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Big Message!!Cabinet Expansion के छिपे संदेश समझें!वफ़ादारों पर मंत्रियों का ठप्पा-उम्मीद पाले बैठों के हिस्से धप्पा:नेतृत्व परिवर्तन के कयासों पर Full Stop! साफ हो गया कि PM मोदी-HM शाह को नहीं चाहिए CM विकल्प:PSD ने अपने बढ़े कद को किया जग जाहिर:Assembly Election में साबित होंगे उत्तराखंड BJP के बालेन शाह!

Chetan Gurung

CM पुष्कर सिंह धामी ने आज वफ़ादार MLAs को मंत्री का ठप्पा लगाया। सालों से उनको गद्दी से हटते देखने की हसरत पाले बैठी Lobby को धप्पा कर दिया। इससे भी अहम पहलू इस Episode का ये रहा कि Cabinet Expansion के जरिये PSD ने अपने बढ़े सियासी कद का प्रदर्शन किया। ये साफ कर दिया कि PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह के दरबार में उनकी जगह किस कदर मजबूत हो चुकी है। मंत्रिमंडल विस्तार के लिए सरकार के Number-1 और 2 को राजी कर उन्होंने दोनों के बढ़ते भरोसे को पक्का किया। मोदी-शाह को निस्संदेह यकीन हो चला है कि 10-11 महीने बाद होने वाले उत्तराखंड के Assembly Elections में पुष्कर उत्तराखंड में वही करिश्मा और जादू कर दिखाएंगे, जो पड़ोस के नेपाल में PM बनने जा रहे बालेन शाह ने कर दिखाया। उनको भला क्यों कर CM के विकल्प की जरूरत होगी।

CM पुष्कर सिंह धामी अपने हुनर-मेहनत के बूते PM नरेंद्र मोदी (ऊपर) और HM अमित शाह (नीचे) की आँख के तारे बन चुके हैं

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देखा जाए तो पुष्कर ने मंत्रिमंडल विस्तार कर के अपने राजनीतिक ऊंचाई को और बढ़ाने में कामयाबी पाई है। मोदी-शाह के करीब जाने या उनके सामने खड़े हो के अपनी बात रख पाना भी मौजूदा दौर में पार्टी के बड़े से बड़े नामदारों के लिए भी बेहद टेढ़ी खीर से कम नहीं है। उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए कुछ भी नहीं तो 2 से अधिक बार तो PM-HM से मार्गदर्शन और राजीनामा के साथ हिदायतें तो लेनी ही पड़ी होंगी। Full House Cabinet के साथ सरकार चलाने का ख्वाब पूर्ववर्ती त्रिवेन्द्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत भी पूरा नहीं कर पाए थे। मोदी-शाह की BJP में ये उपलब्धि हासिल कर पाने में पुष्कर कामयाब रहे। UP के CM योगी आदित्यनाथ को भी मंत्रिमंडल में सभी कुर्सियाँ भरने का मौका नहीं मिला है।

Chetan Gurung

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PSD ने मंत्रिमंडल विस्तार में बहुत ही बारीकी और Smartly कदम उठाए हैं। हरिद्वार के मदन कौशिक को मंत्रिमंडल में शामिल कर उन्होंने अपने दुर्ग को और मजबूत किया। उनकी जगह हासिल करने या फिर उनको पदच्युत होते देखने की लालसा रखने वाली Lobby को गहरा झटका दिया। मदन मौजूदा सरकार में शुरू से ही हाशिये पर थे। उनको लोग भूलने लगे थे। साल-2022 के चुनाव में उनके नाम से जारी और Unconfirmed एक Tweet उनको भारी पड़ा था। ये Tweet मुख्यमंत्री PSD से मुताल्लिक था। मदन को अपनी Team में शामिल कर पुष्कर ने बड़ा दिल भी दिखाया। 10 महीने बाद होने वाले कुम्भ मेले में मदन से वह भरपूर काम भी ले सकेंगे। तब वह उस वक्त हो रहे विधानसभा चुनाव में BJP का भगवा ध्वज फहराने के अभियान में खुल के जुट पाएंगे।

रूड़की के MLA और अपने करीबी प्रदीप बत्रा को भी मंत्री बना के PSD ने एक किस्म से मदन पर Check and Balance भी रखा। मंत्रिमंडल में भीमताल के राम सिंह कैड़ा,रुद्रप्रयाग के भरत सिंह चौधरी,राजपुर रोड (देहरादून) के खजानदास को भी शामिल किया, जो पुष्कर के बेहद भरोसेमंद समझे जाते हैं। खास बात ये है कि तीनों की छवि और प्रतिष्ठा के साथ किसी किस्म की दिक्कत नहीं है। चुनाव में ये सब काम आएगा। मंत्रिमंडल विस्तार बेहद कड़ी चुनौती थी और पुष्कर ने ये कर दिखा के अपने राजनीतिक आभामण्डल-तेज में इजाफा कर दिखाया। इसके बाद इसकी गुंजाइश या शक शुबहा खुद उनके बारे में नकारात्मक सोचने वालों में भी नहीं रह गया होगा कि Assembly Elections की अगुवाई कौन करेंगे!

BJP के अंदर तक की खबर रखने वाले तो शुरू से ही मुतमईन थे कि नेतृत्व परिवर्तन सरीखी बयार तो दूर हल्का सा झोंका भी आला कमान के आसपास से नहीं गुजर रहा। पुष्कर के मनमाफिक Cabinet Expansion के जरिये मोदी-शाह ने ये अच्छी तरह जतला दिया। PSD ने अप्रत्याशित अंदाज में और तकरीबन मृतप्रायः BJP को पहली बार CM बनने के बाद अभूतपूर्व विजय दिलाई थी। उन्होंने ये कारनामा करने के बाद लोकसभा चुनावों-By-Elections और छोटे-बड़े हर चुनाव में भगवा ऊंचा रखा। ऐसे मुख्यमंत्री को बदलने का प्रयोग सियासी रणनीति के हुनरमंद मोदी-शाह कभी करने की भी सोच सकते हैं, ये सियासत के विश्लेषक कभी मानने को राजी नहीं होंगे।

हकीकत ये है कि उत्तराखंड में पिछले General Assembly Elections में साल-2017 से अधिक सीटें जीतने का जलवा दिखाने वाले PSD से इस बार आला कमान की उम्मीदों का निश्चित तौर पर परवाज़ भरना स्वाभाविक है। दूसरे राज्यों में भी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पुष्कर के नाम का तिलिस्म और लोकप्रियता नजर आई हैं। देवभूमि में वह जी-जान लगा डालेंगे। BJP नेतृत्व उनसे नेपाल के PM बनने जा रहे बालेन शाह सरीखे चमत्कार की उम्मीद रख रहे हैं तो इसमें ताज्जुब नहीं है। बालेन को हालांकि अभी सरकार में आ के करिश्मा दिखाना है। पुष्कर ये बार-बार दिखा चुके हैं। और एक बात! बालेन बेशक काठ की हांडी साबित हो। पुष्कर इस कहावत से ऊपर बार-बार आए हैं।

बालेन को यहाँ तक पहुंचाने में नेपाल के बहुचर्चित Gen Z आंदोलन की अहम भूमिका रही। उनको PM बनाने में इस आंदोलन के अगुवा और आक्रामक युवा सुदन गुरुंग का बहुत बड़ा हाथ रहा है। बालेन इस आंदोलन के दौरान घर के भीतर ही रहे थे। वह कहीं नजर नहीं आए थे। उनकी पार्टी (राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी) के अध्यक्ष रवि लामिछाने भ्रष्टाचार के मामले में जेल में थुन दिए गए थे। बालेन पकी खीर खाने जा रहे। पुष्कर ने सत्तारूपी खीर का एक-एक चावल खुद अकेले ही इकट्ठा कर दूध-आंच का बड़ी मेहनत से जुगाड़ किया है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक उनको High Command से साफ इशारा है। सरकार की Hat Trick कराओ और फिर CM बनो। Cabinet Expansion के निहितार्थ न समझ पाने वाले खुद की लानत-मलानत कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

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