
Chetan Gurung
अमेरिका के न्यूरो एजुकेटर और फ्यूचरिस्ट डा. रिच मेलहाइम ने Artificial Intelligence को भविष्य उन्मुख कौशल विकसित करने की खातिर तैयार रहने वाले लोगों के लिए अवसरों का महासागर करार देते हुए कहा कि दुनिया AI क्रांति के मुहाने पर खड़ा है।
आज ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में AI और मेटावर्स के युग में उद्यमिता विषय पर कार्यशाला में उन्होंने कहा कि AI इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस क्षेत्र आने वाले समय में करियर और उद्यमिता की नई दिशा तय करेंगे। फोकस, क्रिटिकल थिंकिंग, रचनात्मकता और सहानुभूति भविष्य के सबसे शक्तिशाली कौशल होंगे।
डा. मेलहाइम ने AI प्रूफ उद्यमिता की अवधारणा पर कहा कि विश्व-स्तरीय उत्पाद, गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ और विशेषज्ञता ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें AI कभी पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। तकनीक तेजी से विकसित हो सकती है, लेकिन मानवीय समझ का स्थान कोई मशीन नहीं ले सकती। रचनात्मकता वह क्षेत्र है जहाँ AI की सीमाएँ समाप्त हो जाती हैं। मानव मस्तिष्क की असली शक्ति सामने आती है।
कार्यशाला का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर, ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट डिपार्टमेंट ने संयुक्त रूप से किया। कार्यशाला में डीन ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स डा DR गंगोडकर, मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के हेड डा. विशाल सागर, TBI ग्राफिक एरा की CEO शरिश्मा डांगी, इनक्यूबेटर मैनेजर हर्षवर्धन सिंह रावत, क्रापस्टेकल के संस्थापक अनमोल गोगिया शामिल हुए।
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हिमालय की संवेदनशीलता को समझें-वक्त की मांग है
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ग्राफिक एरा विवि में विशेषज्ञों ने पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षित और संतुलित विकास के सही और नए उपाय पेश करते हुए कहा कि कुदरत के साथ खराब छेड़छाड़ घातक साबित हो सकता है।

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज पहाड़ी क्षेत्र में भारतीय मानकों के अनुरूप इंजीनियरिंग विषय पर सेमिनार में कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में अस्थिर पर्यावरण, बदलते जलवायु हालात और सीमित पहुंच जैसी चुनौतियां प्रमुख है। हमको इन चुनौतियों के समाधान खोजने होंगे। युवाओं को सुरक्षित और संतुलित पर्वतीय विकास की दिशा में शिक्षित करना होगा।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड देहरादून के निदेशक सौरभ तिवारी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का विकास मैदानी क्षेत्र जितना ही महत्वपूर्ण है। हाल की प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को समझना समय की आवश्यकता बन गया है। निर्माण कार्यों में मानकों का पालन इन चुनौतियों से निपटने में सहायक हो सकता है।
डॉ अनबलगन रथिनम ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय अस्थिरताओं, अधिक वर्षा, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। निर्माण कार्य तेजी से बढ़ रहे हैं। ये कार्य भूमि की वास्तविक स्थिति को समझे बिना किए जाएं, तो इससे पहाड़ी अस्थिरता बढ़ती है। भूस्खलन जैसी गंभीर समस्याएं और गंभीर रूप लेती हैं।
सेमिनार में 100 से अधिक सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। जिम ढलान स्थिरता मॉडलिंग, भूस्खलन पूर्व चेतावानी प्रणाली, साइड जांच तकनीक, बदलते जलवायु परिदृश्य में हिमालय आपदाएं तथा पहाड़ी खुदाई में जियोसिंथेटिक विषयों पर चर्चा की गई। सेमिनार का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड ने संयुक्त रूप से किया।



