
Chetan Gurung
Supreme Court के Justice उज्जल भूयान ने आज Graphic Era University में कहा कि SC ने आम लोगों की जिंदगी से मुताल्लिक कई सकारात्मक अधिकारों को मान्यता दे कर लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की है। सशक्त लोकतंत्र के लिए निरंतर स्वयं का मूल्यांकन करना होगा। अपनी कमियों को पहचान के भविष्य में ज्यादा बेहतर कार्य करने का संकल्प लेना होगा।

SC Justice Ujjal Bhuyan
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न्यायमूर्ति भूयान ने `भारतीय संविधान के 75 वर्ष’ पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में कहा कि भारतीय संविधान ने सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के लोगों को समाज की मुख्यधारा में स्थान दिलाकर उन्हें सम्मान, पहचान और अधिकार प्रदान किए हैं। नि:शब्दों को आवाज दी है। संविधान कोई जड़ दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सतत् चलने वाली प्रक्रिया है। इसकी आत्मा की रक्षा के लिए समाज और संस्थाओं को सदैव सजग व जागरूक रहना होगा।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 75 वर्ष भारतीय लोकतंत्र की यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव हैं। इस सफर में न्यायालय ने आम नागरिकों के जीवन को अधिक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और गरिमामय बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बहुचर्चित वादों- केशवानंद भारती, इंदिरा गांधी, मेनका गांधी, गोलकनाथ सहित अनेक ऐतिहासिक मामलों के निर्णयों का उल्लेख किया तथा भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति JK कानिया और न्यायमूर्ति HR खन्ना के विचारों और सिद्धांतों पर रोशनी डाली।
SC Justice ने मजबूत न्याय व्यवस्था के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक दृष्टिकोण में लचीलापन और सबसे ऊपर नागरिकों का विश्वास तथा सम्मान अर्जित करने की दरकार जताई। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा ही न्यायपालिका की वास्तविक ताकत होता है। अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए न्यायमूर्ति भूयान ने कहा कि आत्मविश्वास समय के साथ विकसित होता है। कानून का क्षेत्र असीम अवसरों से भरा है। इसके Students को परिवर्तन के लिए सदा तैयार रहना चाहिए। भविष्य की चुनौतियों पर कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। केंद्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है।
भविष्य में AI की भूमिका को अहम करार देते हुए कहा कि तकनीकों को न्याय के मार्ग में बाधा नहीं, बल्कि उसे सुलभ और प्रभावी बनाने का सशक्त माध्यम बनाना चाहिए। Justice उज्जल ने KP नौटियाल Audi में कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने,ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. अमित R भट्ट तथा District Judge प्रेम सिंह खिमाल भी इस मौके पर मौजूद थे। खिमाल और CJM रिंकी सहानी को स्मृति चिह्न भेंट किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ लॉ ने संयुक्त रूप से किया।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर डा.राकेश कुमार शर्मा, प्रो वाइस चांसलर डा. संतोष एस. सर्राफ, कुलसचिव डा. नरेश कुमार शर्मा, ग्राफिक एरा हिल के कुलसचिव डा.DK जोशी, Director (Infra) डा. सुभाष गुप्ता, ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी की डीन स्कूल ऑफ लॉ डा. डेज़ी अलेक्जेंडर, डीन डॉ DR गंगोडकर, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ लॉ के हेड डा. विवेक गोयल भी Justice उज्जल को सुनने वालों में शुमार रहे। कार्यक्रम का संचालन डा. भारती शर्मा ने किया। छात्र-छात्राओं ने न्यायमूर्ति भूयान के समक्ष संविधान से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएँ सवालों के रूप में रखी।
—ग्राफिक एरा के कार्यों पर खुशी जाहिर की–
जस्टिस उज्जल को ग्राफिक एरा के अफसरों ने समाज के विकास, दूसरों के दुख-दर्द कम करने और शहीदों के परिवारों के लिए लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दीl अन्य सामाजिक कार्यों तथा कुदरती आपदा के दौरान राहत कार्यों में विवि के योगदान की जानकारी भी दी। उनको बताया कि ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ कमल घनशाला सामाजिक सरोकारों के कारण और छात्रों में दूसरों की मदद के जज़्बे को प्रोत्साहित करने के ऐसे कार्यों में बहुत रुचि लेते हैंl चेयरमैन और वाइस चेयरमैन डॉ राखी घनशाला ने Covid के दौरान जोखिम लेते हुए बस्तियों में हज़ारों कुंतल खाद्यान्न बांटाl न्यायमूर्ति भूयान ने इस पर खुशी जाहिर की l



