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धर्मांतरण-सरकारी जमीन पर कब्जे के खिलाफ बोलना Hate Speech तो फिर यही मंजूर:मुस्लिम बहनों को हलाला-3 तलाक-इद्दत-बहू विवाह से मुक्ति-CM पुष्कर

UCC की पहली सालगिरह पर अफसर-समिति Members का सम्मान

Chetan Gurung

CM पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को Himalayan Cultural Centre-गढ़ी कैंट में UCC लागू होने की पहली सालगिरह पर इस कानून को तैयार करने वाली समिति के Members और इसको अमल में कुशलता के साथ लाने वाले अफसरों-VLC को सम्मानित करते हुए कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। UCC के अमल में आने से समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो सकी। उन्होंने एक विदेश NGO को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर उसकी रिपोर्ट के मुताबिक धर्मांतरण की अवैध कार्यवाही और सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई करना Hate Speech की श्रेणी में आता है, तो उनको ये आरोप मंजूर है। वह आगे भी अपनी कार्यवाही जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि सदियों से शोषित और दमित मुस्लिम बहनों को UCC के लागू होने से 3 तलाक के दर्द,हलाला की लज्जा और इद्दत से मुक्ति मिल सकी है।

 

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने ‘‘समान नागरिक संहिता’’ को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने इसी के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व अपने दृष्टिपत्र में राज्य में “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का संकल्प लिया था। दुबारा सत्ता संभालते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के लिए कार्य प्रारंभ किया। राज्य सरकार ने 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू कर दिया।

उन्होंने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। UCC लागू होने से राज्य के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं। प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक की कुरीतियों से मुक्ति मिली है। पिछले एक साल में उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। इस कानून से मुस्लिम महिलाओं को राहत मिली है। उन्होंने इसका स्वागत किया है। दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों सहित प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।

CM PSD ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है। ये समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में “समानता से समरसता’’ स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है। यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है। संपत्ति के बंटवारे और बाल अधिकारों के विषय में भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि संपत्ति के अधिकार में अब UCC के लागू होने से बच्चों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया गया है। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मृतक की सम्पत्ति पर उसकी पत्नी, बच्चों एवं माता पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं। वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित के उद्देश्य से इस कानून में Live-in-Relationship पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

पुष्कर ने कहा कि पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, ये जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जा रही है। लिव-इन के दौरान जन्में बच्चों को उस युगल का बच्चा ही मानते हुए, उसे जैविक संतान के समान समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उनके लिए निजी तौर पर अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने समान नागरिक संहिता को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करके दिखाया है। UCC  लागू होने से पहले राज्य में औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण हुआ करते थे। ये संख्या आज बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। राज्य में ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था तथा 7,500 से अधिक सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से शासन को वास्तव में सीधे जनता के द्वार तक पहुँचा दिया है। विवाह में धोखाधड़ी करने पर सख्ती का प्रावधान किया गया है। कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

CM ने कहा कि “समान नागरिक संहिता’’ की धारा देश के दूसरे राज्यों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अवश्य प्रेरित करेगी। अभी कुछ मामले बहु विवाह और विवाह विच्छेद से भी संबंधित सामने आए हैं, ऐसे मामलों में अलग से प्रावधान करते हुए, सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी अमेरिका के एक NGO ने उन्हें Hate Speech का जिम्मेदार ठहराया है। धर्मांतरण, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ बोलना Hate Speech है तो फिर मंजूर अच्छा है।

 

 

इस मौके पर मंत्री गणेश जोशी, डॉ धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृज भूषण गैरोला, सचिव (गृह) शैलेश बगोली, DGP दीपम सेठ, UCC समिति के सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह, दून विवि की VC प्रो सुरेखा डंगवाल, मनु गौड़, अजय मिश्रा, विशेष सचिव (गृह) निवेदिता कुकरेती उपस्थित थे।

 

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