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Big Debate::Brand मोदी-शाह संग पुष्कर अब 3 इक्के! Congress के लिए चीन की दीवार होगी ये तिकड़ी!चाणक्य-चन्द्रगुप्त बन के उभरे PSD:BJP के लिए Hattrick लगाने का दम रखने वाला चेहरा बन के उभरे

Anti Incombency-Gen-Z आंदोलनों के सहारे Team राहुल गांधी!आपसी मल्ल युद्ध से बेहाल

Chetan Gurung

BJP उत्तराखंड में नया इतिहास रचेगी? या Congress की वापसी का ख्वाब पूरा हो सकेगा?अगला विधानसभा चुनाव सिर पर है। आचार संहिता शायद January-27 के आखिर तक लग जाए। या उससे भी पहले। दोनों प्रमुख दल सरकार बनाने के दावे ठोंक रहे। Congress को उम्मीद है कि BJP आखिर कब तक Anti-Incombency से बची रहेगी। उसको लगता है कि अब माहौल जुदा किस्म का है। उसको खुद की जिंदगी बचाने के लिए इस बार ऑक्सीज़न जरूरी मिलेगी। लगातार दो बार सरकार बना के BJP एक मिथ युवा-Smart-चतुर-पेशेवर-Diplomacy के उस्ताद CM पुष्कर की अगुवाई में साल-2022 में तोड़ चुकी है। PSD ने साबित कर दिया कि चुनाव जीतने के लिए कार्य कुशलता-मेहनत-समर्पण-आम लोगों की नब्ज पहचानना और उस पर काम करना जरूरी है। मिथ-विथ कुछ नहीं होता है। Congress और सभी सियासी समीक्षकों को लेकिन ये सोचना होगा कि इस बार सत्तारूढ़ दल के पास पिछली बार की तरह सिर्फ 2 ही Trump Card PM नरेंद्र मोदी और HM अमित शाह नहीं हैं। पुष्कर ने बतौर मुख्यमंत्री खुद को बड़े और जुझारू राजनेता के तौर पर निखारा और देश भर में स्थापित किया है। उनको मौजूदा दौर में ताश की गड्डी में मोदी-शाह के साथ तीसरा इक्का कहा जा सकता है।

CM Pushkar Singh Dhami with PM Narendra Modi and Minister Of Home Amit Shah.He is consedered very close and trusted by both


मौजूदा दौर की प्रमुख ताकत Gen-Z का दिल जीतने में CM PSD ने कोई कसर नहीं छोड़ी है

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भ्रष्टाचारी नौकरशाहों-राजनेताओं और बाबुओं पर कानून का डंडा इतनी बेदर्दी से कभी नहीं पड़ा। पुष्कर सरकार के कई फैसले केंद्र और बाकी राज्यों ने भी अंगीकार किया है। कई छोटे-बड़े Elections,लोकसभा-विधानसभा से ले के Local Bodies तक पुष्कर की सरपरस्ती में BJP ने ऐसे जीत दिखाए,मानो बाएँ हाथ का खेल हो। BJP आला कमान और खास तौर पर मोदी-शाह-नवीन को इससे ज्यादा क्या चाहिए?समीक्षकों और Congress के लोगों का मानना है कि इस बार साल-2012 के विधानसभा चुनाव सरीखे हालात हैं। कहने का मतलब चुनाव बेहद संघर्षपूर्ण रहेगा। एकाध सीट का फर्क रहेगा। 4-5 फीसदी वोटों का अंतर इस बार पट जाएगा।

ऐसा मुमकिन भी हो तो ये समझना होगा कि तब की BJP और आज की मोदी-शाह की BJP में धरती-आसमान का फर्क है। 14 साल पहले BJP ने मेजर जनरल (अब दिवंगत) BC खंडूड़ी की अगुवाई में चुना लड़ा था। BJP के केन्द्रीय नेता भी गैर पेशेवर किस्म के थे। आज केंद्र में मोदी-शाह हैं। ये एक Deadly Combination भारतीय राजनीति में माना जाता है। ये जोड़ी Co-operative के चुनाव भी हारने को राजी नहीं होती है। दोनों ही विधानसभा चुनावों में BJP के लिए वोटों का दरिया अपनी तूफानी रणनीति के जरिये पार्टी के हक में लाते दिखे हैं। वे बेहद आक्रामक किस्म की सियासत करने में यकीन रखते हैं।

Record उठा के देखा जाए तो अव्वल तो शिकस्त से दोनों को नफरत है। अगर हार भी गए तो फिर दूसरी पार्टी की सरकार के लिए अस्तित्व बचाए रखना ना-मुमकिन सा कर देते हैं। फिर उत्तराखंड में CM अब पुष्कर हैं। BCK के के दौर में BJP सिर्फ 1 सीट की कमी से सरकार नहीं बना पाई थी। BCK को राजनीतिक धूर्तता नहीं आती थी। न ही उनमें सियासी दूरदर्शिता और हालात को पढ़ पाने की काबिलियत थी। उनके नाम पर चुनाव लड़ा गया। खंडूड़ी है जरूरी का नारा दिया गया था। वह खुद कोटद्वार में हार गए। हकीकत है कि अगर BCK जीत जाते तो Congress का सरकार बनाने का सपना हकीकत में तब्दील न हो पाता। BCK फिर मुख्यमंत्री बनते।

ये बात दीगर है कि BCK पर भी ये आक्षेप लगे कि उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ ऐसे चेहरों को चुनाव में निबटाने के लिए अपने लोग छोड़े थे, जो मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब देखते थे और उनके लिए चुनौती थे। बदले में घर के भेदियों-विभीषणों ने उनकी लंका जला डाली। इनमें 2 नाम ऐसे थे, जो मुख्यमंत्री भी रहे। आज की सियासत जुदा है। साल-2012 सरीखे हालात फिर पैदा हो जाए तो मोदी-शाह की BJP को सरकार बनाने में कुछ Seconds से अधिक नहीं लगेंगे। Congress 10 सीट की बढ़त के साथ भी सरकार में आ जाए तो एक पल भी इस खतरे के बिना नहीं सो पाएगी कि कब उसकी सरकार गिर जाए।

BJP के लिए हालात देखा जाए तो उत्तराखंड में अधिक माकूल हैं। ये कड़वा सच है कि BJP के पास उत्तराखंड में फिलहाल पुष्कर का विकल्प नहीं है। शक्तिशाली मोदी-शाह Brand को अधिक चमकदार और टिकाऊ मुलम्मा चढ़ाने का कौशल और दम PSD ही रखते हैं। पुष्कर अवाम का दिल जीतने और चुनाव जीतने के गुर को मोदी-शाह की शागिर्दी में तूफानी रफ्तार से सीख चुके हैं। हालात और जरूरत के मुताबिक खुद को ढालना सीख चुके हैं। जमाना Gen-Z और युवाओं-Students का है। वह उनके बीच पैंट-शर्ट में नमूदार हो रहे। उनका दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। युवाओं-खिलाड़ियों-Students और महिलाओं की ताकत मौजूदा दौर में बहुत अधिक है। वह सभी को साधते जा रहे। युवाओं के लिए उन्होंने सरकारी नौकरियों का खजाना खोला हुआ है। जितनी भर्तियाँ उनके कार्यकाल में हुई है, वह Record है। इतनी भर्तियाँ सभी सरकारों ने मिल के नहीं की। उनको रोजगार पुरुष कह सकते हैं। इस माने में।

खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियाँ देना या करोड़ों रूपये Award और पुरस्कार में बाँट देना,National Games-National Championships के आयोजन में सरकार की भरपूर भूमिका और महिलाओं को SHG के जरिये सशक्त करना, उनको सियासी जंग फतह करने में निस्संदेह मदद करेगा। मोदी-शाह को उन्होंने आज भी पहाड़ों में बड़ा Brand बनाए रखने में सफलता पाई है और खुद भी Brand बन के उभरे हैं। तुरुप कार्ड बनने के साथ। Congress को अब मोदी-शाह के साथ ही पुष्कर नाम की चीन की दीवार को भी तोड़ना होगा। जो आपसी लड़ाइयों की बारिश की बौछार से गीली हो गई बारूद के सहारे ध्वस्त करना बेहद कठिन होगा।

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