
Chetan Gurung
CM पुष्कर सिंह धामी अभी नौकरशाही में और चीर-फाड़ कर सकते हैं। कुछ ऐसे अफसर उनके निशाने पर मुमकिन हैं, जिनका पेशेवर Track Record और सरकार के प्रति वफादारी बेदाग नहीं है। मौकापरस्त-सुस्त और लापरवाह किस्म के अफसरों के पंख काटे जा सकते हैं। उनको Transfer Express Train में सवार कर नए ठिकाने (महकमे-ज़िम्मेदारी) को रवाना किया जा सकता है। सरकार के लिए सिर दर्द और नतीजे देने की काबिलियत के पैमाने पर खरा न उतरने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही। पूर्व की कई सरकारों के लिए IAS-IPS अफसर ही कालनेमी बने थे। मुख्यमंत्री PSD पूर्ववर्तियों की तरह अफसरों के जाल में फँसने वाले नहीं समझे जाते हैं। वह खासे Smart हैं। उनका दरबार अभी भी काबिलियत और नाकाबिली तथा अन्य अहम पैमानों पर आधारित List तैयार कर रहा है। इस पर अमल होने में अधिक वक्त नहीं लगेगा। ऐसी संभावना जतलाई जा रही।
मुख्यमंत्री पुष्कर की खासियत है कि वह सचिव और DM-VC-MD स्तर पर नौकरशाहों को काबिलियत और वफादारी दिखाने के लिए पूरा मौका देना पसंद करते हैं। इसके बावजूद ये कहा जा सकता है कि खास तौर पर कुछ सचिव स्तर के नौकरशाह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे। वे महकमे को न तो मुख्यमंत्री की अपेक्षाओं के मुताबिक चुस्त-दुरुस्त कर पा रहे न ही सरकार की छवि को उस सूरत तक निखार पा रहे, जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है। इनमें 2 किस्म के अफसर हैं। एक वे जो काम ले पाने में असमर्थ, असहाय या फिर बेहद सुस्त-नाकाम साबित हो रहे। दूसरे वे हैं जो सिर्फ अपने हिसाब से और अपनी सोच के अनुसार ही काम कर रहे। ऊपरी आदेशों को भी धता बता रहे। उनको लगता है कि सरकार में अफसरों की कमी है, और वे उसकी मजबूरी हैं। दोनों किस्म के अफसर सरकार और मुख्यमंत्री के लिए आने वाले Assembly Elections में सिफर से ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
ये अंदाज लगाया जा रहा है कि ऐसे अफसरों की रिपोर्ट CM PSD के पास है। इनमें कुछ ऐसे हैं जो खुद को इधर का दिखाने की कोशिश करते हैं और हकीकत में या तो दूसरी तरफ हैं या फिर सरकार के लिए वफादार दिखाने की छद्म कोशिश करते हैं। कुछ अफसरों की कार्यशैली सरकारी खजाने को भी चोट पहुंचा रही हैं। जब एक-एक पैसे की जरूरत सरकारी खजाने को है, तब कुछ नौकरशाह अपनी कार्यशैली से इसमें सेंध लगाने का जुर्म करते नजर आए हैं। नौकरशाहों की कार्यशैली और बर्ताव हर सरकार के लिए जी का जंजाल साबित होता रहा है। उत्तराखंड में जिले से ले के शासन स्तर तक के अफसरों से लोग सीधा संवाद करना और काम करने-कराने की उम्मीद करते हैं।
उनके सरकारी खजाने से बिल दिए जाने वाले फोन के न उठने को भी पहाड़ की अवाम चुनाव में गंभीर मुद्दा बना लेती है। सरकार को ये मालूम है। वह बार-बार आदेश निकालती रही है कि हर अफसर लोगों की Calls को या तो उठाए या फिर समय मिलने पर Call Back जरूर करें। इस आदेश की धज्जियां उड़ना बंद नहीं हुआ है। जिले से ले के शासन तक के अधिकांश IAS-IPS अफसरों के फोन उठते नहीं हैं। आम अवाम ही नहीं मंत्री स्तर तक से आए Call को भी नजर अंदाज कर दिया जाता है। मुख्यमंत्री पुष्कर जानते हैं कि ये गंभीर मसला साबित हो सकता है। अफसरों को वह ताकीद करते रहे हैं कि हर फोन को उठाने की कोशिश की जाए। बात कर Caller की समस्या को दूर करने का प्रयास करें।
सरकार के लिए वे अफसर भी बवाल साबित हो सकते हैं जो दफ्तर पर कम मिलते हैं या फिर लोगों से मिलने से कतराते हैं। उनको टरकाने की कोशिश अधिक करते हैं। याद रखना चाहिए कि CM पुष्कर दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में भी पहुँच के अधिक से अधिक लोगों से मिलने और आम से आम लोगों तक पहुँच के उनके दुख दर्द को कम करने की कोशिश करते रहते हैं। पूर्व के कई मुख्यमंत्री सिर्फ नौकरशाही पर अधिक निर्भर रहने या फिर उनको तरतीब से पहचान न पाने की वजह से लोटा-लंगोट समेटने को मजबूर हुए थे। PSD उनसे अलग समझे जाते हैं और दिखे भी हैं। वह सिर्फ अधिक से अधिक मौका खुद को साबित करने या फिर सुधार के लिए देना पसंद करते हैं। जब अफसर सुधार करने के लिए बिलकुल भी न माने तभी उनको झटका देना पसंद करते हैं।
उन्होंने जब भी IAS-IPS Cadre में तबादलों की फेहरिस्त जारी की है, उनमें काफी हद तक ये झलकता रहा है। ताजा तबादला सूची में कुछ ऐसे ही संकेत दिखाई दिए हैं। बेशक कुछ बच गए या फिर छूट गए। इनमें MD-VC-जिले के साथ ही शासन स्तर के अफसर शामिल हैं। संभव है कि एक और Transfer Train धड़धड़ाते आए और ना-उम्मीदी भर अफसरों को ढो के चल पड़े। जिलों में भी कुछ IPS अफसर हैं, जो अहम कुर्सियों पर हैं लेकिन वे सिर्फ सरकार के लिए संकट साबित हो रहे। उनके लिए भी एक Transfer Train का Engine गरम हो के सीटी मार रहा है। ऐसा छन के आ रही खबरें बता रहीं।
मुख्यमंत्री पुष्कर अब जो भी कदम तबादलों के बाबत उठाएंगे, उसमें विधानसभा चुनाव की तैयारी जरूर शामिल होगी। साल-2022 के Assembly Elections में उनको कुछ नौकरशाहों ने ऐन वक्त पर धोखा दे दिया था। इनमें वे भी शामिल थे, जो उनकी वफादारी की कसमें खाते थे। चुनाव आए तो वे गिरगिट हो गए थे। BJP के ही कुछ सरदारों ने तो इसमें आग में घी का काम किया था। इस बार PSD पुराने सबक को याद रखते हुए कदम बढ़ा रहे। वह खुद को ND तिवारी-भुवन चन्द्र खंडूड़ी-विजय बहुगुणा-हरीश रावत-त्रिवेन्द्र सिंह रावत के Bracket में शामिल नहीं होने देना चाहेंगे। इसकी उम्मीद जतलाई जा रही।
ये सभी CM इसलिए भी याद किए जाते हैं कि वे कुछ खास नौकरशाहों पर अति निर्भर हो गए थे या फिर नौकरशाही को नियंत्रित करने में नाकाम रहे थे। सतर्क-Smart PSD के बाबत ये कहा जा सकता है कि भालू का काटा कंबल से भी डरता या सजग रहता है। वह पूर्ववर्तियों की दशा देख के पहले ही कंबल से भी दूर रहने की कोशिश कर सकते हैं। यहाँ तो सियासी जिंदगी का सवाल है। समझा जाता है कि पिछली List में शामिल होने से बच गए कुछ बड़े और अहम चेहरों के साथ भी तबादला-तबादला खेला जा सकता है।



