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AI की Health-Science-Industries में अहम भूमिका-Experts:Graphic Era में International Seminar में देश-विदेश के 400 Experts मंथन में जुटे

विकास में सूक्ष्म जीवों की भूमिका पर भी International Seminar शुरू

Chetan Gurung

Artificial Intelligence की Health-Science-Industries  में भूमिका और उसके लगातार बढ़ते असर पर Graphic Era Hill University में 2 दिन के International Seminar के पहले दिन  देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और शोधकर्ताओं ने जम कर मंथन करते हुए अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा की इन क्षेत्रों के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी AI की अहमियत लगातार बढ़ेगी।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘अलाइव’ में मुख्य अतिथि बेंगलुरु के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज के डीन प्रो. श्रीपाल पाटिल ने कहा कि AI के उपयोग से फार्मेसी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्य अधिक सरल, सटीक और प्रभावी हो जाएंगे। हिमालयन वेलनेस सेंटर, देहरादून के अध्यक्ष डा. S फारूक ने कहा कि  AI भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं की नींव है। सम्मेलन में तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जाएगा। अमेरिका, चीन, दुबई, दक्षिण कोरिया, केन्या समेत  400 प्रतिभागी ऑनलाइन और ऑफलाइन इसमीन शरीक होंगे।

सम्मेलन का आयोजन ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ फार्मेसी ने किया। सम्मेलन में पहले दिन यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ एकेडमिक्स डा. प्रमोद एस नैयर, कुलसचिव डा DK जोशी, डीन ऑफ स्कूल ऑफ़ फार्मेसी, डा. नरदेव सिंह , ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डा. इंदु सिंह के साथ डा. दिनेश पुरी ,डा. अरुण कुमार, डा. दीपिका रैना  शामिल हुए। सम्मेलन का संचालन डा. भारती शर्मा ने किया।

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ग्राफिक एरा में विकास में सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर भी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन  में दुनिया भर के विशेषज्ञ सतत विकास में सूक्ष्मजीवों की भूमिका, नवीन शोध और व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा करने इकट्ठे हुए हैं।ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में आज सतत विकास के लिए माइक्रोबॉयल इनोवेशन पर यह दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया है।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च देहरादून के डायरेक्टर डॉ M मधु ने कहा कि सूक्ष्मजीव आधारित तकनीकी मृदा की उर्वरता बढ़ाने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता सुधारने में सहायक है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की गिरती सेहत से पोषण, स्वास्थ्य और राष्ट्र विकास प्रभावित होते हैं। इसलिए सूक्ष्मजीव आधारित टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

कुलपति डॉ नरपिंदर सिंह ने कहा कि माइक्रोबॉयल इनोवेशन जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन में छह तकनीकी सत्र होंगे।  सम्मेलन में 10 देशों, 16 राज्यों के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विशेषज्ञ अपने शोध पत्र  और समाधान प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन का आयोजन ट्रैफिक अधिनियम यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेण्ट, यूकास्ट, UCB, PMMIT सोसायटी,MBSI ने संयुक्त रूप से किया।

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