Big Story::सियासी हमलों के सामने CM पुष्कर One Man Army!Ministers-MPs-MLAs की जुबान तकरीबन खामोश!
आए दिन मंत्री-पार्टी क्षत्रप हरकतों-बयानों से सिर दर्द के तौर पर उभर रहे

Chetan Gurung
उत्तराखंड में सरकार के अधिकांश मंत्री और BJP के MPs-MLAs कहाँ हैं? सरकार और संगठन पर हो रहे Congress के हमलों का आक्रामक ढंग से जवाब देने में वे नदारद दिख रहे। ऐसा लगता है मानो वे जो हो रहा उससे पूरी तरह बेपरवाह हैं। एक किस्म से हाथ पर हाथ धर के नजारों का लुत्फ ले रहे। CM पुष्कर सिंह धामी अकेले वाहिद शख्स हैं, जो One Man Army की तरह विपक्षी दल Congress और आलोचकों से डट कर जूझते दिखे हैं। राज्य में अंकिता भण्डारी और एंजल चकमा Murder मामलों ने सियासी माहौल को गरमाया हुआ है। विपक्ष और आलोचकों का सामना करने की ज़िम्मेदारी का झण्डा अकेले मुख्यमंत्री उठाए हुए हैं। सरकार और संगठन के बड़े चेहरे मुखरता से सामने नहीं आए हैं।


CM पुष्कर सिंह धामी को PM Narendra Modi (on top) और Home Minister Amit Shah (Below) के Blue Eyed CM तथा Tested-भरोसेमंद समझा जाता है
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मुख्यमंत्री पुष्कर की पहचान हर किस्म की चुनौती, चाहे चुनावों से बावस्ता हो, को निस्तेज करने या फिर विपक्ष खास तौर पर Congress के हमलों का सामना जीदारी से करते हु उनको ध्वस्त करने वाले के तौर पर स्थापित हो चुकी है। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है। उनकी इसी ताकत-सामर्थ्य और हुनर के PM नरेंद्र मोदी-HM अमित शाह और BJP के बाकी बड़े दिग्गज कायल समझे जाते हैं। पार्टी के तमाम बड़े मोर्चों पर इसी के चलते उनको झोंका जाता है।
PSD की TRP सियासी दुनिया और पार्टी में इसी खूबी के चलते बहुत ऊपर है। वह सियासी झंझावतों को सफलतापूर्वक निबटाने तथा सरकार से जुड़े अहम-फैसलाकून कदमों को बेझिझक उठाने में माहिर के तौर पर उभरे हैं। उनकी खासियत है कि वह बड़े से बड़े मामलों और संकटपूर्ण-कठिन पलों तथा माहौल में भी बहुत Cool-शांतचित्त दिखाई देते हैं। अंकिता भण्डारी Murder के साथ ही Paper नकल मामले में उन्होंने बहुत तेजी से कार्रवाई को अंजाम देते हुए आक्रामकता का नजारा भी पेश किया था।
अंकिता के हत्यारोपी BJP से कथित तौर पर जुड़े होने के बावजूद जेल में हैं। Paper नकल मामले में भी फौरन सख्त कानूनी Action लिए गए थे। दोनों ही मामलों ने उत्तराखंड को आंदोलित कर दिया था। CM पुष्कर को ताजा एंजल चकमा हत्या मामले में भी बेहद संवेदनशील और सख्त रुख अपनाते देखा जा रहा है। ये उनके ही निर्देश हैं जो एक को छोड़ सभी आरोपी जेल में बंद हैं। ऐसे बड़े और सियासी उफान लाने वाले मुद्दों पर मुख्यमंत्री अकेले दम हालातों का सामना करते और उनको सुलझाते नजर आए हैं।
हैरानी इस पर है कि सरकार के मंत्रियों के साथ ही BJP के पास लोकसभा के 5 MPs और राज्यसभा के 2 MP उत्तराखंड में हैं। विधायकों की पूरी फौज और कथित दायित्वधारियों की भरी-पूरी जमात है। वे सरकारी खज़ानों पर मौज मार रहे। उनको पार्टी और मुख्यमंत्री तथा उसी BJP उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम की सिफ़ारिश का लाभ मिला है, जिन पर अंकिता मामले में लगातार हमले हो रहे।
BJP के पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर की आपसी Audio Recording ने इन दिनों सियासी बवंडर मचाया हुआ है। इसमें दोनों अंकिता भण्डारी के साथ ही दुष्यंत गौतम और BJP के प्रदेश महामंत्री (संगठन) अजेय को ले के विवादित दावे कर रहे हैं। उन दावों की पुष्टि हालांकि नहीं हुई है। Congress और कुछ अन्य इन Audio Recording को हथियार बना कर BJP और उसकी सरकार पर लगातार तीक्ष्ण हमले कर रहे हैं।
इन Recordings को खुद उर्मिला Facebook पर Live आ के सार्वजनिक कर रही है। अभी ये मामला गरम ही चल रहा और राजधानी के सेलाकुई में त्रिपुरा से पढ़ने आए एंजल चकमा की कुछ युवकों से गर्मागर्मी के बाद इसी दौरान हत्या हो गई। पुलिस ने इस मामले में 4 हत्यारोपियों को Arrest कर लिया है। एक के नेपाल फरार हो जाने की संभावना जतलाई जा रही है। उसको नेपाल पुलिस की मदद से पड़ोसी मुल्क में भी तलाशा जा रहा।
चकमा मामले में भी पुलिस ने कुछ खास तथ्य पेश किए हैं। इसके मुताबिक ये नस्लीय भेदभाव और टिप्पणी का मामला नहीं था। आरोपियों में एक नेपाली और कुछ खुद पूर्वोत्तर भारत से वास्ता रखने वाले हैं। इनमें ST आरोपी भी हैं। सरकार और पुलिस के दावे के बावजूद ये मामला शांत नहीं हो रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर के सख्त निर्देश के चलते अधिकांश आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। इसके बावजूद सरकार-BJP पर हमले कायम हैं।
तथ्यों की भरमार और अपनी सरकार होने के बावजूद मंत्री और दायित्वधारियों के साथ ही MPs-MLAs तथा पार्टी के प्रमुख दिग्गज दोनों मामलों में जुबान खोलने से बचते महसूस हो रहे हैं। सियासी समीक्षक इस पर हैरान हैं। उनके मुताबिक ऐसे किस्म के मामलों में अमूमन सरकार-संगठन के लोगों से मुख्यमंत्री संग मजबूतीपूर्वक खड़े होने की अपेक्षा की जाती है। न जाने किस वजह से वे ऐसा करने से झिझक रहे या कन्नी काट रहे।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को भी अंकिता मामले में निशाने पर लिया जा रहा। उन पर भी हमले हो रहे। सच तो ये है कि सिवाय मंत्री सुबोध उनियाल और पार्टी महामंत्री दीप्ति के कोई भी सरकार और संगठन का पक्ष ठोस ढंग से रखने के लिए सामने नहीं आए हैं। मंत्रियों और सांसदों को पूछे जाने की सूरत में एकाध मौकों पर ढीले ढाले ढंग से लीपा-पोती के अंदाज में जवाब देते या बात करने देखा गया है।
संदेश ये जा रहा है कि मौका देख-जान के महत्वाकांक्षियों के दबे अरमान जाग रहे हैं। उनकी चुप्पी और उदासीनता का प्रमुख राज यही है। ये बात दीगर है कि CM पुष्कर के पास हर मर्ज की दवा अब तक मिलती रही है। वह विघ्न विनाशक मंत्र भी जानते दिखे हैं। वह खुद आधिकारिक तौर पर चुटकी ले के कह चुके हैं कि उत्तराखंड में कम से कम 55 बार मुख्यमंत्री बदलने की हवा बहाई जा चुकी है। `जाको राखे मोदी-शाह,मार सके न कोय’ पंक्ति उन पर Fit बैठती है।
विधानसभा चुनाव करीब हैं। मोदी-शाह नहीं चाहेंगे कि उनके Blue Eyed CM को किसी किस्म की दिक्कतों और दबाव का बेवजह सामना करना पड़े। बजाए पार्टी को चुनावी विजय की तिकड़ी का तोहफा देने की रणनीति को कामयाब करने के लिए जुटने के बजाए आपसी द्वंद्व में उलझे। पार्टी आला कमान बद्री-केदार धाम की धरती को हर हाल में अपने कब्जे से बाहर जाने नहीं देना पसंद करेगा। ये करने का माद्दा PSD के पास ही है।
ये भी देखना होगा कि केदारनाथ धाम के बाद अब आदि कैलाश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असीम आस्था केंद्र हैं। BJP को मोदी-शाह के साए में लगातार तीसरी बार सरकार में लाने का कौशल और जरूरी सियासी हुनर PSD ही रखते हैं। शीर्ष पार्टी सूत्रों की माने तो मोदी-शाह के पास उत्तराखंड में हो रही हर घटना-सियासी दांव-पेंच और इसके शातिर खिलाड़ियों-उस्तादों के नामों की List तैयार है। उसके बिना पर वे कभी भी कार्रवाई उनके खिलाफ कर सकते हैं।
पुष्कर को PM-HM की तरफ से सरकार चलाने और Assembly Elections में फिर फतह दिलाने का Task मिला हुआ है। उनको दोनों ने Free Hand दिया है। इसमें दखल दोनों बर्दाश्त नहीं करेंगे, ये माना जा रहा है। मुख्यमंत्री महज अंकिता-चकमा Murder केस से नहीं जूझ रहे। आए दिन मंत्रियों-पार्टी के प्रमुख नेताओं के अपरिपक्व किस्म के विवादित बयान और उनकी हरकतें भी उनके लिए सिर दर्द बनते रहते हैं। इनको भी उन्हें ही सुल्टाना पड़ रहा है।



