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CM पुष्कर के मिलने-MLAs के मिलने आने के सिलसिले ने पकड़ी रफ्तार:Governor LT Gen (Ret) गुरमीत से मिले:पूर्व राज्यपाल-पूर्व CM कोश्यारी की भी मुलाक़ात:फिर मंत्री बनने की उम्मीदें चढ़ रही परवान!

विधानसभा चुनाव में टिकट कटने से बचाने या टिकट हासिल करने की मंशा वालों की भी भीड़भाड़

Chetan Gurung

गैरसैण में विधानसभा का Budget Session कामयाबी के साथ निबटाने के बाद CM पुष्कर सिंह धामी अधिक जोश और आत्मविश्वास से लबरेज़ दिख रहे। ऐसे में उनसे मिलने आने वालों की रफ्तार और तेज हो रही। इनमें हर दर्जे और किस्म के सियासतदाँ हैं। खुद भी वह आज Governor LT General (Ret) गुरमीत सिंह से मिलने लोकभवन गए। उनसे मिलने पूर्व Governor-पूर्व CM और उनके सियासी मार्गदर्शक भगत सिंह कोश्यारी मुख्यमंत्री आवास आए। BJP विधायकों ने भी ढेरी के हिसाब से उनसे मुलाक़ात की। हाल के दिनों में खास तौर पर CM से मिलने वालों में MLAs की बढ़ती तादाद के मद्देनजर अंदाज लगाया जा रहा है कि क्या मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार की तस्वीर दिखने लगी है?

राज्यपाल गुरमीत से उनके आवास पर मिल के मुख्यमंत्री पुष्कर ने गुलदस्ता भेंट करने के साथ ही सरकार की तरफ से हो रहे कार्यों के बारे में उनके संग मंत्रणा की। मुख्यमंत्री से मिलने कोश्यारी का पहुँचना भी मामूली नहीं हो सकता है। BSK उन सियासी शख़्सियतों में शुमार होते हैं, जो नाहक किसी शक्ति पुंज या मुख्यमंत्री से मिलने से बचते हैं। किसी खास वजह के बिना उनकी भेंट नहीं होती है। सियासत पर पैनी नजर रखने वालों को भी लग रहा है कि आज भी उनकी CM पुष्कर से मुलाक़ात के खास मायने होंगे। जो देर-सबेर सामने आ सकते हैं। या छिपे भी रह सकते हैं।

तमाम BJP MLAs ने CM पुष्कर सिंह धामी से मुलाकातें की:क्या कुछ खास होने वाला है?

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मुख्यमंत्री पुष्कर से विधायक सुरेश गड़िया, सुरेश सिंह चौहान, दुर्गेश्वर लाल, पार्वती दास, महंत दलीप रावत एवं पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी मिलने पहुंचे। आधिकारिक तौर पर यही कहा गया कि ये सभी अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के बाबत सरकार के मुखिया से मिले। देखने-परखने वाले इससे इतर देख और समझ रहे। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने में अभी भी कम से कम 10 महीने समझे जा रहे। BJP आलाकमान चुनावी गणित के कोण से एक Reshuffle पुष्कर मंत्रिमंडल में कर मुख्यमंत्री को और सशक्त कर दे तो ताज्जुब नहीं होगा।
इस संभावना से कोई इन्कार भी नहीं करता है।

पूर्व MLA राजेश शुक्ल भी CM पुष्कर से मिले

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PSD को उनकी मनमाफिक मंत्रियों की Team देने से PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह से सज्जित आला कमान को कोई गुरेज नहीं होगा। दोनों अच्छी तरह जानते हैं कि PSD में वह काबिलियत और क्षमता के साथ ताकत है, जो BJP को उत्तराखंड में विजय की तिकड़ी लगवा सकता है। मोदी-शाह खुल के पुष्कर की तारीफ करते रहे हैं। इसमें उन्होंने कभी कृपणता का परिचय न दे के खुले दिल से उनकी एक किस्म से फिर CM चेहरे के तौर पर Branding की है।

अभी का आलम ये है कि मंत्रिमंडल में तमाम चेहरे ऐसे हैं, जो सरकार और BJP के लिए सिर दर्द बने हुए हैं। उनके महकमों में या तो उनकी पकड़ बेहद कमजोर है या फिर उन पर अलग-अलग किस्म के दाग लग रहे हैं। अकेले मुख्यमंत्री पुष्कर के कंधे पर सरकार-संगठन को आगे तेजी से बढ़ाने-ऊंचा उठाने का जिम्मा आया हुआ है। आला कमान ये सोच सकता है कि मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार से मंत्री अपनी तरफ से कोई योगदान दें या न दें लेकिन मुख्यमंत्री की पेशानी पर बल न डालें। BJP के लिए दिक्कतें न पैदा करें।

विधायकों को शायद ये महसूस हो रहा है कि फेरबदल या विस्तार में कुछ भी हो, उनकी तकदीर चमक सकती है। इसमें CM पुष्कर की भूमिका अहम रहेगी। वे इससे आगे की भी सोच के पुष्कर से मिलने को लालायित हो सकते हैं। विधानसभा चुनाव के लिए टिकट और संभावित प्रत्याशियों पर भी मंथन-मंत्रणा शुरू हो चुकी है। MLAs ये सोच सकते हैं कि वे मंत्री न भी बन सके तो कम से कम उनका टिकट अगले विधानसभा चुनाव के दौरान न कट जाए।

ये साफ है कि प्रत्याशी चयन में मुख्यमंत्री PSD की ही भूमिका शीर्ष पर रहनी है। MLAs और कुछ पूर्व विधायकों या संगठन के लोगों की उनसे मिलने के सिलसिले में इजाफा होने की एक प्रमुख वजह ये भी मुमकिन है। ये तय है कि मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल फेरबदल या विस्तार या फिर टिकट बँटवारे में विश्वासपात्रों को ही तवज्जो देना चाहेंगे। गैर विधायकों के मुख्यमंत्री से मिलने की एक और वजह दायित्वों का जल्द संभावित बंटवारा भी हो सकता है। इस संबंध में List को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ऐसा बताया जा रहा है।

 

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