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World Summit on Disaster Management:बचाव में संस्कृति-शोधों का मिश्रण कारगर:Graphic Era में जुटे देश-दुनिया के दिग्गज Scientists-शोधकर्ता

प्रीमियर लीग में पौड़ी विजेता-चंपावत उप विजेता

Chetan Gurung

Disaster Management पर Graphic Era University में World Summit में दुनिया के Top वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं संग जनप्रतिनिधियों-नौकरशाहों ने आपदाओं से होने वाला जोखिम को कम से कम करने के लिए तकनीकों के इस्तेमाल और सहारे-ज्ञान-अनुभव की जरूरत पर गहन मंथन किया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने संस्कृति और वैज्ञानिक शोधों के संयुक्त इस्तेमाल को इस कार्य के लिए जरूरी ठहराया।

Summit के मुख्य संयोजक व यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ दुर्गेश पंत ने बताया कि आपदाओं के विभिन्न रूपों, प्रभावों और  प्रभावितों की समस्याओं को कम से कम करने पर इस वर्ल्ड समिट के साथ ही दस तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने कारगर उपायों पर प्रकाश डाला। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग से लेकर परम्परागत उपाय तक शामिल हैं। दुनिया के 50 से अधिक देशों के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों, राजनयिकों, नौकरशाहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चालू Summit में गहन मंथन के बाद निष्कर्ष निकाला जाएगा।

R Minakshi Sundaram-Principal Secretary (GoUK)

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पूर्व राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि आज विज्ञान और परम्परागत ज्ञान को जोड़कर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय ने हिमालय क्षेत्र की समस्याएं एक जैसी होने का उल्लेख करते हुए आपसी सहयोग की आवश्यकता बताई।

GB पंत यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मनमोहन चौहान ने कृषि क्षेत्र में नवाचार बढ़ाने और खेती को तकनीकों से जोड़ने,भारतीय वन्य जीव संस्थान के पूर्व निदेशक व हिमालय एकेडमी ऑफ साईंस एंड टेक्नोलॉजी के संस्थापक अध्यक्ष डॉ JS रावत, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो BP पांडेय, विशेषज्ञ मनोज पंत भी विचार रखने वालों में शामिल रहे।  उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव डॉ R मिनाक्षी सुंदरम ने भूतल और भूगर्भ के जल से जुड़े वैज्ञानिक शोधों के उपयोग की आवश्यकता बताई।

उन्होंने आपदाओं से होने वाली क्षति को कम करने के उपायों पर चर्चा की। Water Conclave में IIT कानपुर के प्रो. राजीव सिन्हा,ITM पुणे के प्रो राघवन कृष्णन, और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साईंस, बंगलौर के प्रो वी के कुलकर्णी ने मुख्य वक्ता के रूप में विभिन्न क्षेत्रों और स्थितियों में पानी की उपलब्धता और इसके संरक्षण की तकनीकों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर स्पेस टू सेफ्टी संगोष्ठी की अध्यक्षता इसरो मुख्यालय के निदेशक डॉ JB थॉमस ने की। इसमें SSAD सम के प्रमुख डॉ SS कुण्डू, SAC अहमदाबाद के डॉ श्रीजीत KM व डॉ नीरु जायसवाल और IIR के वैज्ञानिक डॉ HC कर्नाटक व डॉ CM भट्ट मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। संगोष्ठी में मुख्य रूप से नाइजर सैटेलाइट की विविध विशेषताओं और उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया।

भारतीय ज्ञान परम्परा, संस्कृति के प्राकृतिक आपदाओं से संबंध पर भी Summit में मंथन किया गया। इसमें उत्तराखंड सरकार के सचिव दीपक गैरोला, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग के निदेशक प्रो. सुब्रमण्यम, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ डीसी शास्त्री व प्रो वेंदुमति और आईकेएस सेंटर की प्रो माला कपाडिया मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

आपदाओं के दौरान तत्काल राहत विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आम आदमी की राहत और बचाव में भागीदारी बढ़ाने पर इंडिया डेवलपमेंट रिव्यू की सह संस्थापक देवांशी वैद,इंडियन एक्सप्रेस की नेशनल फीचर एडिटर देवयानी उनियाल ने अपने विचार रखे।आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भूमिका विषयक सत्र को संबोधित करते हुए गूंज फाउंडेशन के उत्तराखंड के प्रतिनिधि शिव प्रसाद नैथानी ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में आपदाएं अचानक और बहुत तीव्रता से आती है, इसलिए स्थानीय समुदायों के अनुभवों, पारम्परिक ज्ञान और सहयोग को आपदा प्रबंधन का मुख्य केंद्र बनाना आवश्यक है।

आपदा जोखिम न्यूनीकरण में मीडिया की भूमिका पर राघवेश पांडेय, अनुपम त्रिवेदी, शिशिर प्रशांत,  यूकोस्ट के अमित पोखरियाल,  डॉ सुभाष गुप्ता और ने उपाय सुझाए। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी प्रदर्शनी में देश की विभिन्न संस्थाओं ने अपनी नई खोजों, उत्पादो और तकनीकों का प्रदर्शन किया।

अनेक विषयों पर 10 तकनीकी सत्रों में 180 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ SP सिंह, प्रो अरुण कुमार त्यागी, डॉ सुषमा गैरोला, शशांक लिंगवाल, डॉ प्रकाशम, डॉ सुमनलता, आशा थपलियाल, डॉ प्रियदर्शी उपाध्याय, डॉ अमित अग्रवाल, डॉ अबदीन, डॉ गजेंद्र सिंह ने विचार व्यक्त किए।

–प्रीमियर लीग में पौड़ी प्रथम, चम्पावत द्वितीय–

Summit के दौरान आज साईंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग का फाइनल भी हुआ। इसमें पौड़ी के चार अलग-अलग स्थानों पर स्थित विद्यालयों के बच्चों की टीम अव्वल रही।

उत्तराखंड के गांवों तक के बच्चों को दुनिया में होने वाले शोध, विज्ञान और तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रीमियर लीग के लिए राज्य के गांवों के स्कूलों के बीच बच्चों के मुकाबले कराने के बाद पहले 95 विकास खंडों की एक एक टीम चुनी गई। इनके बीच प्रतियोगिता कराकर 13 जनपदों की टीमों का चयन किया गया।

आज 13 जनपदों की टीमों के बीच हुए आपदा प्रबंध, विज्ञान और टेक्नोलॉजी पर आधारित मल्टीपल च्वाइस, विजुअल, स्पीच, वीडियो, रैपिड फायर आदि छह राउंड में बाजी मारकर पौड़ी ने पहला पुरस्कार जीता। चम्पावत की टीम द्वितीय और रुद्रप्रयाग की टीम तीसरे स्थान पर रही।

 

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