित रहे।



