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Big Story::`पुष्कर’ अब BJP के सबसे ज्यादा अवधि वाले CM:हर कठिन मोर्चे को किया फतह:चाणक्य बुद्धि के उस्ताद

The Corner View

Chetan Gurung

साल-2012 का दिन था। आज के CM पुष्कर सिंह धामी पहली बार विधायक बने थे। वह किसी काम से एक प्रमुख सचिव से सचिवालय में उनके दफ्तर में पहुंचे थे। सरकार में Congress थी। जाहिर है कि भगवे वालों के कामकाज को तवज्जो नहीं मिलनी थी। साथ आए एक दोस्त ने उस खुर्राण्ट किस्म के नौकरशाह को, जिनकी तब खुल के चल रही थी, से कहा,`ये भावी CM हैं’। इस पंक्ति का असर तो न जाने उस आला अफसर पर कितना पड़ा, नहीं मालूम, लेकिन ये हकीकत है कि उन्होंने वाकई फिर पहली बार के BJP MLA को Congress सरकार के बावजूद भरपूर मदद की। वह खुद तो अब Retire हो चुके हैं लेकिन वाकई पुष्कर तकरीबन 10 साल के वक्फ़े में ही युवावस्था पार पाने से पहले मुख्यमंत्री बन गए। उन्होंने लगभग मानसिक रूप से हार चुकी लस्त-पस्त पार्टी को फिर खड़ा किया। अपनी कुर्सी खटीमा विधानसभा को पत्नी अबोध`गीता’ के भरोसे छोड़ दिया, जिनको राजनीति का ककहरा तक नहीं मालूम था। तमाम अंदरूनी साज़िशों के बावजूद उन्होंने PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह के साए में रात-दिन की मेहनत के बूते कमाल कर दिखाया। अपनी अगुवाई में लगातार दूसरी बार उत्तराखंड में BJP सरकार ले आए। ये कमाल Congress के लिए ND तिवारी भी साल-2007 के विधानसभा चुनाव में नहीं कर पाए थे। पुष्कर आज मोदी-शाह के सबसे भरोसेमंद सेनापतियों और पसंदीदा मुख्यमंत्री में शुमार हैं। उनके कंधों पर फिर साल-2027 का विधानसभा चुनाव जितवाने की अहम ज़िम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। मोदी-शाह के बाद एक दिन पहले हल्द्वानी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गरजते और चीखते हुए इसका ऐलान खुली महासभा में यूं ही नहीं किया। पुष्कर सबसे लंबी अवधि वाले BJP CM बन चुके हैं। उनके रेकॉर्ड खुद आला कमान से जुड़े दिग्गज गिनाते रहते हैं। तमाम दिक्कतों-झंझावातों-साज़िशों को पार पाने के बाद अब उनके पास कई नए और अधिक कठिन चुनौतियाँ सामने हैं। उनका इतिहास बताता है कि वह इन सभी को कामयाबी के साथ पार कर लेंगे। BJP और समीक्षकों का मानना है कि सरकार की Hat Trick अगर लगती है तो इसकी कुव्वत भी मौजूदा मुख्यमंत्री के पास ही है।

CM पुष्कर सिंह धामी ने अपनी काबिलियत के बूते PM नरेंद्र मोदी (ऊपर) और HM अमित शाह के दिलों में खास जगह बना ली है

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पुष्कर के आलोचक,विरोधी या फिर अन्य विपक्षी दल उनको निशाने पर लेने का कोई मौका नहीं चूकते रहे हैं। ये उनकी मजबूरी और कर्तव्य भी है। इसके बावजूद ये बहुत बड़ा सच है कि सियासत की बिसात पर बहुत अनुभवी न होने और सरकार चलाने का Zero अनुभव के Record और दबी-कुचली-दिमागी तौर पर हार चुकी BJP-Failed सरकार मिलने के बावजूद नौजवान CM के तौर पर पुष्कर ने हर मोर्चे को हँसते-मुस्कुराते फतह कर दिखाया। नए-नए और बड़े कारनामे कर दिखाए। उनको बड़ी चुनौतियाँ सामने रख के उनसे पार पाने में शायद लुत्फ आता है। 1 लाख करोड़ रूपये का सरकार का Budget लाना, सरकारी नौकरियों को फाटक खोल देना, समान नागरिकता संहिता (UCC),नकल कानून-Land Act,Land जिहाद,धर्मांतरण कानून,राज्य में लाखों करोड़ रूपये का Global निवेश लाना, भ्रष्टाचारी राजनेताओं, नौकरशाहों, बड़े माफिया को जेल की सींखचों के पीछे ठूंस डालना, National Games सरीखे देश भर का ध्यान खींचने वाले कठिन Task को बतौर मेजबान कामयाबी के साथ अंजाम देना हर मुख्यमंत्री के बूते से बाहर रहा है। ऐसे कदम उठाने या सोचने के लिए भी बड़ा जिगर चाहिए।

Chetan Gurung

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पुष्कर को एक बेहद युवा और संभावनाशील भावी नेता के तौर पर मैंने उनको राजनीति की शुरुआत से देखा है। जब वह भगत सिंह कोश्यारी, जिनको BJP के Stalwart के तौर पर आज भी देखा जाता है, के साथ उनके सबसे विश्वसनीय के तौर पर काम करते थे या फिर जब वह BJP युवा मोर्चा के 2 बार प्रदेश अध्यक्ष रहे। मोर्चा को उन्होंने अपनी अगुवाई में तब आसमान पर पहुंचा दिया था। आज मोर्चा अध्यक्ष कौन हैं, इसके लिए दिमाग पर ज़ोर डालना पड़ता है। PSD आज जो है, उसके लिए मोदी-शाह का आशीर्वाद तो है ही, लेकिन खुद की मेहनत और काबिलियत का भी बहुत बड़ा योगदान है। बुरे और अच्छे वक्त के साथियों का साथ देना और अंतिम क्षणों तक मौके देने का गुण उनमें हैं। आज उनके इर्द-गिर्द दिखाई देने वाले प्रभावशाली कई चेहरों और नवरत्न किस्म के नौकरशाहों को देख के इसे समझा जा सकता है। पुराने दोस्तों के घर उनसे मिलने अचानक पहुँच जाना उनकी फितरत ही नहीं, दोस्ती और प्रगाड़ रिश्तों को दीर्घकालिक बनाए रखने के उनके गुण का हिस्सा है।

जब साल-2021 में पहली बार CM के तौर पर उनका नाम अचानक घोषित हुआ था तो लोगों को हैरानी हुई थी। खास तौर पर BJP के ही कई बड़े और छोटे चेहरों को। TSR-1,TSR-2 और Covid-19 महामारी की मार से वे पहले से त्रस्त थे। उन्होंने मान लिया कि अब BJP को 15 सीटें भी विधानसभा चुनाव में बामुश्किल मिल सकेंगी। सरकार को ले के तब अवाम में गुस्सा घर किया हुआ था। Covid से हालात मुश्किल दर मुश्किल होते जा रहे थे। सियासी समीक्षक भी मान बैठे थे कि जो शख्स कभी उप मंत्री या राज्यमंत्री तक न रहा हो, उसको सीधे सरकार की कमान सौंप कर मोदी-शाह ने हाराकिरी वाला फैसला लिया है। जो दुनिया को नहीं दिखा या उसकी समझ से बाहर का था, उसको लेकिन सरकार के Number-1 और 2 ने बाखूबी देख और समझ लिया था। पुष्कर ने 8 महीने बाद BJP को अप्रत्याशित,अभूतपूर्व,ऐतिहासिक जीत विधानसभा चुनाव में दिलाई। फिर लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर कमल खिलाया। वह दरअसल सभी की सोच और उम्मीदों से आगे जा के नतीजे लगातार दे रहे हैं।

PSD को शुरू में नौसिखुआ होने के नाते सोचा जा रहा था कि कुछ मंत्री और नौकरशाही हावी हो जाएगी। जिनको सत्ता और System की बहुत करीब और भीतर की जानकारी है, उनसे पूछा जाना चाहिए। सरकार में एक पत्ता भी हिलता है तो CM पुष्कर को मालूम रहता है। हवा की बयार भी बहती है तो उनको मालूम रहता है कि वह किस दिशा से किस दिशा की ओर बही। चेहरे पर उनकी हर वक्त नजर आने वाली भोली मुस्कुराहट से कई बार कुछ लोग गलत अंदाज लगा लेते हैं। उनको लगता है कि उनको गलतफहमी में रख के अपना उल्लू सीधा करना आसान है। ऐसा होता तो सरकार एक के बाद एक तमाम बड़ी चुनौतियों (Paper Leaks-अंकिता भण्डारी प्रकरण सबसे बड़े हैं) से यूं ही पार नहीं पा लेती। निजी तौर पर देखा जाए तो पुष्कर को बाहर के बजाए घर के भीतर से चुनौती देने की लगातार कई कोशिशें हो चुकी हैं। बिना कुछ नाराजगी की भाव-भंगिमा दिखा के उन्होंने ऐसी कोशिश करने वालों को भी ठंडा कर डाला है। कुछ तो उनके ही शरण में आ चुके हैं। ये उनके राजनीतिक चातुर्य को जाहिर करने के लिए काफी है।

PM और HM के साथ ही कई बड़े और आला कमान के अंग समझे जाने वाले दिग्गज कई बार खुलासा कर चुके हैं कि उत्तराखंड में अगला विधानसभा चुनाव पुष्कर की अगुवाई में लड़ा जाएगा। पुष्कर की कोशिशों और उन पर भरोसा जतलाते हुए मोदी-शाह ने उनको पूरा मंत्रिमंडल बनाने की सौगात दे डाली। इसके लिए उनकी पूर्ववर्ती दोनों CM तरस गए थे। कई बार आंतरिक विरोधी Media-Social Media के जरिये ये हवा बनाने की कोशिश करते रहे हैं कि नेतृत्व परिवर्तन कभी भी मुमकिन है। जो फैसला मोदी-शाह को करना हो और जिनसे बात करने या उनके सामने खड़े होने तक की जुर्रत आज की तारीख में किसी भी दिग्गज BJP चेहरे तक में न हो, वे दोनों के मन की बात को भला कैसे समझ सकते हैं,इस पर हैरानी होती है। समझा जा सकता है कि ऐसा माहौल बना के पुष्कर के विरोधी एक किस्म से अराजकता फैलाने,राज्य में अस्थिरता का माहौल बनाने और सबसे ज्यादा अपने चेलों और वफ़ादारों को साथ जोड़े रखने की कोशिश अधिक करते हैं। हर बार वे बेनकाब और नाकाम होते रहे हैं।

पुष्कर ने कुछ फैसले तो बहुत ही शानदार और मिसाल लायक लिए हैं। उन्होंने IAS-IPS अफसरों में यकीन पैदा किया कि वे अच्छा काम करें, उनको पूरा मौका मिलेगा। DM-SSP की कुर्सी या फिर शासन में अहम महकमों के लिए सचिव-प्रमुख सचिव-ACS-CS के लिए चेहरों का चयन एक बार सोच-समझ के करने के बाद फिर उनको वह पर्याप्त मौका और समय दे रहे। अधिकांश DMs की छवि-प्रतिष्ठा और कार्यशैली बहुत अच्छी है। देहरादून के DM सविन बंसल को ले के बहुत नकारात्मक छवि या प्रतिष्ठा थी। उनको खाली गोदाम से निकाल के राजधानी का जिलाधिकारी बनाने का फैसला बहुत बड़ा और जोखिम भरा था। आज सविन नायक बने हुए हैं। सरकार का प्रमुख सकारात्मक चेहरा बने हुए हैं। प्रोन्नति (Super time Scale में) के 15 महीने बाद भी वह बने हुए हैं। उधम सिंह नगर के DM नितिन भदौरिया, हरिद्वार के DM मयूर दीक्षित, पौड़ी की DM स्वाति भदौरिया, उत्तरकाशी के DM प्रशांत आर्य और हाल ही में नैनीताल भेजे गए DM ललित मोहन रयाल अपने कामकाज और छवि से सरकार की छवि को बेहतर बना रहे हैं।

कभी प्रमुख जिले के DM अगर 6 महीने भी गुजार लें तो उपलब्धि हुआ करती थी। सविन,नितिन,स्वाति,मयूर मिसाल हैं कि काबिलियत को अब सलाम है। शासन में भी अहम और मलाईदार महकमों को ले के कुर्सी दौड़ खत्म कर दी गई है। प्रमुख सचिव RK सुधांशु,L फैनाई,R मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ पंकज पांडे,बृजेश संत,विनय शंकर पांडे, शैलेश बगौली जिन महकमों को लंबे समय से संभाल रहे हैं, उनके लिए और DMs-SSPs के लिए कभी सरकारों में एक किस्म से बोलियाँ लगा करती थीं। पुष्कर सरकार में ये खत्म हो गया है। बोलने के लिए कुछ भी बोला जा सकता है। Chief Secretary और DGP की कुर्सी IAS-IPS अफसरों के लिए ख्वाब-सपना हुआ करता है। CS की कुर्सी पर डॉ सुखबीर सिंह संधु (एक बार सेवा विस्तार),राधा रतूड़ी (2 बार सेवा विस्तार मिला) और अब आनंदबर्द्धन बैठे हैं। DGP के तौर पर अशोक कुमार को नियमित बनाए रखने के बाद अभिनव कुमार को लाया गया फिर दीपम सेठ इस कुर्सी पर हैं।

मुझे इल्म है कि एक CS और एक DGP को निजी तौर पर शायद PSD पसंद नहीं करते थे। इसके बावजूद दोनों को उन्होंने बिना पूर्वाग्रह के Prize Posting दी। ये गुण और दम हर किसी में नहीं होता है। पुष्कर का विरोधियों या फिर धोखा देने वालों को भी माफ कर देने का गुण भी कुछ मौकों पर देखा गया है। इसके चलते उन्होंने कुछ को मंत्री बनाए रखा है तो कुछ का नुक्सान नहीं होने दिया। कुछ बड़े और पैसों के बूते रसूख रखने वाले का दंभ भरने वाले भी उनके दरबार में आगे-पीछे दिखने और उनके करीबी होने का स्वांग रखते रहे हैं। ऐसे भी कुछ लोगों को जानता हूँ, जो गलतफहमी में थे कि वे जो कर रहे या उनकी हरकत से कोई वाकिफ नहीं है, को PSD ने हल्का सा झटका दे के भर छोड़ दिया। वह चाहे तो उनको तबाह-बर्बाद भी कर सकते हैं। इनमें कुछ बड़े-बड़े संस्थान चला रहे और कतई बेदाग नहीं हैं। उत्तराखंड के लिए अच्छी बात ये है कि पुष्कर ने सरकार की स्थिरता को कायम किया। राज्य को अस्थिरता के दौर से निकाला। राजनीतिक शत्रुता के भाव को खत्म किया। Congress के बड़े नेता भी निजी तौर पर उनके मित्र हैं। सार्वजनिक तौर पर भले वे कुछ भी बोले। पुष्कर को Record तोड़ कार्यकाल के लिए बधाई संग शुभकामना..

 

 

 

 

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