अंतरराष्ट्रीयउत्तराखंडदेशराजनीतिराष्ट्रीय

जितनी सियासत-उतनी बढ़ेगी ताकत!

The Corner View

Chetan Gurung

कोई रसिक महाराज की Clip इन दिनों Viral है। UP में किसी सरकारी दायित्व पर हैं। गुमनाम-लेकिन PM नरेंद्र मोदी-CM योगी आदित्यनाथ के करीबी होने की हवा उनके चेले या फिर मुख्यमंत्री बनने की दिलोजान से चाहत रखने वालों के चेले फैला रहे हैं। हकीकत UP-वहीं की BJP वाले वाले जाने। उनकी जुबान लेकिन उत्तराखंड में आ के खुली और क्या खुली। जनाब के मुखारबिंद से निकला,`बचे एक साल के भीतर ही CM की कुर्सी पर धन दा (उत्तराखंड सरकार में मंत्री धन सिंह रावत) विराजेंगे’। उस वक्त उनकी बगल में वही मंत्री (धनदा) नुमाया हो रहे थे। वह भी काहे को रोकते कि भाई ऐसा न बोलो। उत्तराखंड में अस्थिरता के बीज काहे बो रहे! उनकी तो भाई Branding बढ़िया हो गई। भाड़ में जाए अस्थिरता-वसथिरता। ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा था। पहले भी कई मौकों पर होता रहा है। बेचैन आत्माओं को शायद इसका एहसास नहीं हो पा रहा कि इन सबसे कुछ फायदा उनको नहीं होने वाला। पुष्कर पर जितना छल वार करते रहे हैं वह मोदी-शाह की निगाहों में उतने मजबूत हो के उभर रहे।

महाराज ऐसे दावा कर रहे थे गोया मोदी जी और अमित शाह जी उनसे पूछे बिना सांस भी नहीं लेते या जल का घूंट तक नहीं लेते। उनको बता दिया कि जल्दी ही देवभूमि में मुख्यमंत्री को बदलना चाहते हैं। आपकी मुहर लगनी है। ये वही महाराज हैं जो UP-केंद्र सरकार पर चूँ तक करने की हिम्मत नहीं करते। अकेले ये ही सज्जन नहीं जो कुछ महीनों से BJP की ही उत्तराखंड की पुष्कर सरकार पर अचानक ही उग्र-नाराज नजर आते नजर आए हैं। अलग-अलग क्षेत्र के कई चेहरे पुष्कर-सरकार पर आक्रामक दिखने लगे हैं। ऐसा लगता है मानो उनका वश चले तो लट्ठ ले के सरकार पर पिल उठे। बेहाली समझी जा सकती है उनकी। जब से पुष्कर सरकार के मुखिया की कुर्सी पर बैठे हैं तभी से वे शोर-शराबा मचवाते रहे हैं,`बस कुछ महीनों के मेहमान हैं।फिर हम होंगे यहाँ के सरताज’। उनकी तकदीर खोटी है। दम भी नहीं है। मोदी-शाह से जा के घुड़की देने का जिगर दिखाएँ न। हुजूर हमारी मुराद कब पूरी करेंगे?कब नई सरकार देंगे?

Chetan Gurung

—-

उनकी पेशानी पर बल पड़ना और पेचिश लगना कुदरती है। मोदी जी-शाह जी ने ही तो पुष्कर को खटीमा का समर अपनों के ही सजाए चक्रव्यूह में हताहत होने के बावजूद फिर CM बना दिया। इतना ही नहीं, लगातार बनाए रखे हुए हैं। दूर-दूर तक ऐसा लग भी नहीं रहा कि सरकार के Boss में कोई नया चेहरा नुमाया होगा। उनकी कुर्सी पर गिद्ध आँख लगाए बैठे हमजोलियों-सरदारों को हम प्याले-हम निवाले-कुछ जी हुजूर करने वालों को समझाना मुश्किल हो रहा। उनकी दिक्कत समझ में आती है। आखिर कब तक चेलों को फुसलाते रहें,`अरे समझो..हो रहा-हो रहा। बदलाव होने वाला है। बस थोड़ा और धैर्य और रखो। फिर बस हम ही हैं CM..उनकी बेबसी और बेचैनी हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प की सनक की तरह बढ़ती ही जा रही। मोदी जी-शाह जी कोई इशारा ही नहीं दे रहे कि पुष्कर की पारी को विराम दे के उनको तख्त पर बिठाने ही वाले हैं। मरदूद विधानसभा चुनाव है कि सिर पर आता जा रहा। जनवरी-2027 में तो आचार संहिता ही लग जाएगी। ये जितना करीब आएगा उनकी उम्मीदों पर हरिसन ताला उतना मजबूत लगता जाएगा।

उनकी बस एक ही तमन्ना है। फटाफट मुखिया का चेहरा बदल जाए। साहब लोग समझ ही नहीं पा रहे। ये कोई रीत या फिर BJP का संविधान या फिर मोदी-शाह की खाई कसम थोड़ी है कि हर बार चुनाव से 8-10 महीने पहले सरकार का प्रधान बदलते रहेंगे। हर कोई तो तीरथ नहीं हो सकता न। 6 महीने के भीतर MLA बनने का पैमाना हासिल करने का मौका देने के बजाए प्रधानी से ही विदा कर दिए जाएँ। बेकरार सरदारों की इच्छा समझ सकते हैं। काश! कोई फटी जींस जैसा बयान कोई पुष्कर के मुख से भी निकल जाता। उधर हुजूर हैं कि लगता है कोई Software जिस्म और दिमाग में फिट किए हुए हैं। पहले 8 महीने फिर तकरीबन पौन 4 साल की सल्तनत चलाने के बावजूद जुबान ही नहीं फिसलने दे रहे। ऐसा कैसे चलेगा!

हमले भी कामयाब हो नहीं रहे। Congress पर ही दाँत पीस रहे। कुछ भी Solid हमला सरकार पर नहीं कर पा रही। खुल के तो वही कर सकती है। वह तो उल्टे घर के झगड़ों में उलझी पड़ी है। पहले सरकार को तो झकझोरे। बड़बड़ा रहे कि कहाँ आपस में गुत्थमगुत्था कर रहे। सबसे बड़ी मुख्य विपक्षी दल कुछ कर नहीं रहे तो खुद ही कुछ करना होगा। और इसमें भाई लोग कोई कसर छोड़ के राजी नहीं। भाई को पदच्यूत करने में नाकामी की कसक छलकनी स्वाभाविक है। कभी कोई सरदार और कभी कोई दरबारी कुछ न कुछ अपनी तरफ से ठीक-ठाक जुबानी हमला बोलने का शौक पूरा कर रहे। उनकी बेकरारी लेकिन मोदी-शाह कम या खत्म करने को राजी ही नहीं हो रहे। उनका सवाल है। और क्या करें हुजूर? और पुष्कर हैं कि उन पर चुटकी ले के उनके घाव पर नून-खुरसानी छिड़क दे रहे कि उनको हटाने से जुड़ी कम से कम 60 कपोल-कल्पना आधारित अफवाह उड़ चुकी। सच में इससे ज्यादा उनका भद्दा मज़ाक और नहीं उड़ सकता।

खुद की ताजपोशी की आस-ख्वाब पूरी न हो पाने की कसक के पहाड़ तले दबे ये आकांक्षी शायद मोदी-शाह की जोड़ी को ढंग से अभी तक समझने और पहचानने के हुनर से कोसों दूर है। केंद्र सरकार-सभी राज्य सरकारों के साथ संगठन को भी अपने इशारों से चलाने वाले PM-HM के मन में क्या है, ये सिर्फ वही दो जान सकते हैं। बाकियों को तो खुद के अच्छे या बुरे की भनक तक नहीं लगती। भाई त्रिवेन्द्र सिंह रावत सरकार बढ़िया चला रहे थे। 5 साल पूरा करेंगे, ये तो उनके कट्टर विरोधी भी मानते थे। 4 साल में हफ्ते से भी कम वकफ़ा रह गया था। दिल्ली में हफ्ते भर पहले ही मोदी जी बड़े खुशगवार माहौल में उनसे मिले भी थे। और अचानक उनको संदेशा बिना अंगद-हनुमान आ गया। आपका वक्त पूरा हो गया। ऐसा कोई नहीं था जो भौंचक्का न रहा हो। न जाने उन्होंने क्या कर दिया था। ये किसी को आज तक पता नहीं चला।

और फिर एक और Surprise हुआ। सियासत की दुनिया में सीधे-शरीफ किस्म के तीरथ सिंह रावत उनके उत्तराधिकारी बना दिए गए। जुम्मा-जुम्मा एक साल भी नहीं रह गया था चुनाव को। कोढ़ पर खाज ये कि BJP को दुनिया में मौत का साम्राज्य-खौफ कायम कर चुके Covid-19 ने ईलाज ढंग से न मिलने और आए दिन की बेतहाशा मौतों ने बुरी तरह झकझोर डाला था। खुद तीरथ खुद की ताजपोशी से हैरत में थे। ऐसा कहते हैं। हकीकत वही जानते हैं। फिर उनकी आएँ-बाएँ-साएँ बयान वायुमंडल में ऐसे तैरने लगे कि आला कमान ने अपने कान पकड़ लिए। बोले-भले चुनाव हार जाएँ लेकिन मुख्यमंत्री तो ये नहीं चल पाएगा। भाई माफी चाहते हैं बोला और उनसे कहा, आप संसद में ही ठीक रहेंगे।

TSR-1 के हटने से स्तब्ध सियासी समीक्षकों-भाजपाइयों को TSR-2 को भी महज 4 महीनों में रफूचक्कर कर दिए जाने से भारी हैरानी होना ही था। वे बयान दे रहे थे-चैनलों में चीख रहे थे। Social Media में शोर कर रहे थे। सिर्फ 8 महीने रह गए हैं चुनाव को। ये क्या कर दिया कमल के आकाओं ने। लेकिन अभी तो वह लोकप्रिय डायलाग सामने आना था। वही वाला,`Picture अभी बाकी है मेरे दोस्त’ वाला। मोदी-शाह ने गलती सुधारी और Congress की खाट चुनाव में खड़ी करने के लिए खटीमा वाले PSD को सरकार के तख्त पर बिठा दिया। ऐसा शख्स जो कभी राज्यमंत्री या उप मंत्री तक नहीं रहा था। और भाई ने खुद की शहादत के बावजूद मोदी-शाह की छाया में वह कर दिखाया जो उत्तराखंड में कभी नहीं हुआ था। BJP सत्ता बचाने में और शानदार ढंग से कामयाब हुई।

जिनको लगता है कि वे जो भी करें, दिल्ली में बैठ देश चला रहे दोनों उस्तादों को कुछ भनक नहीं लगेगी, वे झटका खा गए। पुष्कर को फिर सरकार की कमान सौंप दी गई। भाई पुष्कर के विरोधियों को ये समझ में नहीं आ रहा शायद कि उनको आखिर किस बात पर हटाया जा सकता है? वह संघ के एजेंडे को पूरा करते हैं। मदरसों-अवैध कब्जों पर कार्रवाई-UCC-धर्मांतरण कानून वही लाए। मोदी-शाह जो चाहते हैं वह उनके ईशारे से पहले कर गुजरते हैं। किसी को क्या खुजली हो रही जो बिना विकल्प के CM बदल के राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने से अधिक पार्टी पर ये ठप्पा लगाना पसंद करेगा कि BJP पूर्व मुख्यमंत्रियों की Factory है।

सूबे का हालिया सालों का इतिहास गवाह है। विरोधियों से अधिक घर के भेदियों-मीर जाफ़र-विभीषण व्याकुल हैं। ताज्जुब क्यों नहीं होगा जब भूतपूर्व हो चुके मुख्यमंत्रियों के साथ उनके दरबार में बाकायदा सरकारी मोढ़े पर बैठ के मलाई खा के उनका भट्टा बैठा चुके चेहरे भी सरकार जा रही-मुख्यमंत्री बदल रहा-बदलना होगा का हो-हल्ला मचा रहे। उनको घर के ही कुछ अति महत्वाकांक्षी लेकिन काबिलियत में सिफर और धूल-धूसरित प्रतिष्ठा वालों का साथ न मिला होता तो उनकी भी मजाल जो कर रहे, वह करने की न होती। आलम ये है कि मुख्यमंत्री का दिल्ली जाना भी उनके लिए `अबकी पक्का गयो-गयो’ सारीखा होता है।

भाई समझो। ढंग से समझो। मोदी-शाह के राज में बड़े से बड़ा कदम भी उठेगा तो किसी को सेकंड भर पहले भी आभास नहीं होगा। जो भी होगा खामोशी के साथ होगा। बिना किसी के दबाव में आए होगा। दबाव किस चिड़िया का नाम है, ये तो ऊपर वाले जय-वीरू जानते भी नहीं है। हाँ,मंत्री की कुर्सी बचाने और मंत्रिमंडल में  खाली कुर्सी के लिए जद्दोजहद करना चाहें तो बेशक बेहतर विकल्प हैं। एकाध मंत्री वाकई हैं भी ऐसे। उनको फारिग कर के नए चेहरों को मौका देना बहुत वाजिब होगा। ये वे मंत्री हैं जो सिवाय सरकार-संगठन के लिए परेशानी का सबब हैं। उनकी जगह नए और ताजा दम-ऊर्जावान चेहरे कारगर साबित हो सकते हैं। दिल्ली में नए पार्टी आका नितिन नबीन के चुनाव के मौके पर गए PSD वहाँ हाथों-हाथ इस दिशा में भी कुछ बात कर आए हों तो कहा नहीं जा सकता है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button