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सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल भी! CM पुष्कर की परिक्रमा में जुटे MLAs:मंत्रियों की भी साँसे अटकी! Assembly Elections से पहले आखिरी Reshuffle कभी भी! BJP संगठन में भी नई टीम गठन आखिरी दौर में:जिसके गले PSD के हाथों से हार-उसकी गंगा पार?

Chetan Gurung

अचानक ही एक बार फिर पुष्कर मंत्रिमंडल को ले के सियासी गलियारे में आहट-दौड़धूप तेज है। राजनीतिक वायुमंडल का तापमान बढ़ गया है। समझा जा रहा है कि किसी भी वक्त मंत्रिमंडल विस्तार को ले के फाइनल संदेश PM नरेंद्र मोदी-HM अमित शाह की तरफ से CM पुष्कर सिंह धामी को आ सकता है। इसका एहसास पार्टी के खास तौर पर मंत्री बनने की दृढ़ हसरत पाले तमाम MLAs को अधिक हो गया नजर आ रहा। वे दिल्ली में पार्टी के आला नेताओं से वक्त मांग के मिलने की कोशिश छोड़ अचानक शहीद मेख गुरुंग मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुँच रहे। CM पुष्कर को गुलदस्ता दे के उनका आशीर्वाद लेने की कोशिश करते दिख रहे। राजनीतिक पंडित ये सवाल उछाल रहे कि क्या मंत्रिमंडल की खाली सीटें ही भरी जा सकती हैं या फिर कुछ मंत्रियों को TaTa-Bye-Bye का ज़ोर का झटका ज़ोर से दिया जा सकता है। खास तौर पर अपनी छवि के चलते सरकार और BJP का नुक्सान करने की गुंजाइश रखने वालों को। सरकार के साथ ही BJP प्रदेश कार्यकारिणी में भी नई टीम के गठन पर तैयारियां अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री की मुहर जिस पर लगेगी, उसकी नैया पार होना तय है।

CM Pushkar Singh Dhami को PM नरेंद्र मोदी (सबसे ऊपर दाएँ) और HM अमित शाह (ऊपर दूसरी फोटो में दाएँ) के Blue Eyed CM में शुमार किया जाता है

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अंदरखाने की खबर जो छन-छन के टुकड़ों में निकल रही, उसके मुताबिक मुख्यमंत्री को जहां से जरूरी है, वहाँ से इशारा दिया गया है कि मंत्रिमंडल की खाली सीटों को भर दिया जाए। 5 सीटें खाली हैं। कई विधायकों के भी संपर्क दिल्ली में पार्टी के भीतर ठीक-ठाक हैं। उनको भी इसका इशारा कर दिया गया है कि मंत्री बनने की लालसा-इच्छा जो भी है, जल्द से जल्द मुख्यमंत्री की परिक्रमा कर उनका आशीर्वाद हासिल करें। इधर-उधर दौड़ना नाहक या फिजूल वक्त गँवाने से कम नहीं होगा।

लग रहा कि इसका इल्म विधायकों की लंबी-चौड़ी जमात को हो चुका है। गुजरे 2-3 दिनों से अचानक ही PSD से मिलने वाले विधायकों का सैलाब दिख रहा है। ठोस सूत्रों के मुताबिक साल भर पहले से ही High Command कुछ मंत्री पदों को भरने और कुछ मंत्रियों की छुट्टी करने का मन बना चुका था। तब मुख्यमंत्री खुद चाहते थे कि फिलहाल किसी को न छेड़ा जाए। हटाने के बजाए उनको समझाया जाए और काम करने का एक मौका फिर दिया जाए। इसके बाद भी उनकी Report उचित न रहे तो फिर जैसा आला कमान की मर्जी।

CM पुष्कर की गुजारिश को आला कमान और खास तौर पर PM-HM ने मान लिया था। अब Assembly Elections करीब आते जा रहे हैं। PSD लगातार सियासी दौरे-आपदा बचाव-राहत-सरकारी योजनाओं की निगरानी-नई योजनाएँ तैयार करने-नकल विरोधी-धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने-UCC लाने और तमाम अन्य अहम कदमों को आकार देने में बेहद व्यस्त हैं। सरकार के कामकाज के बोझ को लंबे समय से एक किस्म से अकेले दम उठा रहे हैं। मोदी-शाह ये सब देख-समझ रहे हैं। ऐसे में शायद दोनों अब CM को Additional मंत्रियों के तौर पर Helping Hands दे डालते हैं तो ताज्जुब नहीं होगा।

सियासी नब्ज देख के हालात समझने वाले हकीमों से बात की जाए तो वे ये भी अंदेशा जतलाने से नहीं हिचक रहे कि कुछ मंत्रियों को Exit Door दिखाया जा सकता है। कुछ तो वाकई बहुत ही खराब प्रतिष्ठा और छवि रखते हैं। सरकार और संगठन के लिए बहुत बड़े सिरदर्द बने हुए हैं। BJP के ही आम कार्यकर्ता तक उनसे बेहद खफा हैं। मुख्यमंत्री का आशीर्वाद नहीं मिला तो ऐसे मंत्रियों का ऐशों-आराम-Honeymoon झटके में खत्म होना तय है। पुष्कर की Image अलहदा किस्म की है। वह अव्वल तो किसी का नुक्सान या फिर उस पर कार्रवाई जल्दी करने में यकीन नहीं रखते। इसके बजाए वक्त देना और लेना पसंद करते हैं। फिर भी न सुधरे तो सख्त कार्रवाई से अंगुल भर भी नहीं हिचकते हैं। इसकी कई मिसालें हैं।

विस्तार के साथ मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी तस्वीर उभरती है तो कम से कम 7-8 MLAs और खास तौर पर अपने विश्वासपात्र MLAs का पुनर्वास वह मंत्री बना के करने का मौका PSD पा सकते हैं। संभावना इसकी भी दृढ़ है। BJP के कुछ विधायक मुख्यमंत्री के बहुत करीबी समझे जाते हैं। इनमें कुछ बहुत युवा किस्म के भी हैं। वे भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार शायद उनकी भी बारी मंत्र पद के शपथ की आ जाए। ये नामुमकिन भी नहीं है। आज आलम ये है कि जो विधायक और पार्टी में मजबूती और दम रखने वाले दिल्ली कूच अभियान में जाने की सोच रहे थे, या शामिल हो चुके हैं, पुष्कर से जल्द से जल्द मुलाक़ात के लिए जतन करते दिख रहे।

वे जहां-जहां गए, शायद वहाँ से उनको यही नसीहत मिली कि मुख्यमंत्री से जा के मिलो। सौ सुनार की-एक लुहार की बात ये है कि मोदी-शाह का आशीर्वाद तभी मिल सकता है जब PSD की Good Books में भी नाम आ जाए। ये महज इत्तफाक है कि मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल के बादल पहले भी जब-तब उड़ते रहे लेकिन अंजाम की बारिश होने के बजाए बादल आवारगी में सीधे निकल गए और नतीजों का सूखा पड़ा रहा। इस बार शायद ऐसा नहीं होगा। पुष्कर अपनी अगुवाई में हर Assembly-Parliament-Local Bodies-Panchayat-LS-VS By-Elections के फतह का नजराना मोदी-शाह और आला कमान को दे के अपना फर्ज पूरा कर चुके हैं। अब सिर्फ Cabinet Expansions या फिर फेरबदल ही बचता है।

मोदी-शाह भी विधानसभा चुनाव से पहले नए मंत्रियों को हुनर और काबिलियत दिखाने का मौका पर्याप्त देना चाह सकते हैं। इसके लिए अभी का वक्त माकूल होगा। बाद में बहुत देर हो जाएगी। उसका कोई महत्व नहीं रह जाएगा। उनकी तरफ से बतौर ईनाम PSD को उनके मन-मुताबिक विश्वस्त सिपहसालारों से सज्जित मंत्रिमंडल टीम बनाने की आजादी दी जा सकती है। इसके बाद उनको एक बार फिर Assembly Elections Victory की Hat Trick लगाने की चुनौती बतौर लक्ष्य दी जाएगी। और यकीन मानिए कि इस बार माहौल अधिक गंभीर और बदला हुआ है।

Local Bodies के बाद पंचायत चुनावों में BJP के खाते में 13 में से 12 Chairman Seats आईं। इस नतीजे को हैरानी भरा और PSD के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि तथा ऐतिहासिक माना जा रहा। पार्टी में जो पुष्कर को अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं, उनको विरोधी दल Congress के लोगों से अधिक Current लगा है और उनमें ही बेचैनी भी ज्यादा है। ऐसा माना जा रहा। पुष्कर BJP के लिए इस सबसे छोटे और गांवों से जुड़े बेहद अहम चुनाव से मुताल्लिक अभियान की सरपंची कर रहे थे। बेशक Congress इसके लिए Money और Gun Power के इस्तेमाल का आरोप लगाती है। हकीकत ये है कि Numbers उनके खिलाफ रहे। मायने यही रखते हैं।

PSD की नजरें इनायत की चाहत रखने वालों में BJP के भी चेहरे हैं। वजह है Team महेंद्र भट्ट का नए सिरे से गठन। MP और प्रदेश अध्यक्ष फिर बने महेंद्र की नई कार्यकारिणी का गठन होना है। इसका ऐलान कभी भी हो सकता है। नई कार्यकारिणी में सबसे अधिक निगाहें किसी ओहदे पर टिकी हैं तो वह प्रदेश महामंत्री और युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष की। बाकी ओहदों की हैसियत इन कुर्सियों के सामने बहुत हल्की या मामूली हैं। CM PSD जिसके नाम के आगे सही (Tick) का निशान लगाएंगे कुर्सी उसकी गोद में जा गिरेगी। भट्ट को भी पुष्कर खेमे के स्तम्भ में शुमार किया जाता है। वह बिना मुख्यमंत्री की मंजूरी के शायद ही किसी अहम ओहदे पर नियुक्ति करेंगे।

 

 

 

 

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