
Chetan Gurung
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज विश्वमांगल्य सभा के ‘मातृ संस्कार समागम’ में कहा कि उन्होंने जीवन में विशेष सुविधा या संसाधनों को नहीं जिया। संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की जिंदगी में अहमियत रही। साधारण परिवार में पले-बढ़े। शुरू से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व समझा। सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखे। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने में मातृ शक्ति की अहम भूमिका होती है।





उन्होंने कहा कि साधारण जीवन शैली ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने की सीख दी। सादगी, संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना ने उनके विचारों और निर्णयों को आकार दिया। जीवन में ऊँचा पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। मातृशक्ति परिवार की ताकत है। परिवार समाज की मूल इकाई है। परिवार सशक्त होगा तो समाज और राष्ट्र भी सशक्त होंगे।
CM पुष्कर ने कहा कि परिवारों का स्वरूप सीमित हुआ है और एकल परिवारों का प्रचलन बढ़ा है। मातृशक्ति परिवार के साथ ही समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण में भी निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है।
उन्होंने कहा कि जब सेवा किसी परिवार की परंपरा बन जाती है तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। वह पूरे समाज की चेतना को जागृत करता है। जब परिवार के सदस्य जरूरतमंदों के दुःख को अपना दुःख समझते हैं, तभी समाज में करुणा, समरसता और मानवीय मूल्यों की स्थापना संभव होती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर ने सप्त मातृ शक्ति सम्मान के तहत 7 विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ,साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मन्जू टम्टा वसुश्री कविता मलासी को सम्मानित किया| विश्वमांगल्य सभा से प्रशांत हरतालकर,डॉ वृषाली जोशी, पूजा माधव, अनुराधा यादव भी इस मौके पर उपस्थित रहे।


